इस मौसम में दोस्तों की नजर
घबरा रहे हैं लोग गरमी से मुझे बरसात का डर है,
बेशक फ़िकर मुझको लगी हरपल यही कच्चा मिरा घर है।
ये सच गुमां करता नही हर हाल में खुश है यही फितरत,
झुकता मिरा सिर तो वही जिस भी गली में यार का दर है।"रैना"
घबरा रहे हैं लोग गरमी से मुझे बरसात का डर है,
बेशक फ़िकर मुझको लगी हरपल यही कच्चा मिरा घर है।
ये सच गुमां करता नही हर हाल में खुश है यही फितरत,
झुकता मिरा सिर तो वही जिस भी गली में यार का दर है।"रैना"
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