शुक्रवार, 31 मई 2013

दोस्तों आज मेरे लिए बड़ा ख़ुशी का दिन है,
राष्ट्रीय कवि "सी एम अटल" जी ने
मुझे अपना शिष्य स्वीकार कर लिया है,
और मुझे "राजेन्द्र गुमनाम" नाम दिया है।
आज मैंने अपना तख्लुश रैना"से बदल कर
"गुमनाम"रख लिया है। जय जय मां 

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