sufi tadka
सोमवार, 13 मई 2013
wah ri facebook
वाह री फेसबुक धन्य है तू ??????
जो झेल रही हजारों कवियों को,
वरना शहर में कवि का नाम सुनते ही????
सिर पर पैर रख कर भागते हैं लोग।"रैना"
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