इन्सां अब तो हैरां सा है,
हर दिल में इक तूफां सा है।
जीने की हसरत कब बाकी,
टूटा दिल का अरमां सा है।
भूले से भी ये मत कहना,
कल का बच्चा नादां सा है।
जो मरता उसकी मजबूरी,
जीने को रखा सामां सा है।
"रैना"को अब लगता ऐसा,
हर नारी का मुख मां सा है।"रैना"
हर दिल में इक तूफां सा है।
जीने की हसरत कब बाकी,
टूटा दिल का अरमां सा है।
भूले से भी ये मत कहना,
कल का बच्चा नादां सा है।
जो मरता उसकी मजबूरी,
जीने को रखा सामां सा है।
"रैना"को अब लगता ऐसा,
हर नारी का मुख मां सा है।"रैना"
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