रविवार, 26 मई 2013

mere ghar men

मेरे घर में अम्बे रानी,
रहना तुम स्वीकार करो,
तुच्छ दास हम तेरे हैं,
हम पे ये उपकार करो।
प्यार करो मां प्यार करो,
प्यार करो मां ...............
दूर तलक अन्धेरा है,
उजाला नजर नही आता,
तेरे सिवा इस दुनिया में,
रखवाला नजर नही आता,
मरुस्थल में भटक रहा हूं,
भव से मुझको पार करो।
प्यार करो मां ..................
इतना कर्म मां मेरी करदे,
भूल का मैं सुधार करू,
हर नारी में मेरी माता,
तेरा ही मैं दीदार करू,
मेरे जीवन की बगिया को,
मईया जी गुलजार करो।
प्यार करो मां ............."रैना"
सुप्रभात जी .............जय जय  मां





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