शुक्रवार, 30 दिसंबर 2011

uthho bhartwasiyo dusri

उठो भारतवासियों,
आजादी की दूसरी लड़ाई के लिए तैयार हो,
एक हाथ में फूल तो दुसरे हाथ में तलवार हो,
जो देशभक्त इमानदार फूल उसे पकड़ाया जाये,
भ्रष्टाचारी गद्दार को तसल्ली से मजा चखाया जाये.
रैना" ये तो हम सब जानते है,
लातों के भुत बातों से कब मानते है."रैना" 

aam aadmi me

आम आदमी में देशभक्ति का जज्बा नही होता."रैना"

बुझदिलों की बस्ती पर गीदड़ राज करते है."रैना"

अन्ना न हारा है,न ही हारेगा,
जबतक
उसकी साँस में साँस है,
वो पुकारेगा,
भारत माता की जय,
मगर अब देखना ये है,
 क्या हमने मान ली हार,
जो मान ली हार तो,
भ्रष्टाचारियों के कदमों में शीश झुकायो,
और उनकी शान में नारें लगाओ,
अपनी इज्जत लुटवाओ,
फिर इज्जत लुटवाने में क्या शर्म है,
क्योकि पूंछ हिलाना तो बुझदिलों का कर्म है.
जय माँ भारती ....................भारत माता की जय."रैना"

दिल के आस पास तेरी यादों की खुशबू महके,
मेरे जीवन की बगिया में अब सिर्फ तूं महके.
चाहे तुम बिछुड़ कर चले गये बहुत दूर रैना"
फिर भी अहसास तू हरपल मेरे ही रूबरू महके. "रैना"

गुरुवार, 29 दिसंबर 2011

anna ne foda aesa

कुछ लोगों का तर्क है,
अन्ना जी के पीछे भीड़ कम है,
अरे मूर्खों
अन्ना ने फोड़ा ऐसा बम है,
जागी है देश की जनता,
नेताओं का रुका दम है.
ये क्या कम है.
अन्ना जी देश भक्त सच्चे है,
हमारे लिए लड़ रहे,
उनके अपने न बच्चे है.
देश के नेताओं को नही है शर्म,
सदन में देख लिया उनका कर्म.
अब तो हमें आगे आना चाहिये,
अपने देश को गद्दारों से बचना चाहिये."रैना"

taumar kitabe

ता उम्र किताबे पढ़ते रहे ये फिर भी समझ नही आया,
इस रंग बिरंगी दुनिया में,मैं क्यों आया तू क्यों आया.
जगत के सच्चे मालिक ने देखो अजब लीला रचाई है,
उसके विधि विधान को तो कोई भी समझ नही पाया.
इन्सान को उस जादूगर ने चक्करों में है डाल दिया,
किस घर में उसका डेरा पता उसने न अपना बतलाया.
"रैना" उम्र गुजार सेवा में हो साफ स्वच्छ नीयत नीति,
फिर पूरा हो जाये तेरा मकसद इसलिए तू यहाँ आया.
सुप्रभात जी ..................................good morning.

बुधवार, 28 दिसंबर 2011

jb bhi hote hai

जब भी होते तेरी यादों के रूबरू,
बहुत सोचते बेवफा हम है के तू.
बाद मुद्दत के  बरकरार बेकरारी,
हसरत तमन्ना वही है जुस्तजू.
बिछुड़ के तुझसे ये हुआ हासिल,
मैं को छोड़ करने लगे है तू ही तू.
बेशक आतिशे इश्क में तप कर,
"रैना" हो गया है खरा सोना सुर्खरू."रैना"

jab se hmne

जबसे जिन्दगी से प्यार हुआ है,
हर लम्हा गुले गुलजार हुआ है.
अब खिंजा का कोई फिकर नही,
यूँ चमने जिन्दगी बहार हुआ है.
फकत अभी तो हुआ है एहसास,
महबूबे हसीं का न दीदार हुआ है.
पैगाम आयेगा तो जाना पड़ेगा,
कोई भी जाने को न तैयार हुआ है.
रैना"उसका डूबना तो तय होता,
दो कश्तियों पे जो सवार हुआ है."रैना"

is desh me bujhdilo

भारत देश में नेताओं की मौज बड़ी है,
क्योकि यहां बुझदिलों की फ़ौज बड़ी है.
जो खुद तो घर से बाहर नही आते है,
जो प्रयासरत उसका मनोबल गिराते है.
हमारे लिए दूसरा लटके जाये फांसी पे,
हम अक्सर यही योजना तो बनाते है.
अन्याय के खिलाफ उठना हमारा फर्ज,
हमारे धार्मिक ग्रन्थ हमें ये समझते है.
"रैना" बुझदिलों की कही भी कदर नही,
 वो जिन्दा लाश कही इज्जत न पाते है."रैना"
सुप्रभात जी .........................good morning ji

मंगलवार, 27 दिसंबर 2011

jha kharke n bartan

जिसमें परेशानी न हो वो सफर कैसा,
जहां खड़के न बर्तन फिर वो घर कैसा.

लिखने में गुजर दी मैंने उम्र तमाम,
फिर भी लिखना आया न उसका नाम."रैना"

तुम क्या जानो एक तिनके की एहमियत,
उस पंछी से पूछिये जो घोसला बना रहा है."रैना"

kirayedaro pe

किरायेदारों से मेरा दिल निराश है,
घर के असली मालिक की तलाश है."रैना"
वाह अंदाजे जमाना??????????
जो लड़की पैदा नही हुई,
वो करोड़ो अरबों खर्च कर बचाई जा रही है,
जो पैदा हो गई
उसकी मंडी में बोली लगे जा रही है,
कोठे पर नचाई जा रही,
दहेज की बलि जा रही है,
क्या इसलिए लड़की बचाई जा रही है."रैना"  

aankhon se nirntar

आँखों से निरंतर बरसे बरसात है,
मत पूछ ये दिल का मुआमलात है.
इश्क का पहाडा तो बड़ा मुश्किल,
एक दो तीन इसमें पांच न सात है."रैना"

tute ptto ko

टूटे पत्तों को उड़ा कर हवा सोचने लगी वो तूफान हो गई."रैना
बदला मिजाज मौसम का असर या बदगुमानी."रैना"

आप को चाहे फुरसत न मिले मगर मैं शाम ढलने तक इंतजार करुगा."रैना"

मेरी बेबसी मेरे चहरे पर झलकने लगती है,
वैसे मैं हंसने का प्रयास तो करता हूं"रैना"

रविवार, 25 दिसंबर 2011

देश प्रेमियों के लिए खास रचना 

सोय मन में आजादी की अलख जगाने का,
अब फिर वक्त आ गया है,
भारत माँ को आजाद करवाने का.
बेशक गौरे अंग्रेजों को हमने भगा दिया,
मगर काले अंग्रेजों ने माँ को बंदी बना लिया.
काले अंग्रेजों से माँ को छुडवाने का.
अब फिर वक्त आ--------------------
छीना झपटी,लूट मार नंगा भ्रष्टाचार है,
द्रोपदी का चीर हरण होता बीच बाजार है,
दुशासन से द्रोपदी को बचाने का.
अब फिर वक्त आ---------------
मतलब के दरिया में सारे असूल बह गये,
भाषणों तक सीमित अब हमारे नेता रह गये,
ऐसे झूठे नेताओ को सबक सिखाने का.
अब फिर वक्त आ-----------------
माँ की आबरू पर कई वार हो गए,
देश के मसीहा ही गद्दार हो गये,
बेनकाब कर गद्दारों को भगाने का.
अब फिर वक्त आ--------------
रोती बिलखती माँ मेरी खड़ी की खड़ी रह गेई,
रामराज्य की कल्पना धरी की धरी रह गेई,
शहीदों के सपनों का देश बनाने का.
अब फिर वक्त आ -------------
उठो वीर जवानों भारत माँ की पुकार सुनो,
रंग लो बसंती चोला और आजादी की राह चुनो,
"रैना" अपने कदम पीछे नही हटाने का.
अब फिर वक्त आ---------------"रैना"

kahe kart hai deri

भटक रहा काहे धक्के खाये सुन ले अर्ज तू मेरी,
पल पल निरंतर पिसता जाये काहे करत है देरी.
यहां तो दिन समस्त उजियारा जो चाहे तू पा ले,
वहां तू कुछ भी कर नही पाये काली रात अँधेरी.
काये तू अभिमान करे है तेरा नही कुछ भी कोई,
ठोकर लगी  गिर जायेगी जीवन मिट्टी की ढेरी.
घड़ी पल दिन में दिन महीने साल गुजरते जाये,
कर ले जतन "रैना" ख़त्म हो आन जान की फेरी. "रैना"
सुप्रभात जी ...................good morning ji

शनिवार, 24 दिसंबर 2011

soniya lali

जनलोक पाल बिल पे,
अपने कारनामों की वजह से,
पहले भड़के लालू, मुलायम भैया जी,
अब भड़की सोनिया लाली है,
पहले लगता था दाल में काला,
अब लगता सारी दाल ही काली है.
जनतंत्र पर हो गया नेता तंत्र भारी,
जनता के हिस्से महंगाई तंगहाली है."रैना"


tane

ताने जमाने के क्यों हो तुम सहते,
मेरे दिल के घर में क्यों नही रहते,
मेरे दिल का घर महल आलीशान,
आँगन में प्यार के झरने है  बहते. "रैना"

jmane ke tane

इस कद्र जमाने के ताने भला क्यों तुम सहते,
मेरे दिल का घर खाली इस में क्यों नही रहते.
"रैना"मेरा दिल का घर तो महल आलीशान है,
मस्त नजारा मुसल्सल प्यार के झरने बहते."रैना"

har tarf khushi mahkai

आज हर तरफ ख़ुशी हुई आबाद दोस्तों,
ये शुभ दिन सबको मुबारखबाद दोस्तों.
सब की मुराद पूरी हो रंज न रहे मलाल,
"रैना की उस मालिक से फरियाद दोस्तों."रैना"
सुप्रभात जी .................good morning

शुक्रवार, 23 दिसंबर 2011

dastur jmane ka

कसूर नजरों का सजा दिल को मिली है,
ये दस्तूर जमाने का,
करता कोई और भरता कोई और है."रैना"

aek buda

एक बूढ़ा
हमें जगा रहा है,
हमारे भविष्य को कवच पहना रहा है,
मन में देश प्रेम की अलख जला रहा है.
त्याग तपस्या क्या होती करके दिखा रहा है.
अब वो हमें बुला रहा है तो हमें जाना चाहिए,
क्योकि वो अपने लिए कुछ नही कर रहा,
हम भी जानते सिर्फ हमारे लिए  लड़ रहा.
फिर ये भारत की संस्कृति है की हम बुजुर्गों का,
आदर मान करते है,सम्मान करते है.
ये भी इतिहास गवाह है,
देश हित में जब भी किसी ने बीड़ा उठाया है,
तो बच्चा बच्चा घर से बाहर निकल आया है.
इसी दम से हमने गौरे अंग्रेजों को यहां से भगाया है.
आओ हम सब मिल अन्ना जी के कदम से कदम मिलाये,
काले अंग्रेजों का अस्तित्व मिटा कर
भारत देश को भ्रष्टाचार मुक्त बनाये.
भारत माता की जय, यही पूजा आरती, जय माँ भारती.........."रैना"

kanto se lga

काँटों से लगा ताउम्र निभा जायेगे,
फूलों का क्या पल में मुरझा जायेगे."रैना"

maa ne ghar se bheja tha

गौर फरमाये जी, मेरी बेबसी ????????
पिता जी ने घर से समझा कर भेजा था,
बाजार से कुछ लाने के लिए,
मैं बाजार की चकाचोंध देकर सब भूल गया,
कुछ और ही खरीदने लगा."रैना"

beshak sham ka surj

मेरी जब से मिली तुझसे नजर है,
मुझको अपनी न कोई भी खबर है.
मैं तो वैसे ही बेकार भटक रहा था,
समझ आई यहां वहां तेरा ही घर है."रैना"

chirag ki tarh jal kar

शमा की तरह जल कर,
महफ़िल को रोशन करने की सोचिये,
परवाने की तरह जल कर मरना बुझदिली है."रैना"
सुप्रभात जी .............................good morning
मैं अपनी धुन का पक्का अपने आप में खोया रहता हूँ,
आप इस काबिल वर्ना मैं न किसी को वाह वाह कहता हूँ."रैना"

गुरुवार, 22 दिसंबर 2011

kalmadi bula rha hai

कलमाड़ी बुला रहा है, सीटी बजा रहा है,
चिताबरम जल्दी आओ जी घबरा रहा है."रैना"

chahe vo bahut dur

चाहे वो लाख कोस दूर चले जाते है मगर दिल में बसने वाले याद बहुत आते,"रैना"

ये तो सच है लोग भी कहते है,बेवफा लोग तो खुदा से दूर रहते है,"रैना"

तुम उम्र दराज की बात न करो तेरे गम में सूरज ढलने लगा है."रैना"

मेरे शहर के लोग भ्रम में रहने लगे,
खुद को खुदा से ही जुदा कहने लगे है."रैना"

mere dil ki tang galiyo se

मेरे दिल की तंग गलियों से यूँ न गुजरिये,
देखो वक्त बदल रहा  कुछ तुम भी बदलीये.
हमने तो मान ली है बुजुर्गों की नेक सलाह,
बेशक हम तो संभल गये तुम भी संभलिये.
वैसे अच्छी नही होती है इस कद्र तल्खियाँ,
फरेबी इस जमाने को धीरे धीरे ही समझिये."रैना" 
हमारे मुहु से  हंसी के फुहारे ही छूटने लगे है,
जब से हमें पता चला वो दिल से पूछने लगे है."रैना"

neto ko aelrji

लालू,मुलायम को तो,
अपने कारनामों की वजह से लगी मिर्ची है,
मगर सोनिया गाँधी,
जनलोक पाल बिल को लेकर क्यों भड़की है,
कही सोनिया जी ने,
इन नेताओं का झूठा तो नही पीया है,
कोई बड़ा घोटाला करवाया या किया है.
मैडम जी गुस्सा न करो जनलोक पाल बिल आने दो,
इन नेताओं ने बहुत मलाई खाई है,
अब इन्हें जेल की हवा खाने दो............."रैना"
भारत माता की जय...............................

तुझसे बिछुड़ने का गर गम करते तो ये तय हस्ती मिट गई होती."रैना",

aankho ko nam nhi


आ के ख्वाबों में न सता,
मुझको भूल जा भूल जा.
मैंने हार अपनी मान ली,
तुम बावफा मैं हूँ बेवफा.
अब जमाने का दस्तूर ये,
बदले वफा के मिले जफा.
दिल के शो केश में रखे है,
गम तूने जो किये है अता.
मर्जी तेरी गम दे या ख़ुशी,
तेरी रजा में "रैना"की रजा.

बुधवार, 21 दिसंबर 2011

tum tum ho kuchh bhi

तुम तुम हो कुछ भी कह सकते,
हम तो हम है चुप ही रह सकते.
गम सहने के आदी हो गये हम,
बांध बांधा आंसू नही बह सकते.
जुदाई का गम मौत से बढ़ के है,
मगर हम ये गम भी सह सकते.
अब तो लोग रेत के घरों में रहते,
ये घर तो कभी भी है ढह सकते.
तू चाहे जितने मर्जी गम दे यारा,
"रैना"तुझे कुछ नही कह सकते."रैना"

tum tum ho kuchh bhi

तुम तुम हो कुछ भी कह सकते,
हम तो हम है चुप ही रह सकते."रैना"

kaise btau

हमें मिलने वाले गम कुछ निराले हैं,
दिखाऊ कैसे  दिल पे कितने छालें हैं.
हमारी हिम्मत देखों हार नही मानी,
गम तो हमने मेहमान से संभाले है,
जमाने की फितरत समझ नही आई,
खिलते हसीं चेहरे दिल के तो काले है.
यही सच वो उसी को काटते अक्सर,
ये काले फनियर नाग जिसने पाले है.
रैना"जिनकी नीयत नीति है अच्छी,
बेशक उनके घर में ही होते उजालें है."रैना"

TU N SHI TERI YAD

तू न सही तेरी याद सहारे के लिए,
इतना काफी है मेरे गुजारे के लिए.
मझदार कभी साहिल के करीब डूबे,
यूँ कश्ती रवा होती किनारे के लिए.
खुदा की मर्जी हुआ हो गया हादसा,
हम घर से निकले थे नजारे के लिए.
"रैना" मेरी नीयत पे शक न करना,
 जान दे सकते अपने प्यारे के लिए."रैना"

मंगलवार, 20 दिसंबर 2011

beshak kohra ghna

मेरे ख्वाबों के शहर में जलजला आ गया है,
आबाद इक बस्ती को खंडहर बना गया है.
मंजर बरबादी का मुझ से देखा नही जाता,
जिन्दगी की राहों पे घना अँधेरा छा गया है.
दिल के आंगन में बिखरी यादें निशानियाँ,
बहुत रोये जब ख़त पुराना हाथ आ गया है.
घर रोशन करने के लिए जलाया था चिराग,
"रैना"वही चिराग तो मेरे घर को जला गया है."रैना"

dil to man jayega

दिल मन जायेगा जरा कोशिश तो करो,
ऐसा लगता तुम्हारे जज्बात है बहके हुए."रैना"
बेशक जीने का तो सिर्फ ढोंग है करते.
वैसे अब इन्सां दिन में कई बार मरते.
अपनी जिन्दगी से बहुत तंग आ चुके,
शहर के लोग मौत से तो कम ही डरते."रैना"
आज जब उनका सामना हुआ है,
ऐसा लगता कोई हादसा हुआ है.
ये बात हमें समझ नही है आई,
वो इस कदर क्यों खफा हुआ है.
मेरे रकीब की हंसी रोके न रुके,
लगता उसे खास फायदा हुआ है.
जबसे दिल उसका दीवाना हो गया,
बेशक "रैना" खुद को भुला हुआ है."रैना"

सोमवार, 19 दिसंबर 2011

badle wqt ka asar

बदले वक्त का असर अब दिखने लगा है,
इन्सान कोडियों के भाव बिकने लगा है.
फैशन के दौर में सब कुछ ही जायज है,
मर्द भी अब औरत सा ही दिखने लगा है
अपने दिल की भड़ास निकलने के लिए,
आजकल हर कोई ही शेर लिखने लगा है.
कल तलक कायम रखी अपनी हकुमत,
मगर अब शौहर बीवी से ही पिटने लगा है.
रैना वहां की भी कुछ तो कर ले फिकर,
देखो धीरे धीरे अब सूरज छिपने लगा है."रैना"

diware bahut hili magar

दीवारे नही अब तो हमें नींव हिलानी है,
हर दिल में देश प्रेम की अलख जगानी है.
वोट हथियाने को नेता जो करते है खड़ी,
हर हाल वो नफरत की दीवार गिरानी है.
बच्चे सुनने को बेताब शहीदों की कहानी,
फिर गहरी नींद में क्यों सोई हुई नानी है.
नारी को अब अबला कहने की भूल न करे,
भारत देश की हर नारी झाँसी की रानी है.
माँ से धोखा करने वाले कुछ गद्दार भी है,
बेशक उनके मंसूबों पे अब फेरना पानी है.
"रैना"तेरी नसीहतों का कुछ असर होगा,
वैसे आजकल ये दुनिया बहुत सयानी है."रैना"

रविवार, 18 दिसंबर 2011

ghode to bechare

बेचारे घोड़े तो बोझ खींचते खींचते मरते है,
भारत देश में हरी हरी घास तो गधे चरते है.
देखो नेता पहने फिरते है बुलेट प्रूफ जैकेट,
सीमा पे जवान बिना जैकेट के जंग लड़ते है.
जिस प्रकार मासूक करती महबूब से धोखा,
इसी प्रकार ये  नेता जनता से धोखा करते है.
भ्रष्टाचार करने में कुशल प्रवीन होते माहिर,
नेता न जाने कोन से कालेज में ये पाठ पढ़ते है."रैना"

gar tum

गर तुम दिल का दर्द समझ जाते,
फिर हम तन्हाई में आंसू न बहाते.
काश तुम पहले ही इशारा कर देते,
फिर हम सपनों का महल न बनाते.
सियासतदानों से जैसे तुम्हारे तेवर,
खूब गिरगट की तरह रंग बदल जाते.
चाहे तू लाख छुपा ले अपने ऐब "रैना"
मगर उसकी नजर से बच नही पाते."रैना"


शनिवार, 17 दिसंबर 2011


चल जरा अपनों से संभल के,
वरना रह जायेगा हाथ मल के.
गम की आग से नही घबराना,
देखो सोना निखरता है जल के.
हिम्मत से ही सब होता हासिल,
दिखाना है किस्मत को बदल के.
परवाने को देखिये बेमौत मरता,
बुझदिल लिपटे शमा से मंचल के.
"रैना" तेरी मजबूरी है ये भी जरूरी,
चलना पड़ेगा वक्त के सांचे में ढल के."रैना"

o chlna apno se sambhl ke

चल जरा अपनों से संभल के,
वरना रह जायेगा हाथ मल के.
गम की आग से नही घबराना,
देखो सोना निखरता है जल के.
हिम्मत से ही सब होता हासिल,
दिखाना है किस्मत को बदल के.
परवाने को देखिये बेमौत मरता,
बुझदिल लिपटे शमा से मंचल के.
"रैना" तेरी मजबूरी है ये भी जरूरी,
चल चला चल वक्त के सांचे में ढल के."रैना"

   

apne kya begane

अपने क्या बेगाने सब झूठे,
मौका लगते ही बेख़ौफ़ लूटे.
चमकते को तो देते सलामी,
हाल न पूछे जब सितारा टूटे.
हुस्न वालो की बात क्या करे,
करते गुमान बात बात पे रूठे.
"रैना" डूबा साहिल के करीब,
क्या करे उसके तो भाग्य फूटे."रैना"

prabhu ka dhyan

प्रभु का ध्यान करले जीवन सवंर जायेगा,
वरना यहां भटके जैसे वहां धक्के खायेगा.
संभाल के रख ले चाहे जितना भी खजाना,
बेशक एक भी आन्ना तेरे साथ न जायेगा.
चलती जो सांसें तेरे सारे संगी साथी  प्यारें,
टूटते ही सांसें ये सारा खेल ही बदल जायेगा.
रैना"चौबीस घड़ी दो घड़ी ही उसके नाम की,
नाम की कश्ती पे बैठ भवसागर तर जायेगा. "रैना"
सुप्रभात जी .....................good morning ji 

शुक्रवार, 16 दिसंबर 2011

jo apna bhla chahte ho

अपना भला जो चाहते हो,भूल के भी न सच बोलो,
ये बेईमानों की बस्ती है बेहतर होगा के कम तोलो,
अब ये दस्तूर जमाने का माहिर हो फरेब करने में,
आँखों से निकले न आंसू पानी लगा पलकें भिगो लो.
अब ये भी अदा जमाने की चमत्कार को नमस्कार,
जनता बन जाती है बेवकूफ सपनों का स्टोर खोलो."रैना"
,

बुधवार, 14 दिसंबर 2011

dil ka ghar

बेशक तेरे जाने के बाद मैंने घरौदा तोड़ा नही है,
मगर किसी और के रहने काबिल छोड़ा नही है,
इक बार ठोकर खा के गिरा बहुत ही डर गया हूँ,
तन्हा रहता हूँ रिश्ता किसी और से जोड़ा नही है."रैना" 

paise ki diwani,

पैसे की दीवानी एकदम दुनिया सारी,
आशिक देखो अब तो  बने है व्यापारी,
मर्यादा में पुरुष न जब तोड़े हदें सारी,
फिर भला क्यों पीछे रह जाये गी नारी.
कल युग का असर सच हारे झूठ जीते,
बेईमानी के आगे फीकी पड़ी ईमानदारी.
अब बेटे की परेशानी हो गई बूढ़े माँ बाप,
अपने साथ नही रखती पत्नी प्राण प्यारी.
महंगाई हिरनी जैसे अब लगती छलांगे,
जनता सिर पीटे निकम्मी सरकार हमारी.
बिन पैसे अब तो नौकरी नही है मिलती,
"रैना" भूखा मरेगा बच्चे कर अब दिहाड़ी."रैना"
        

jis se bhi puchh tere

 पूछते है जिससे भी तेरे घर का रास्ता,
 वो हमें देने लगता अपने घर का वास्ता.

जो भी पीते शराब को पानी की तरह,
वो तो जिन्दगी से न मोहब्बत करते,
रिंद मस्ती में सब कुछ ही भुलाये बैठे,
बेफिक्र देखो मौत की है दावत करते.
न उसके घर का पता न मंजिल का,
डोले मझदार में पता नही साहिल का,
अब बनाये हमने वक्ता अपने मुरसद,
पीर वो पैसे के कहने को इबादत करते."रैना"



jis se bhi puchh tere

 पूछते है जिससे भी तेरे घर का रास्ता,
 वो हमें देने लगता अपने घर का वास्ता.

जो भी पीते शराब को पानी की तरह,
वो तो जिन्दगी से न मोहब्बत करते,
रिंद मस्ती में सब कुछ ही भुलाये बैठे,
बेफिक्र देखो मौत की है दावत करते.
न उसके घर का पता न मंजिल का,
डोले मझदार में पता नही साहिल का,
अब बनाये हमने वक्ता अपने मुरसद,
पीर वो पैसे के कहने को इबादत करते."रैना"



रविवार, 11 दिसंबर 2011

hmne gilla karna n jayj

हमने गिला करना न जायज समझा,
वो हमे लूटते रहे खुदा का नाम लेकर."रैना"

जागो भारतवासियों अब तो सोने का वक्त नही,
शांतिपूर्ण आहिंसक अंदोलन हो बहाना रक्त नही,
मेरी माँ भारती की भी यही तो करुणा भरी पुकारहै,
चैन न ले जबतक जनलोक पाल बनता शसक्त नही."रैना"

usse ik bar

मैंने उससे इक बार तो पूछना जरुर है,
आखिर मेरी जिंदगी में क्यों न सरूर है,
मेरी चीख कही तुझ को परेशां न कर दे,
लगता इस लिए तू तो बैठा जा के दूर है.
वैसे हर महफ़िल में होती तेरी ही चर्चा,
बेशक सारे शहर में तू बड़ा ही मशहूर है.
मुझसे फेर ली है क्यों तूने अपनी आँखें,
मैंने  ये मान लिया तू ही तो मेरा हजूर है.
"रैना"वो चाहने वालो का  लेता इम्तहान,
मेरे मौला ये बता तेरा क्या यही दस्तूर है."रैना"

apne to nsib hi

बेशक इन्सान के नसीब अक्सर रुठते हैं,
ऐसे भी पत्ते जो पीले होने से पहले टूटते हैं
किसके पास जा करे हम इनकी शिकायत,
ये हुस्न वाले तो बीच बाजार में ही लूटते है.."रैना"

बेशक मेरी बीवी मुझ से बहुत डरती है,
इसलिए तो बेलन का प्रयोग करती है."रैना"

मेरी मजबूरी का फायदा उठाते रहे,
मैं रोता रहा वो हंसते मुस्कराते रहे."रैना"



शुक्रवार, 9 दिसंबर 2011

mai bolu tu bole

मैं बोलू तू बोले,
ये बोले वो बोले
आओ मिल कर सारे बोले,
जय भोले  बाबा बम भोले
जय भोले बाबा बम भोले...........रैना"................... 

tujh se bichhudne ke bad

तुझसे बिछुड़ने की सोच भी नही सकता,
मुझे खबर ???????
 जिस्म से जान जुदा होगी तो क्या होगा."रैना"

दिल का तेज धड़कना,
सांसों का यूँ अटकना,
नींद का न आना,
यूँ ही दिल घबराना,
मर्जे इश्क के शुरू के लक्ष्ण है.
ये मेरा तजुर्बा है...................."रैना"

दिल का तेज धड़कना,
सांसों का यूँ अटकना,
नींद का न आना,
यूँ ही दिल घबराना,
इश्के मर्ज के शुरू के लक्ष्ण है.
ये मेरा तजुर्बा है."रैना"

ye koi kyo lut kar

कोई क्यों लूट कर ले गया मेरी पतंग को मैंने पेचा लड़ाया ही न था."रैना"

ढलती शाम को देख कर मेरी आँख के चश्में बहने लगे."रैना"

हम एक इन्सान को पूजते रहे मगर वो नही पिघला,
काश वो पत्थर होता तो पिघल जाता."रैना"

खैर अब मुझे ये एहसास होने लगा है की उसके दम से ही मेरा दम है."रैना"

मौत तो निश्चित है मगर यादों के दम से कुछ दिन निकल रहे है."रैना"

गिर के संभल सकता हूँ,
 मैं उठ के चल सकता हूँ,
 एहसान नही किसी का,
इन्सान हूँ बदल सकता हूँ."रैना"   

koi bhi rasta khi

ख़त्म हो कोई रास्ता ये नामुमकिन नही मुश्किल है,
मुश्किल हो सकती आसान मगर जमाना संगदिल है."रैना"

मौसम की तरह बदलते इन्सान अब अपनी सुरत भी भूल जाते है."रैना"

खिजा के मौसम में भवरें चमन में गुनगुनाते नही."रैना"

जब हकीकत से मेरा हुआ सामना तब मुझे खबर हुई तुम बेवफा हो."रैना"

इन्सान ताउम्र सीखता मगर फिर भी,
 सीखने को बहुत कुछ बाकी रह जाता है,
और इन्सान अलविदा कह जाता है."रैना"   

ja uske phlu me

जब उसके पहलू में ही मरना है,
फिर दुःख का जीकर क्यों करना.है."रैना"

खुदा का शुक्र है अरमान हिस्सों में बंटे,
वैसे अक्सर अरमान टूट कर बिखर जाते है.

वो कभी भी किसी के नही होते,
जो लम्बी तान के बेफिक्र सोते."रैना"

गुरुवार, 8 दिसंबर 2011

jai maa bharti

जय माँ भारती,
ढूंढ़ रही सारथी,
कश्ती डोल रही,
हवा दम तोल रही,
घनघोर अँधेरा है,
गद्दारों ने घेरा है,
ख़ामोशी उदासी है,
हर आँख प्यासी है,
दीन न ही  धर्म है,
बदल गया कर्म है,
बचा न इमान है,
हो गया बेईमान है.
ऐसे न ही वैसे की,
भूख है बस पैसे की,
बेईमान नेता है,
कुछ नही  देता है,
सब लेता ही लेता है,
बाप जैसा बेटा है.
अर्ज करे माँ भारती,
जवानों बनो सारथी,
यही पूजा आरती,
बनो न जी स्वार्थी.
कश्ती बाहर निकलो,
देश को अब सम्भलो.
"रैना"देश को संभलो. "रैना"
सुप्रभात जी ...........good morning 

do pato ke bich pis

पेशे खिदमत एक हास्य कविता अपने विचारों से अवगत जरुर करवाए.

जब से हुई शादी तब से निरंतर घिस रहा हु,
यूं कह सकते है दो पाटों के बीच पिस रहा हूँ.
बीवी को पूछता हूँ तो माँ झाड़ती है,
माँ को पूछता हूँ तो बीवी बेलन से मारती  है.
दिल का हार्न अब बिलकुल न बजता है,
खाया पीया शरीर को जरा न लगता है.
घर में कलह यादाश्त कुछ खोने लगी है,
मेरी भरी जवानी भी अब बूढ़ी होने लगी है.
बीवी से तो अब  रिश्ता तोड़ ही नही सकता,
मगर माँ को पेंशन मिलती उसे छोड़ नही सकता.
क्योकि महंगाई की वजह से वेतन कम पड़ने लगा है,
बच्चो की पढ़ाई का खर्च भी अब बढ़ने लगा है.
अब हालात ऐसे हो चले लगता है जोगी हो जाऊगा,
किसी माडर्न बाबा का चेला बन जयकारे लगाऊगा.
आजकल  बाबाओ के चेले पहलवान नजर आते है.
 क्योकि बाबे एव चेले मुफ्त का खूब माल उड़ाते है.
वैसे मैं ऐसी योजना तो बनाता हूँ,
मगर बच्चों के बारे सोच सहम जाता हूँ.
अब ये तय  दो पाटो के बीच पिसना ही पड़ेगा,
बच्चों के खातिर चंदन की तरह घिसना ही पड़ेगा."रैना"

मेरे द्वारा 5 मई 1980 को रात्रि लगभग 11 बजे लिखी गई अपनी पहली रचना.
बिछुड़ा करवा से मत घबराना,
ठहर न मुसाफिर तुझे दूर जाना.
ठहर न मुसाफिर .....................
गम तो है ख़ुशी का एक सहारा,
बिन गम ख़ुशी का नही नजारा,
ख़ुशी से गम को गले से लगाना.
ठहर न मुसाफिर .....................
"रैना" इक दिन तो बहार आएगी,
बिगड़ी हुई तक़दीर सवंर जाएगी,
मिले मंजिल कदम पीछे न हटाना.
ठहर न मुसाफिर ....................."रैना"

  

बुधवार, 7 दिसंबर 2011

apni takt ka

अपनी ताकत का एहसास तो करवाना पड़ेगा,
बेशक कुछ पाने के लिए कुछ तो गवाना पड़ेगा.
इतनी आसानी से तो फतेह होता नही है किला,
खैर बुलंद इराधे खून  पसीना तो बहाना पड़ेगा.
परेशान दुखी भारत माता कह रही है सपूतों से,
भ्रष्टाचारियों  गद्दारों से तो देश को बचना पड़ेगा.
जनता ने जो दे दिया अपनी एकता का सबूत,
फिर सरकार को जनलोक पाल बनाना पड़ेगा.
निसंदेह जो कर रहा हो निस्वार्थ जनता की सेवा,
"रैना"उसके कदम से कदम तो मिलाना पड़ेगा."रैना"
जब से दुनिया किताबी पढ़ाई पढ़ने लगी है,
तब से प्यार की परिभाषा ही बदलने लगी है.
परवाने भी अब जलने के लिए नही मचलते,
अल्तफ़ शमा भी बिजली से ही जलने लगी है.
माँ बाप बहन भाई बेटे नाते नाती रिश्तेदार,
सबकी नीयत अब वक्त के साथ चलने लगी है.
बेशक अब लड़के चल पड़े कुछ अलग राह पे,
मगर लड़की माँ बाप के अरमां पूरे करने लगी है.
आम जन के घर का बिगड़ गया है बजट देखो,
सरकार की देख रेख में ही महंगाई बढ़ने लगी है.
काम में मसरूफ"रैना" को पल भर फुरसत नही
इसलिए तो बीवी हररोज बिन बात लड़ने लगी है."रैना"  

ndi ke kinare

नदी के किनारे कभी मिलते नही,
कभी पत्थर भी तो पिघलते नही,
कही बात से मुकरने लगे है लोग,
बचे कुछ जो बात से फिरते नही."रैना".

जब से दुनिया किताबी पढ़ाई पढ़ने लगी है,
तब से प्यार की परिभाषा ही बदलने लगी है.
परवाने भी अब जलने के लिए नही मचलते,
अलबत्ता शमा भी बिजली से जलने लगी है.
बहन भाई बेटे के थे पहले भी बदले मिजाज,
अब माँ की ममता भी वक्त के संग चलने लगी है.

सोमवार, 5 दिसंबर 2011

tu bewfa ho ke

तू बेवफा तेरी याद बावफा निकली,
ये तेरी हो के भी तुझ से जुदा निकली.
तुझको बददुआ देने की हिम्मत न हुई,
तेरे लिये दिल से अक्सर दुआ निकली."रैना"



अब तो समाचार फर्जी भी बनाया जाता है,
ये सही पैसे देकर झूठ सच लिखवाया जाता है."रैना"
भला नेता
जनलोकपाल बिल क्यों करे पास,
क्योकि उन्हें इतना तो है विस्वास,
जब जनलोकपाल बिल बन आयेगा,
पहले फंदा उनके गले में डाला जायेगा.
अन्ना जी
इसलिए ऐसा जनलोक पाल बिल बना लो,
नेताओं को पूरी तरह से बाहर निकालो.
फिर तो देरी का सवाल ही न रह जाये गा,
गैर नेता
जनलोक पाल बिल एक घंटे में पास हो जायेगा.
फिर नेता पहले की तरह गुल्छरे उडायेगे,
पट्रोल पीने वाले खूब पीयेगे,
चारा खाने वाले चारा खायेगे.
देश को घोटाला चैम्पियन बनायेगे........."रैना"

अरे भाई ये व्यंग्य बाण हमारे पूजनीय अन्ना जी के लिए नही नेताओ के लिए है."रैना"
वैसे अख़बार मालिक
अधिकतर पत्रकारों से बिना पैसे काम लेते है,
बदले में उन्हें विज्ञापन इकठ्ठा करने का ठेका देते है,
जनता को खबरे लगा कर डराओ धमकाओ,
ढेर सारे विज्ञापन इकठ्ठा कर लाओ.
जनता का अब एक ही निशाना है,
शसक्त जनलोक पाल बिल पास करवाना है,
यदि ऐसा न हुआ तो कदम पीछे नही हटाना है,
नेताओ को अपनी एकता एहसास करवाना है.
क्योकि हमने भारत को विश्व का सरताज बनाना है."रैना"
जनता का दिल,
शसक्त जनलोक पाल बिल,
नेता गये हिल,ढूंढ़ रहे है बिल,
सोचते अब तो बच न पायेगे,
मलाई मिलेगी नही सूखी कैसे खायेगे."रैना"


जनता का अब एक ही निशाना है,
शसक्त जनलोक पाल बिल पास करवाना है,
यदि ऐसा न हुआ तो कदम पीछे नही हटाना है,
नेताओ को अपनी एकता एहसास करवाना है.
क्योकि हमने भारत को विश्व का सरताज बनाना है."रैना"
जनता का दिल,
शसक्त जनलोक पाल बिल,
नेता गये हिल,ढूंढ़ रहे है बिल,
सोचते अब तो बच न पायेगे,
मलाई मिलेगी नही सूखी कैसे खायेगे."रैना"
  दींन

अब तो समाचार फर्जी भी बनाया जाता है,
ये सही पैसे देकर झूठ सच लिखवाया जाता है."रैना"
भला नेता
जनलोकपाल बिल क्यों करे पास,
क्योकि उन्हें इतना तो है विस्वास,
जब जनलोकपाल बिल बन आयेगा,
पहले फंदा उनके गले में डाला जायेगा.
अन्ना जी
इसलिए ऐसा जनलोक पाल बिल बना लो,
नेताओं को पूरी तरह से बाहर निकालो.
फिर तो देरी का सवाल ही न रह जाये गा,
गैर नेता
जनलोक पाल बिल एक घंटे में पास हो जायेगा.
फिर नेता पहले की तरह गुल्छरे उडायेगे,
पट्रोल पीने वाले खूब पीयेगे,
चारा खाने वाले चारा खायेगे.
देश को घोटाला चैम्पियन बनायेगे........."रैना"

अरे भाई ये व्यंग्य बाण हमारे पूजनीय अन्ना जी के लिए नही नेताओ के लिए है."रैना"
वैसे अख़बार मालिक
अधिकतर पत्रकारों से बिना पैसे काम लेते है,
बदले में उन्हें विज्ञापन इकठ्ठा करने का ठेका देते है,
जनता को खबरे लगा कर डराओ धमकाओ,
ढेर सारे विज्ञापन इकठ्ठा कर लाओ.
हर बात का नही गिला करते,
मानिन्दे गैर नही मिला करते.
जिंदगी दो दिन की बची बाकी,
हर पल फूल से है खिला करते."रैना"
शहरे दिल इस कदर बरबाद हुआ,


ऐसा उजड़ा है फिर न आबाद हुआ.


हर दर्द की दवा तबीबो कर लेता,


इलाज दर्द ए इश्क न इजाद हुआ.


उसको रहे न दिन दुनिया की खबर,


सबक इश्क का जिसको याद हुआ.


"अनन्या" इंसान तब नही समझता,


एहसासे गलती कुछ दिन बाद हुआ.
                                             "अनन्या"




                                                               




कि गया कुछ भी नहीं , रहा कुछ भी नहीं 

अच्छा ही हुआ जो उसने नजरे फेर लीं ,

पर अफसोस तो यह है कि इतनी देर की l 

"वो"बेवफाई करके भी खुश न हुए ,

हम वफा करके बहुत अच्छे निकले ल


तू बेवफा तेरी याद बावफा निकली,


मेरे दिल से तेरे लिए दुआ  निकली.







रविवार, 4 दिसंबर 2011

जीने की बात कह कर मेरे दिल में न आग लगाओ यारों,
बेहतर होगा मुझे तो कोई मरने का रास्ता बताओ यारों. "रैना"

तन्हा न रोता मजे से गुजारा कर लेता,
काश तू  दिल से भी किनारा कर लेता.
इक उम्मीद ने है मुझको  जिन्दा रखा,
वरना कब से मौत का नजारा कर लेता.
इश्क में हासिल होती अक्सर रुसवाई,
ऐसा न होता तो प्यार दोबारा कर लेता."रैना"

mai aap ke prti

मैं आप के प्रति वफादार हूँ,
मगर ध्यान रहे?????????
कुत्ता नही मैं इन्सान हूँऊऊऊऊऊऊऊऊऊउ,
कभी भी अपना विचार बदल सकता हूँ. "रैना"

kam ham itana kar jayge

काम बस इतना कर जायेगे,
नाम तेरा ले कर मर जायेगे.
जान हथेली पे रख ली हमने,
ये मत सोच हम डर जायेगे.
दिल पे लगे है जख्म जो भी,
वक्त के मरहम से भर जायेगे.
"रैना" फौलादी जिगर अपना,
हंस के सितम तेरा जर जायेगे."रैना" 

शनिवार, 3 दिसंबर 2011

gantatrta diwas

गणतंत्रता दिवस पे सम्मानित होने की इस बार अपनी बारी है,
क्योकि ऊँगली कटवा कर शहीद होने की हमने कर ली तैयारी है.
ये पहली बार नही जब इक कायर को मिलेगा बहादुरी का इनाम,
गाँधी के देश में गधे पंजीरी खाते ऐसी ही कुछ व्यवस्था हमारी है.
जनता के रक्षक भ्रष्ट राजनेता देश को लुट कर भरे विदेशी बैंक,
आश्वासनों से पेट भरती जनता के हिस्से में सिर्फ बेचारी लाचारी है.
"रैना" चोर उच्चको के घर में उजाला उनके शाही नवाबी अन्दाज,
भूख से पेट उनके सिकुड़ रहे जिनके खून में ईमानदारी खुद्दारी है."रैना"
ये क्यों भूल रहे हो इस देश में तुम भी आबाद हो,
फिर ये क्यों नही सोचते तुम्ही भगत,आजाद हो. "रैना"

wah kya jmana

वाह क्या जमाना आ गया है,
चिराग अँधेरे से उजाला मांग रहा है,
साहूकार चोर से ही ताला मांग रहा है.
इक्कसवी सदी का असर है कुछ ऐसा,
मर्द औरत से कान का बाला मांग रहा है.
दिन में तो दिख्नाने को करते  पाठ पूजा,
रात होते भक्त कवाब, प्याला मांग रहा है.
नैतिकता का इस कदर होने लगा पतन,
पेट भरा अब भूखे से निवाला मांग रहा है.
अपने घर "रैना" तो मनाता रोज दीवाली,
मगर पडौसियों के लिए दीवाला मांग रहा है. "रैना"

sukhe pani sekase

पाउडर क्रीम लगा के ही मुहु चमकाते है,
वैसे भी लोग सर्दी में सूखे पानी से नहाते है."रैना"

पहले लड़के दूध घी खाते थे,
कसरत करते हट्टे कट्टे पहलवान नजर आते थे,
मगर अब बेल पूरी, गोल गप्पे खाते है,
 नशा अपनाते है,
इलू इलू गाते है,
तभी कांगड़ी पहलवान नजर आते है."रैना"

कैसे कह दू ये दिल उदास है,
मेरा दिल तो आप के पास है.
कोई अपना न इस शहर में,
इक तू लख्ते जिगर खास है.
जिसने थामा दामन उसका,
फेल नही वो पास ही पास है,
तेरे दीद की तलब है हरदम,
"रैना"का दिल रहता उदास है.





गुरुवार, 1 दिसंबर 2011

ye mat puchho dukhi hai

 ये मत पूछो दुखी हम कितने,
मुझको मिले बेदर्द गम कितने.
दिल जख्मों से छलनी हो गया,
कैसे दिखाऊ  नैना नम कितने."रैना"

चिराग नही मैं फिर भी जल रहा हूँ,
निकला न सूरज फिर भी ढल रहा हूँ,
इश्क में हासिल हुई है बेरुखी रुसवाई,
पछताऊ बैठा बेबस हाथ मल रहा हूँ."रैना"


खिलते है फूल जैसे मौसम ए बहार में.
दिल की कली खिलती वैसे ही प्यार में.
तेरे दिल में क्या है तू ही जाने हमनवा,
हमने तो खुदा है देखा यार दिलदार में.
पूछ न हाले दिल हम पे बुरी है गुजरी,
मारे गये गुलफाम देखो जी एतबार में.
बातें हुई मगर कोई सिरा तो न मिला,
उलझे रहे तमाम रात यूँ ही तकरार में.
"रैना"ख़ुशी किसी की न गम का सवाल,
गुजर जाये जिन्दगी यूँ  ही जीत हार में."रैना"

हुस्न वाले वफा नही करते,
    दर्द देते दवा नही करते."रैना"
हमे कब फुरसत है ऐ दोस्त हम तो हरपल सफ़र में रहते है."रैना"
उन्होंने इस कदर रुखसत किया अपने शहर से,
हम ढूंढ़ते रहे अपने पैरों के निशान."रैना"
मुझे रास्ता बताने वाला कोई न मिला मैं पत्थरों से पूछता रहा उनके घर का पता."रैना"
ये ख्वाबो के महल बनाना छोड़ दे,
बातों की रेत से बस्ती बसाना छोड़ दे,
यदि गद्दारों का ही देना है साथ,
फिर ये गडयाली आंसू बहाना छोड़ दे."रैना"

dil ki kli hai khilti


खिलते है फूल जैसे मौसम ए बहार में.
दिल की कली खिलती वैसे ही प्यार में.
तेरे दिल में क्या है तू ही जाने हमनवा,
हमने तो खुदा है देखा यार दिलदार में.
पूछ न हाले दिल हम पे बुरी है गुजरी,
मारे गये गुलफाम देखो जी एतबार में.
बातें हुई मगर कोई सिरा तो न मिला,
उलझे रहे तमाम रात यूँ ही तकरार में.
"रैना"ख़ुशी किसी की न गम का सबब,
गुजर जाये जिन्दगी यूँ  ही जीत हार में."रैना"

बुधवार, 30 नवंबर 2011

kbhi gaur se tum

कभी गौर से अपनी नादानी देखो,
मेरी आँखों से छलकता पानी देखो.
खता तेरी या कसूर मेरे नसीबो का,
बरबाद हो गई मेरी जिंदगानी देखो.
डूब कर गिलासों में तबाह हो गई है,
कभी चढ़ी थी मचल के जवानी देखो.
किताबे दिल का कोई पेज नही कोरा,
खून से लिखी गमगीन कहानी देखो.
भूल गया हुआ मैं खुद को भी यारों,
आइना में दिखती सुरत बेगानी देखो.
बाद कयामत के भी वादे से न मुकरा,
बेशक "रैना"शख्स है खानदानी देखो."रैना"

सोमवार, 28 नवंबर 2011

indar de khade vich

beshak tu indar de khade vich rijha nal gavega,
manaka ithe sanu kaliya das hun kon sunavega.

चलो अब ये जरूरी काम भी किया जाये,
तन्हा बैठ दो घड़ी उसका नाम लिया जाये.
 नही दे सकते जो किसी को हम ख़ुशी यारों,
किसी को भूल कर भी तो गम न दिया जाये.
शराब का पीना भी भला क्या कोई पीना है,
जाम ए इश्क उसके नाम का ही पिया जाये."रैना"

teri murli ki mithhthhi tan

तेरी मुरली की मिठ्ठी मिठ्ठी तान,
काना मोहे अच्छी लागे,
जाऊ वारी वारी मैं तो कुर्बान,
 काना मोहे अच्छी लागे.
कन्हैया मोहे अच्छी लागे...................तेरी मुरली की ........
तेरी मुरली की धुन जब बाजे,
नाचे मेरा अंग अंग रूह मेरी नाचे,
हुई भवंरी मैं  जग ये हैरान.

काना मोहे अच्छी लागे.
कन्हैया मोहे अच्छी लागे.................तेरी मुरली की ........
"रैना" कहे काना इक बार फिर आ जा रे,
मिठ्ठी मिठ्ठी प्यारी मुरली सुना जा रे,
आके धर्म की रख ले आन.

काना मोहे अच्छी लागे.
कन्हैया मोहे अच्छी लागे........तेरी मुरली की .............
सुप्रभात जी .................................good morning ji



kash tujhe preshan kre

काश तुझको भी परेशान करे मेरी यादें,
जैसे मेरी परेशानी का सबब तेरी यादें."रैना"
यारों ने जिद्द है पकड़ी पीनी शराब है,
 खूब मस्त बहाना मौसम खराब है."रैना"
काश कोई मुझे वाजिव दाम देता,
फिर तो मैं दिल का सौदा कर लेता."रैना"
बेशक बसती है दुनिया उस पार भी,
कभी झाँका तो करो घर के बाहर भी."रैना"
जब भी मौसम सर्द होता है,
दिल में हल्का सा दर्द होता है."रैना"
आजकल हम अपना अंदाज निराला रखते,
आँख कान खुले मगर होठों पे ताला रखते.
हर जगह बैठे है रिशवत खाने वाले ही कुत्ते,
हम काम करवाने को हाथों में निवाला रखते.
लाखों का काम इक बोतल मजे से करवा देती,
मतलब निकलवाने को सामने है प्याला रखते.
पंडित ने बताया ग्रहों का असर काफी कम होगा,
काम न रुके कोई तभी पाल के कुत्ता काला रखते.
माँ बाप बहन भाई से तो अक्सर रहती अनबन,
मगर बड़े आदर के साथ घर सास औ साला रखते.
"रैना" शैम्पू से धो चेहरे को तेल लगा चमकते है,
ये अलग बात है हम अपने दिल को काला रखते."रैना"


शनिवार, 26 नवंबर 2011

lakshya nishana


जिन्दगी का लक्ष्य निशाना होना चाहिए,
ये भी जरूरी है कोई हंगामा होना चाहिए.
एक ही रास्ते पे चले सारे शहर के लोग,
जिन्दगी का अंदाज निराला होना चाहिए.
रंग काला इस से कोई पड़ता नही फर्क,
मगर दिल कभी भी न काला होना चाहिए.
"रैना" चैन से जीने का इक ही मन्त्र खास,
आँखें खुली मगर होंठों पे ताला होना चाहिए. "रैना"

jb bhi yad aate


वो पुराने किस्से,
जब भी याद आते है,
दिल बहुत दुखाते है."रैना"


जबसे खुद पे गुमान होने लगा,
तबसे आइना देखना छोड़ दिया.
खो न जाये आईने में मेरा वजूद
इसलिए ही आइना है तोड़ दिया.  "रैना"
जबसे खुद पे गुमान होने लगा,
तबसे आइना देखना छोड़ दिया."रैना"

चाहत तो इबादत है किसी को मजबूर क्या करना,
जो सांसों में बस जाये उसको दिल दूर क्या करना,
छोड़ करके दुनिया को जब मीरा श्याम की हो जाये,
फिर तो मुकाम हासिल है बेवजह गरूर क्या करना. "रैना"
चाहत तो इबादत है किसी को मजबूर क्या करना,
जो सांसों में बस जाये उसको दिल दूर क्या करना,
छोड़ करके दुनिया को जब मीरा श्याम की हो जाये,
फिर तो मुकाम हासिल है बेवजह गरूर क्या करना. "रैना"

aankho se duri ho jati,

बेशक राहे जिन्दगी में कोई ऐसी भी मज़बूरी हो जाती,
मगर दिल से दिल न दूर होता चाहे आँखों से दूरी हो जाती."रैना"

lakir khichwaye

राहुल का सवाल ????????????????
माया का माया जाल,
उतर प्रदेश को कर दिया कंगाल,
फिर राहुल जी ये बताओ ????????????
मनमोहन सिंह जी के बारे में,
आप का क्या ख्याल,
जिन्होंने महंगाई की मार से जनता कर दी बेहाल.
राहुल जी का कहना ???????????????????
प्रधानमंत्री ईमानदार.
जनता का कहना ????????????????????
क्या इसलिए हो रही घोटालो की भरमार.
ऐसी ईमानदारी हमें नही स्वीकार
देश की हो रही बदनामी और जनता लाचार.
 "रैना"

kya khak

कोई जनून बाकी न रहा,
दिल में खून बाकी न रहा,
कैसे जीये अब तेरे शहर में,
चैन ओ सकून बाकी न रहा."रैना"

wah iaene ka bhi ajib

वाह आईने का भी अजीब मिजाज है,
बेख़ौफ़ सबको सच सच कह देता है."रैना"

वो दूर बैठा मुसल्सल इशारा करता रहा,
मैं उसकी हर अदा से किनारा करता रहा.
बेशक उसकी हर अदा काबिले तारीफ है,
वैसे"रैना"इन नजरों से नजारा करता रहा."रैना"
  मुसल्सल=निरंतर 

शुक्रवार, 25 नवंबर 2011

chinta fikar se dur

बेशक चिंता फिकर से दूर लम्बी तान के सोना चाहिए,
मगर इस जिन्दगी का कोई मकसद खास होना चाहिए,
गर कयामत के आ जाये दिन कोई मुसीबत आन पड़े,
फिर भी आँखों से छलके न आंसू सिर्फ दिल रोना चाहिए.
दुनिया की इस भीड़ में अक्सर खो जाये है सजो सामान,
इत्मिनान ही बेहतर है कभी होशो हवास न खोना चाहिए.
बदलते वक्त के साथ ही इन्सान भी है चोंगा बदल रहा,
"रैना"बदलो अंदाज मगर इंसान को इंसान होना चाहिए."रैना"
सुप्रभात जी ......................................good morning ji

शनिवार, 19 नवंबर 2011

jmana badl gya

जमाना बदल गया,
 बदल गया प्यार,
बदल गये भाई बंधू,
 बदला सारा संसार.
जमाना बदल गया ......................
धर्म के नाम पे करे लड़ाई,
भाई का दुश्मन बना भाई.
 अब चुप पीठ पे करते वार.
जमाना बदल गया ......................
अख़बारों में यही कहानी,
कही आग तो कही पानी,
इन्सां हद से हो गया पार.
जमाना बदल गया ......................"रैना"

khushi hai tumse milege

बेशक मंजिल की और बढ़ते ही जा रहे,
मदहोश है कुछ होश नही सब गवा रहे.
हमको खबर हरगिज जो साथ न चलेगे,
फिर भी देखो हम उन्हें अपना बना रहे. "रैना"

शुक्रवार, 18 नवंबर 2011

mai to dekho tut

मैं तो देखो टूट गया हूँ ऐसे,
अर्श से तारा टूट गया जैसे.
मेरी खता कोई कसूर नही,
फिर जुल्म क्यों हुआ कैसे.
लड़की जवान कुआरी बैठी,
बाप गरीब के पास नही पैसे.
गम के बोझ में दबा इन्सां,
दिल रोता होठों पे हंसी वैसे."रैना"

mujh se dil lgane se

मुझसे दिल को लगाने से पहले,
सोच लेना शमा जलाने से पहले.
बन न जाये कही मरने का सबब,
मौत ढूंढ़ती बहाना आने से पहले.
सम्भाल लेना सजो सामान सारा,
आतिशे उल्फत भड़काने से पहले.
अच्छी तरह से सोच समझ लेना,
अपना नया घर बसाने से पहले.
तू चाहे लाख सितम ही कर लेना,
रैना"भूले न तुझे मर जाने से पहले. "रैना"

mujhe gam nhi mar

 गम नही मुझे मर जाने का,
अलम सिर्फ तेरे न आने का.
इतना फर्ज तो अदा कर देते,
देख लेते जनाजा दीवाने का.
ऐ शमा तू जलाने से पहले,
कसूर तो बता दे परवाने का.
इक ही नही काबिले इल्जाम,
दगा देना दस्तूर जमाने का.
"रैना" कह गया है अलविदा,
नाम लेकर किसी अनजाने का."रैना"

गुरुवार, 17 नवंबर 2011

ab hme aur n

  अब न हमें और कुछ करना है,
  तेरी आँखों में डूब के मरना है.
आशिक की किस्मत में तन्हाई,
तन्हा बेदर्द जमाने से लड़ना है.

aadam bdla hai

बेशक शहर का न आलम बदला है,
बदला है तो सिर्फ  आदम बदला है.
निर्वाह करने के तरीके बदल गये,
ख़ुशी बदली न बेदर्द गम बदला है.
कुदरत का यारों वही अटल नियम,
मृत्यु बदली न ये जन्म बदला है.
"रैना" उसके दीवाने तो वही  खड़े,
मौकापरस्त लोगों ने करम बदला है."रैना"

बुधवार, 16 नवंबर 2011

ham vochirag hai


हम वो चिराग जो तूफान में जलते है,
अक्सर हवा के उलटे रुख ही चलते है.
हम सूरज चमकना हमारी फितरत,
मगर हम निकलते मर्जी से ढलते है.
महफ़िल का मिजाज है हमारे दम से,
बेशक पी के बहकते गिरते संभलते है.
भूल कर भी हमें बेदर्द न कहना यारों,
अरमां के बच्चे"रैना"के दिल में पलते है.

vo khfa uske ghar

वो खफा उसके घर जाये कैसे,
 अपने दिल को समझाये कैसे.
बाकी है अभी गुल के निशान,
तड़फ दिल की  मिटाये कैसे.
जल रही जो उल्फत की शमा,
अपने हाथों उसको बुझाये कैसे.
रुसवा कर दिया उसने हमको,
उसकी महफ़िल में  जाये कैसे.
दिल अपने पे भी यकीन नही है,
 सीने पे पत्थर भला उठाये कैसे.
अपनों ने तो दगा दिया हमको,
अपना किसी गैर को बनाये कैसे.
जो नीचें देख कर नही है चलता,
उसकी राह में पलकें बिछाये कैसे.
"रैना" उसको तो मना लेगा मगर,
रूठे नसीबा को फिर मनाये कैसे.
आजकल महिलाये
 देश को आगे बढ़ाने में काफी सहयोग दे रही है,
इसमें खास कर फ़िल्मी हीरोइने काफी दिलचस्पी ले रही है,
वो देश के गरीबों के लिए काफी कपड़ा बचाती है,
तभी तो कम कपड़े पहन कर जीवन बिताती है.
फिर भी लोग उन पर कटाक्ष करते है.

मंगलवार, 15 नवंबर 2011

ik sandesh

एक संदेश दोस्तों के नाम,

बेशक खाली मकान छोड़ जा,
मगर
उसमें कोई अपना निशान छोड़ जा.
क्योकि
तू दुनिया में आया कुछ करके दिखाने के लिए,
अपनी अलग पहचान बनाने के लिए,
वैसे सदियों से लोग,
झोपड़ियों अथवा महलों में रहते आये है,
मगर बहुत कम लोगों ने इतिहास में नाम दर्ज करवाए है.
तू हादसों से मत डर,
इतिहास के पन्नों पर अपना नाम लिखवाने की कोशिश कर. "रैना"

taine ke bera

तैने के बेरा ओ क्योकर प्यार करें स,
शमा बावली जलें क्यों परवाने जलें स.
मुझसे खफा इस कदर मेरा नसीब है,
मुझको गम देने वाला  मेरा हबीब है, 
दारू शाला का
 लगता अंदाज निराला,
बेचैन दिल को चैन आये,
वी ऍम दे दो इक प्याला. "रैना"
बेशक पीने वाले यही कहते है,
हम दारू से दूर ही रहते है.
भला दिन में ही क्यों रात करते हो,
जिन्दगी अभी दो दिन बाकि है
फिर क्यों मरने की बात करते हो.
तू फूल है
महका दे सारा आलम,
 टूटने के कुछ देर बाद,
 पैरों में नजर आएगा."रैना"

thhokre khata khata

ठोकरे खाता खाता हो गया परेशान बहुत तंग मैं,
उम्र गुजार दी फिर भी न समझा दुनिया के रंग मैं.
दुःख दर्द सोचों से मेरी करदे बहुत दूरी,
हाथ जोड़ के अर्ज करू मांग कर दे पूरी.
मेरे हाथ में दूध की वो बोतल पकड़ा दे,
मालिक मुझे एक बार फिर बच्चा बना दे.
मालिक मुझे एक.................................
फिकर चिंता से दूर मैं हँसता,मारता किलकारी,
खिलती मेरी सूरत देख अम्मा जाये वारी वारी,
मीठी मीठी लोरी सुना के माँ की गोदी में सुला दे.
मालिक मुझे एक.................................
पा पा मा मा बोलना फिर मइया मेरी मुझे सिखाये,
हाथ पकड़ के चलाती कभी उठा के सीने से लगाये,
माँ के वक्षों से छलकता वो अमृत फिर मुझे पीला दे.
मालिक मुझे एक.................................
भींच सीने से मुझे लगा के  मेरी अम्मी रानी सोती,
मैं कर देता छू छू माँ मेरी जरा भी गुस्सा नही होती,
फिर आप सो जाती गीले पर और मुझे सूखे में सुला दे.
मालिक मुझे एक.................................
मैं हाथ जोड़ के करू गुजारिश मिन्नतें भी बार बार,
बस इक बार लौटा दे भगवन बचपन की वो बहार.
सब से अलग हसीन वो मंजर इक बार फिर दिखा दे.
मालिक मुझे एक...................................................."रैना"


jaldbaji n kar

तू जल्दबाजी छोड़ दे इत्मिनान रखा कर,
जिंदगी किसी की अमानत ध्यान रखा कर.
भीड़ में रह के जीना भला ये भी क्या जीना,
गली मोहल्ले में तू अलग पहचान रखा कर.
इस शहर में अब धोखेबाज फरेबी है बहुत,
बेहतर दिल की अक्सर बन्द दुकान रखा कर.
बस खाना पीना सोना शादी और ये बच्चे,
तू इससे अलग भी तो कोई अरमान रखा कर.
"रैना" तेरे दिल में चाहे लाखों गम है लेकिन,
अपने होठों पे तू हलकी सी मुस्कान रखा कर."रैना"

firag dil

मेरी रचनाओं की तारीफ करने वाले दोस्तों का,
 मैं तहदिल से आभार व्यक्त करता हु
अपने ऐसे दोस्तों की शान में एक शेर कह रहा हु.
 बेशक आप होगे फिराग दिल,
वैसे मेरे शहर के लोग किसी की तारीफ करने से गुरेज करते है. "रैना"

foolu ki tahar harpal

फूलों के मान्निद हरपल खिला करो,
जब भी मिलते हो हंस के मिला करो.
अच्छी न लगती तेरे माथे पे शिकन,
करना हो गिला तो हंस के गिला करो. "रैना"

शनिवार, 12 नवंबर 2011

gribi

बेशक गरीबी मेरे घर में रहती है मगर मैं उसे दिल के पास फटकने नही देता."रैना"

mere rkibo se

एक सूफी रचना आप सब के लिए मगर इस पे गौर फरमाने की जरूरत है.
मेरे रकीबों से तू निभाना नही,
कहा मैंने मगर तूने माना नही.
कहा मैंने मगर......................
किया वादा तेरे संग निभाऊ गी,
सइयां तेरे ही रंग में रंग जाऊ गी,
आई होश तूने मुझे पहचाना नही,
कहा मैंने मगर......................
मोह माया के झूले में झूल गई,
चढ़ा हुस्न का रंग सब भूल गई,
कौन अपना है तूने जाना नही.
कहा मैंने मगर......................
अब जमीं पे पैर तू रखती नही
कभी सइयां के दर फटकी नही,
याद तुझको अपना दीवाना नही.
कहा मैंने मगर......................
"रैना" मान ले अब खता तेरी,
वरना हो जाएगी बहुत ही देरी,
वहां भटके गा मिले ठिकाना नही.
कहा मैंने मगर...................... "रैना"
सुप्रभात जी ................good morning

tere bin jn kya

सुबह होती रफ्ता रफ्ता शाम ढलती है,
तेरे बिन जीना क्या सिर्फ साँस चलती है.
इक मुद्दत से मेरे दिल के घर में हैअँधेरा,
बेशक जवां महफ़िल शमा भी जलती है.
बेवफा मय जिसको को रिंद है बना देती,
वो जिंदगी बिन पीये न कभी संभलती है.
बेशक दिल तो होतो घर उस मालिक का,
मगर अब दिल के घर में नफरत पलती है."रैना"


chal rha kuchh daur

चल रहा कुछ ऐसा दौर, इन्सां भ्रम में रहता है,
बात का बुरा मान जाये, जब सच कोई कहता है.
झूठा बेवफा फरेबी अब तो आगे खड़ा नजर आये,
जिसे का बचा है दीन  इमान वो तो पीछे ही बैठा है. "रैना"

शुक्रवार, 11 नवंबर 2011

dil ke ghar me aag

बदनसीबी मेरी दिल के घर में आग लगी है,
सब कुछ जल गया मगर तेरी याद न जली है
बेवफा याद तेरी तुझसे तो कही भली निकली,
सुख दुःख में बनके परछाई मेरे साथ चली है.
दुःख नही कोई मगर यही मेरे गम का सबब,
खिलने से पहले ही मुरझा गई दिल की कली है.
"रैना"दिन तो कट जाता काम में मसरूफ रहके,
याद रह जाये फक्त मयखाना जब शाम ढली है. "रैना"

गुरुवार, 10 नवंबर 2011

nsib me mere

हमें तुझसे न कोई गिला है,
नसीब में मेरे तू न लिखा है.
किसी को कोई कुछ न देता,
लिखा किस्मत में मिला है. "रैना"

kyo din me diye

क्यों दिन में दीये जला रहे हो,
क्या खुद को राह दिखा रहे हो.
जवां हो गये अरमानों के बच्चे,
क्यों तुम अब उन्हें मिटा रहे हो.
मुझे मरने दो ये मेरी किस्मत,
यूँ मुझ पे क्यों तरस खा रहे हो.
अभी अँधेरा है जलने दो चिराग,
क्यों बेसबब चिराग बुझा रहे हो.
"रैना" से जब तोड़ लिया रिश्ता,
फिर उसके ख्वाबों में आ रहे हो. "रैना"

बुधवार, 9 नवंबर 2011

vo n badla

वो न बदले चाँद सितारे,
देखो इन्सान बदले सारे,
बेशक वही समझे उसको,
जो है मर्जे इश्क के मारे.
दीवानी मस्त मीरा नाचे,
काना काना श्याम पुकारे.
अपने में खोज ले उसको,
क्यों रैना" भटके द्वारे द्वारे."रैना"
.

मंगलवार, 8 नवंबर 2011

angur khatte hai

वैसे तोड़ने के लिए छलांगे लगा रहा हूँ,
मगर अंगूर खट्टे है मैं नही खा रहा हूँ.
मेहनत करना तो मेरी समझ से परे है,
मैं निरंतर ख्वाबों के महल बना रहा हूँ.
 छपर फाड़ के गिरेगा मेरे घर में सोना,
मैं इसी आस के दम से जीये जा रहा हूँ. 
समझ आई"रैना"ये मेरे मन का फितूर है,
मैं जीवन के हसीं पल बेवजह गवा रहा हूँ.

jpe ja man jai jai maa

जपे जा मन जय जय माँ,
जय जय माँ................
तू नाम की शक्ति जान.
तेरा हो जाये कल्याण.
जपे जा मन जय जय माँ,
जय जय माँ.................
ये सांसो की है सारी कहानी,
पल पल बीती जाये जिंदगानी,
जीवन के संग मौत खड़ी है,
मौज में भूला बैठा तू अज्ञानी, 
कुछ करले अपना ध्यान.
जपे जा मन जय जय माँ,
जय जय माँ................. "रैना"
सुप्रभात जी ..............good morning


agnivesh

बेशक
 खास व्यक्ति आग्निवेश,
इनके कर्म अलग विशेष,
ये जहाँ भी करते  प्रवेश,
वहां शुरू हो जाता कलेश,
भगवा वस्त्र पहनते हमेश,
मगर मन में रखते है द्वेष.
इनका एक ही मकसद शेष,
बस कुर्सी के लिए लगते रेश.
इनकी नीयत बुरी,
इसलिए बुरी घटना घट जाती,
कुर्सी इनके हाथ से निकल जाती."रैना" 

सोमवार, 7 नवंबर 2011

sari rat

सारी रात चिराग जलाये रखते है,
तेरे आने की आस लगाये रखते है.
नींद चली गई छोड़ के साथ मेरा,
हम तो आँखों को जगाये रखते है.
यूँ कभी तो आयेगे बहारों के दिन,
अपने दिल को समझाये रखते है. "रैना"

meri kismat me hai tanhai

किस्मत में तन्हाई,हम तन्हा है,
नसीबों में रुसवाई, हम तन्हा है,
बहरे इश्क में हमने पैर जब रखा,
दुश्मन बनी खुदाई, हम तन्हा है "रैना"

रविवार, 6 नवंबर 2011

aek chnti

एक चींटी 
जब दिल्ली का सदन घूम के आई,
खेमे में आकर उसने शुरू करदी लड़ाई,
वह टाँगें खीचनें एवं टाँगें अड़ाने लगी,
यह देख रानी चींटी घबराने लगी.
दूसरी चींटी ने बताया ?????????
वो चींटी इसलिए बौखलाई है,
क्योकि दिल्ली का सदन घूम के आई है.
रानी चींटी कहने लगी,
वैसे भी दिल्ली के सदन में जो इक बार जाता है,
वह कुर्सी के लिए बौखला ही जाता है."रैना"

kuae par

मस्तियाँ करती बेशुमार कुए पर,
भर रही है पानी जवां नार कुए पर.
हुस्न के जलवे है यूँ सुगंध महकती,
देखो आके ठहर गई है बहार कुए पर.
उठ जाती है कभी नजरें झुकी झुकी,
राम जाने किसका इंतजार कुए पर.
जब से उनके घरों में नलके लग गये,
आशिक खड़े मायूस लाचार कुए पर. 
पानी भरने की मस्त अदा तो देख लूँ,
"रैना" कहे आ जा तू इक बार कुए पर. "रैना"

dusre ka ghar

दुसरे का घर जल के तबाह हो जाये,
 फिर भी अफ़सोस नही होता,
मगर जब अपने घर आग लगती है तो,
 इन्सान सुबक सुबक रोता.................. "रैना"

mere armano kihasti

मेरे अरमानों की हस्ती मिटा रहे हो,
पास आ के अब क्यों दूर जा रहे हो.
मेरे महले दिल को खण्डहर बना के,
तुम अब किसी और को बहका रहे हो.
कन्धे पे रख अपनी लाश लिए घूमता,
श्मसान का न मुझे रास्ता बता रहे हो.
उसकी की तपिश तुझे लगेगी जरुर,
मेरे घर को जो तुम आग लगा रहे हो.
"रैना"की मोहब्बत का निशां रह जाये,
चाहे तुम साबुन से उसको छूटा रहे हो. "रैना"

शनिवार, 5 नवंबर 2011

hasn khedan da

ਹਸਣ ਖੇਡਣ ਦਾ ਨਆਂ ਹੈ ਜਿੰਦਗੀ,
ਪੜਨਾ ਲਿਖਣਾ ਕਰ ਲੈ ਬੰਦਗੀ,
ਉਮਰਾ ਦਾ ਰੋਗ ਨਹੀ ਲਾਈਦਾ,
ਸਜਨਾਂ ਪਿਆਰ ਨਹੀ ਪਾਈਦਾ 
ਸਜਨਾਂ ਪਿਆਰ ਨਹੀ ........
ਜਿੰਦਗੀ  ਦਾ ਹਸੀਂ ਦੌਰ ਜਵਾਨੀ,
ਵੇਖੀ ਕਿਤੇ ਹੋ ਨਾ ਜਾਵੇ ਨਾਦਾਨੀ, 
ਸੋਹਨੀ ਸ਼ੈ ਤੋ ਅਖੀਆਂ ਬਚਾਈ ਦਾ.
 ਸਜਨਾਂ ਪਿਆਰ ਨਹੀ ........... "ਰੈਨਾ"

maa ki yad

 माँ की प्यारी याद गांव खींच लाती है,
चंद लम्हें जिंदगी हसीन हो जाती है.
शहर की दूषित हवा ने बूढ़ा किया है,
गांव में जवानी तो फिर लौट आती है.
खेल के गुजरा है जहां प्यारा बचपन
वो कच्ची गलियां मुझे बहुत भाती है.
तब महसूस होता जन्नत का नजारा,
चूमे माँ मुख  भींच के गले से लगती है.
"रैना" का गांव है जन्नत से भी बढ़ कर,
माँ बाप के कदमों में जिंदगी महकाती है.

शुक्रवार, 4 नवंबर 2011

kash teri


काश तेरी नजरों से बचा रहता,
मेरा भी दीनों धर्म बना रहता.
हाले दुनिया से बेखबर न होता,
मुझे अपना भी कुछ पता रहता.
चढ़ जाती नाम की खुमारी मुझ पे,
मैं किसी अच्छे काम लगा रहता.
अब बदल गया रंग तेरी बस्ती का,
यहाँ छल कपट फरेब दगा रहता.
"रैना" काश ऐसा तो ही हो जाता,
दिल में तेरा अक्स तो सजा रहता. "रैना"

shikwa shikayat

तुझसे गिला करू कैसे सब कुछ तो हासिल है,
नजरे इनायत कर्म तेरा बंद हो गया काबिल है.
मेरे पास हरपल रहता बेशक नजर नही आये,
एहसास मुझे ये सच्चाई जिंदगी में तू शामिल है."रैना" 
सुप्रभात जी ..............................................good morning

गुरुवार, 3 नवंबर 2011

gamgin kisa hai

अपना मेरे दोस्तों गमगीन किस्सा है,
फूलों ने निभाई नही काँटों से रिश्ता है.
गम में रह कर भी मुझे होता नही गम, 
तमाम मिले गम जिन्दगी का हिस्सा है."रैना"
.

sirf kafiya

सिर्फ काफिया रदीफ़ मिलाना ही नही मेरा मकसद,
मैं तो कुछ ऐसे शेर बनाना चाहता हूँ,
जिनके मार्फ़त हर दिल के करीब जाना चाहता हूँ,
आखिर शायरी किस कदर हंसा रुला सकती है,
जमाने को ये दिखाना चाहता हूँ."रैना"

rone se masle

रोने से मसले हल नही होते,
हिम्मत वाले तभी नही रोते.
जिनको मंजिल की तलब है,
चैन से वो तो कभी नही सोते.
जिनकी नीयत निति न कोई,
गम का बोझ तो वही है ढ़ोते.
लाजिमी वो ही तो पैदा होगा,
खेत में जो भी फसल है बोते.
"रैना" का तो जिगर फौलादी,
आंसुओं से न पलकें भिगोते.."   "रैना"

बुधवार, 2 नवंबर 2011

sawere sham

सुबह शाम दिन का नजारा उसी का है,
हम जो सांस ले रहे इशारा उसी का है.
हम जो सांस ले ...............................
हम जो देख रहे है झूठा वो सपना है,
और तो क्या जिस्म भी न अपना है,
अर्श चाँद सूरज हर सितारा उसी का है.
हम जो सांस ले .............................
मंदिर मस्जिद गुरूद्वारे चर्च में न बैठा है,
सचे नेक इन्सान के वो दिल में  रहता है,
जो इंसान का प्यारा वो प्यारा उसी का है.
हम जो सांस ले ..................................
देख महल बंगले को तू फूला न समाये रे,
आईने को देख करके  बहुत ही इतराये रे,
"रैना" कुछ नही तेरा सब सारा उसी का है.
हम जो सांस ले ..................................."रैना"


maine khud ko mita diya hai

मैंने खुद को मिटा दिया है,
समां पुराना जला दिया है.
गम की आग में जल के,
सोना खरा बना दिया है.
छोड़ मतलब की दुनिया,
उससे दिल लगा दिया है.
दिन निकला मैं सो रहा,
खुद को मैंने जगा दिया है.
"रैना" अब समझ में आई,
डूबने से उसने बचा दिया है."रैना"
 .

khfa ho kar

खफा हो कर मेरे घर से उजाले निकले,
हमदम मेरे दोस्त दिल के काले निकले.
जिन पे करते थे खुद से ज्यादा भरोसा,
वही तो आस्तीन में सांप पाले निकले.
मेरी आँखों ने खींची तेरी तस्वीर वैसी,
मगर तेरे अन्दाज कुछ निराले निकले.
"रैना" हम अपना सब कुछ लुटवा कर,
चुप तेरे कूंचे से खुद को संभाले निकले."रैना"

मंगलवार, 1 नवंबर 2011

mushikal hai

दिल रोता मगर फरियाद करना मुशिकल है,
हुनरे फरेब में दक्ष जमाना बड़ा ही तंगदिल है.
"रैना" दिल के हाथों मजबूर देखो मेरी बेबसी, 
मैं उसे सजा नही दे सकता जो मेरा कातिल है."रैना"


सोमवार, 31 अक्टूबर 2011


वो पछ्ताये हमें अजमाने के बाद,
बहुत याद किया मेरे जाने के बाद.
 देखके हमें उनका चेहरा खिल उठा,
फिर बेसबब रोये मुस्कराने के बाद.
कायम रहे वैसे ही यादों के निशान,
वो मिटे नही दिल से मिटाने के बाद.
दिल के इक कोने से उठता रहा धुंआ,
उल्फत का चिराग बुझ जाने के बाद. "रैना"

pachhtayege vo

पछ्तायेगे वो हमें अजमाने के बाद,
बहुत याद करेगे मेरे जाने के बाद.
 देखके हमें उनका चेहरा खिल उठा,
फिर बेसबब रोये मुस्कराने के बाद.
कायम रहे वैसे ही यादों के निशान,
वो मिटे नही दिल से मिटाने के बाद.
दिल के इक कोने से उठता रहा धुंआ,
उल्फत का चिराग बुझ जाने के बाद. "रैना"


tujhe kaise

 दिल से तुझे  कैसे जुदा करदे,
मचले अरमानों से दगा करदे..
 कैसे.... भला कैसे............
बेशक अब तू दूर गैर  पराया है,
मगर धडकनों में तू समाया है,
जान से पहले सांसें विदा करदे.. 
 कैसे.... भला कैसे............
तू डोर है मैं फक्त हु पतंग तेरी,
तेरे सहारे से उड़ान हसरत मेरी,
और किसी पे दिल फ़िदा करदे..
 कैसे.... भला कैसे............"रैना"

रविवार, 30 अक्टूबर 2011


ਕਦੇ ਇਹ ਨਾਂ ਸੋਚੀ ਮਜਬੂਰੀ ਦੁਖੜੇ ਹੀ ਦੁਖੜੇ ਦੇਂਦੀ ਹੈ,
ਇਸ ਮਜਬੂਰੀ ਵਿਚੋ ਹੀ ਨਵੀ ਸੋਚ ਵੀ ਜਨਮ ਲੈਂਦੀ ਹੈ,
ਜੋ ਮਜਬੂਰ ਹੋਇਆ ਓਹ ਮਸ਼ਹੂਰ ਹੋਇਆ ਇਹ ਤਾ ਪੱਕੀ ਗੱਲ  ਸੱਜਣਾ,
ਬੇਸ਼ਕ ਜੋ ਤੁਰਦਾ ਹੈ ਓਹ  ਪਹੁੰਚਦਾ ਹੈ,ਅਜ ਨਹੀ ਤਾ ਕੱਲ  ਸੱਜਣਾ.,"ਰੈਨਾ"

ae na soch

ਕਦੇ ਏ ਸੋਚ ਮਜਬੂਰੀ ਦੁਖੜੇ ਹੀ ਦੁਖੜੇ ਦੇ ਦੀ ਹੈ,
ਇਸ ਮਜਬੂਰੀ ਵਿਚੋ ਹੀ ਨਵੀ ਸੋਚ ਜਨਮ ਲੈਦੀ ਹੈ, 
ਜੋ ਮਜਬੂਰ ਹੋਯਾ ਓ ਮਸ਼ਹੂਰ ਹੋਯਾ,ਏ ਤਾ ਪੱਕੀ ਗਲ ਸਾਜਨਾ,
ਬੇਸ਼ਕ ਜੋ ਤੁਰਦਾ ਹੈ ਓ ਪਹੁੰਚਦਾ ਹੈ,ਅਜ ਨਹੀ ਤਾ ਕਲ ਸਾਜਨਾ,"ਰੈਨਾ"

aadhar

बहन भाई बंधू रिश्तों का विस्तार,
पैसा ही प्यार वफा का है आधार, 
मतलबी संसार, मतलबी संसार,
यही है बेहतर उससे जोड़ ले तार.
मतलबी संसार----------------
यहां तो सब का इक  नेक इराधा है,
किससे कितना होने वाला फायदा है,
जितना होगा फायदा उतना ही प्यार.
मतलबी संसार----------------
हर किसी का अब पैसा ही आराध्य है,
कायम सब में मोहमाया का सम्राज्य है,
जैसे लगे मौका वैसे ही कर देते है वार.
मतलबी संसार----------------
अब परेशान दुखी तो वफादार खुद्धार है,
झूठे फरेबी की वाह वाह जय जयकार है,
देखो चांदी कूट रहे अब धोखेबाज गद्दार.
मतलबी संसार----------------
"रैना"अमनो चैन से जीने का तू ढंग कर ले,
तू जीवन में इबाबत का खालिश रंग भर ले, 
 कटे लाख चौरासी तेरा हो जायेगा उद्धार.
  मतलबी संसार---------------- "रैना"
सुप्रभात जी -------------------good morning ji 


शनिवार, 29 अक्टूबर 2011

chahe

चाहे हरपल नाराज हमे उदास रखता,
काश कोई अपने दिल के पास रखता,
फक्त उसे देखने को तरसती मेरी आँखे,
वो भी मेरे लिए तो दिल में प्यास रखता."रैना"

khiladi

मैं वो बदनसीब खिलाड़ी,
 जो खेल शुरू होने से पहले ही हार जाता हूँ."रैना"
मेरे होंठों पे खड़ा इक सवाल रहा है,
मैं रहा सलामत न मेरा ख्याल रहा है.
दूर सुनसान कोने से आती इक सदा, 
आशिकों का तो ऐसा ही हाल रहा है."रैना"



शुक्रवार, 28 अक्टूबर 2011

ve

ਭੁਲ ਕੇ ਵੀ ਕਿਸੇ ਦਾ ਦਿਲ ਨ ਦੁਖਾ ਵੇ,
ਦੁਖੀ ਦਿਲ ਦੀ ਆਹ ਤੈਨੂ ਕਰ੍ਦੁ ਤਬਾ ਵੇ.
ਕਢੇ ਆਪਣੀ ਕੀਤੀ ਤੇ ਪਛਤਾਨਾ ਪੈਦਾ ਏ,
ਕਿਸੇ ਦੇ ਹੰਜੁਆ ਦਾ ਮੁਲ ਤੇ ਚੁਕਾਨਾ ਪੈਦਾ ਏ."ਰੈਣਾ"   

sanso ki dori

सांसों की डोरी जब टूट जाएगी,
मोह माया यही सब छूट जाएगी,
साथ तेरे जायेगा साचा इक नाम,
मन से भज लें  सुबह और शाम,
राम राम राम श्याम श्याम श्याम 
.
मुख में राम तेरे  बगल में छुरी है,
यही तो गलत तेरी नीयत बुरी है,
बुरे काम का होता बुरा ही अंजाम.
मन से भज लें  सुबह और शाम,
राम राम राम श्याम श्याम श्याम.

भाई बंधू भगनी और सुत नारी,
ये तो मतलबी है दुनिया ही सारी,
साथ तेरे जब तक हाथों में दाम.

मन से भज लें  सुबह और शाम,
राम राम राम श्याम श्याम श्याम . "रैना"
सुप्रभात जी --------------good morning

गुरुवार, 27 अक्टूबर 2011

milne se phle

मेरे मुकद्दर कुछ ऐसे निकले है,
मिलने से पहले ही हम बिछुड़े है.
बेशक खुद को तो संभाला हमने,
वैसे कई बार टूट कर के बिखरे है.
 यूँ आतिशे गम ने जलाया हमको,
हम तो खरा सोना बन के निखरे है.
"रैना" फ़क्त कायम असूल अपने ,
बेशक लोग हर कदम पे फिसले है. "रैना"

aa ja pi le

दोस्तों की खास फरमाइश पर पेश है,
शेर 
जो नही पी तो गुमनाम है तू,
जो कम पी तो भी बदनाम है तू,
खूब पी मयखाने में पी हाते में पी,
आखिर चार दिनों का मेहमान है तू.
बुतखाने में सकूं मिलता है, मयखाने में मस्ती है,
सकूं मिलना मुश्किल यारा, मस्ती बड़ी ही सस्ती है.
आजा पी ले आजा पी ले पी ले------------
लाल परी को छूने से ही, मन की कली खिल जाती,
घूंट हलक से नीचे उतरे, गम से फुरसत मिल जाती.
आजा पी ले आजा पी ले पी ले------------ "रैना"

kisi ko

किसी को खबर क्या परवाना कितना तरसा है,
मसल्सल  इन आँखों से बादल कितना बरसा है."रैना"

बुधवार, 26 अक्टूबर 2011

magar maii

 मुझे अपने घर वो बुलाता रहा,
 मगर मैं ही बहाने बनाता रहा.
मुझे अपने घर वो----------- 
मुझ मुर्ख को समझाने के लिए,
नेक राह मुझे दिखाने के लिए,
उठाता कभी वो गिराता रहा,
मैं न समझा वो समझाता रहा.
मुझे अपने घर वो------------ 
उसने एहसान क्या कम है किया,
सब करने को समर्थ तन है दिया,
मैं तो मन को ऊँचा उडाता रहा,
बस ख्वाबों के महल बनाता रहा
मुझे अपने घर वो--------------" रैना"

uncha udne ki chah

ऊँचा उड़ने की मन में चाह अगर, पर औरों के तू काटना छोड़ दे,
तू मिट्टी है सोने का तुझको भ्रम, ये झूठा भ्रम अभी इसे तोड़ दे.
 ये झूठा भ्रम अभी इसे तोड़ दे._--------------------
देख आईने को मंद मंद मुस्काए है,तू मुसव्विर को अपने भूल गया,
इस अहम ने हर ली तेरी मती , बैठ मोहमाया के झूले में झूल गया,
मन मृग मरुस्थल में भटक रहा,अब भी वक्त है इस मन को तू मोड़ दे. 
ये झूठा भ्रम अभी इसे तोड़ दे------------------------       "रैना"
सुप्रभात जी ------------------------------------- good morning


sine me dard

सीने में इक दर्द लिए हम तो मर ही जायेगे,
यहाँ कोई सुनता नही उसको हाल सुनायेगे.
मुमकिन है मौत किसी की गम का सबब,
मेरे मरने पर वो इक आंसू भी न बहायेगे.
हमें तू गम देता रहा हमने मुहु नही खोला.
उसके पास हम तेरी शिकायत तो लगायेगे.
इश्क में रुतबा हासिल हो उम्मीद कम होती,
सोचे ताजमहल की वो तुर्बत भी न बनायेगे.
"रैना" का तुजर्बा है वो गुजर चूका उस दौर से,
बुत्तों से कुछ न हासिल उससे दिल लगायेगे.  "रैना"


मंगलवार, 25 अक्टूबर 2011

mubarkh diwali

उजालों में तबदील हो रात काली,
मुबारख दीवाली,मुबारख दीवाली.
मुबारख दीवाली.---------------
सारे जहान से अंधकार मिटाये,
अपने मन के घर में दीप जलाये..
चमन जब महके तो खुश हो माली.
मुबारख दीवाली.---------------
साथ ले सब को किसी को न छोड़े,
जो टूटे गये है अब वो धागे भी जोड़े,
अब की दीवाली तो हो कुछ निराली.
मुबारख दीवाली.---------------
"रैना" ने मालिक से अर्ज गुजारी,
सुख चैन से बसे ये दुनिया सारी,
ख़ुशी का पैगाम ले आये दीपाली.
मुबारख दीवाली.---------------"रैना"

ab to

अब तो हर किसी का चेहरा जर्द लगे है,
होंठ तो हंसते मगर दिल में दर्द लगे है.
खत्म नही होता यादों का सिलसिला,
फिर से आ गया हसीं मौसम सर्द लगे है.
बीच बाजार लुटी इक अबला की इज्जत,
इस बस्ती में अब बचा न कोई मर्द लगे है.
आहिंसा का पाठ पढ़ाने शिक्षा देने वाला,
अब वो भी हांथों में लिए घूमता कर्द लगे है.
महफ़िल में करता है दिले फिराग की बातें,
मगर "रैना" भी बड़ा तंगदिल बेदर्द लगे है. "रैना"

सोमवार, 24 अक्टूबर 2011

tujhe dil se juda

तुझे दिल से जुदा कैसे करदे,
भला हम ये खता कैसे करदे
इक तुझ पे फ़िदा है दिल मेरा,
किसी और पे फ़िदा कैसे करदे.
बड़ी मुशिकल से बसा घर मेरा,
हम बसी दुनिया फना कैसे करदे
"रैना"वो खफा है तो उसे रहने दो,
 इक इन्सान को खुदा कैसे करदे."रैना"

jame jindgi

जामे जिन्दगी जहर है पीना,
अपना जीना भी क्या जीना.
मिलेगा साहिल आस नही है,
मझदार में डोल रहा सफीना.
इन्सान ने सब सीख लिया है,
पर जीने का न आया करीना.
"रैना" खोल दिखा नही सकता,
फ़क्त जख्मों से छलनी है सीना."रैना"

iman dolne lga hai

हार किसी का इमान अब डोलने लगा है,
आइना भी अब तो झूठ बोलने लगा है.
बड़ो की इज्जत हमारी संस्कृति शान,
मगर बाप के सामने बेटा बोलने लगा है.
अब कुछ भी छुपाना मुमकिन नही है,
कम्प्यूटर सारे ही भेद खोलने लगा है.
"रैना" हुआ करता था बहुत इमानदार,
वक्त का तकाजा वो कम तोलने लगा है. "रैना"

रविवार, 23 अक्टूबर 2011

jla jarur

मैं भटका राहे मंजिल से चला जरूर था,
चिराग तूफां ने बुझा दिया जला जरूर था.
गुमां का खुमार चढ़ा कुछ होश ही न रही,
मैं भूल गया जो सूरज चढ़ा ढला जरूर था."रैना" 

jine ki tamnna

जीने की तमन्ना फिर भी मरना पड़ता है,
हालात से समझौता आखिर करना पड़ता है.
कोई भी मुकम्मल पूरा नही इस जहान में,
 किसी के क़दमों में तो सिर धरना पड़ता है.
बेशक बन जाते है कभी तो ऐसे भी हालात,
जो नही करना चाहते वो भी करना पड़ता है.
"रैना" सकून से जीना अब तो आसान नही है,
दिन में कई कई बार खुद से लड़ना पड़ता है."रैना" 

शनिवार, 22 अक्टूबर 2011

man ke mandir

जा के मन्दिर में घंटी बजाता है तू,
मन के मंदिर की घंटी बजाता नही,
सोये रब को जगाने की है सोचता,
क्यों खुद को तू पहले जगाता नही.
जा के मंदिर में औ जा के मंदिर में----
मुख चमके अति मिठ्ठी बाणी तेरी,
पर मन में तो तेरे है  कालस भरी,
तन रगड़े नहाये है तू प्रतिदिन,
पर मन की मैल को छुड़ाता नही.
जा के मंदिर में घटी बजाता है तू,
मन के मंदिर ------------------ "रैना"
सुप्रभात जी ------------good morning

शुक्रवार, 21 अक्टूबर 2011

gaum ya khshi se

गम मिले या ख़ुशी हमें कोई  एतराज नही है,
किसी को घर से लोटाना अपना रिवाज नही है.
किसी की कमियां निकालना, तारीफ अपनी,
खुदा का शुक्र है ये भी तो अपना अंदाज नही है.
इक और भी  है अपनी ये खासियत मेरे यारों,
अपने  मासूम दिल पे किसी का राज नही है.
सच्ची बात कहने से मैं कभी भी नही चूकता,
इस मामले में अपने यहां कोई लिहाज नही है.
प्यार की गंगा बहा "रैना" करता दिलों पे राज,
बेशक उस अदना के सिर पे कोई ताज नही है."रैना"