सोमवार, 19 दिसंबर 2011

diware bahut hili magar

दीवारे नही अब तो हमें नींव हिलानी है,
हर दिल में देश प्रेम की अलख जगानी है.
वोट हथियाने को नेता जो करते है खड़ी,
हर हाल वो नफरत की दीवार गिरानी है.
बच्चे सुनने को बेताब शहीदों की कहानी,
फिर गहरी नींद में क्यों सोई हुई नानी है.
नारी को अब अबला कहने की भूल न करे,
भारत देश की हर नारी झाँसी की रानी है.
माँ से धोखा करने वाले कुछ गद्दार भी है,
बेशक उनके मंसूबों पे अब फेरना पानी है.
"रैना"तेरी नसीहतों का कुछ असर होगा,
वैसे आजकल ये दुनिया बहुत सयानी है."रैना"

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