शुक्रवार, 9 दिसंबर 2011

koi bhi rasta khi

ख़त्म हो कोई रास्ता ये नामुमकिन नही मुश्किल है,
मुश्किल हो सकती आसान मगर जमाना संगदिल है."रैना"

मौसम की तरह बदलते इन्सान अब अपनी सुरत भी भूल जाते है."रैना"

खिजा के मौसम में भवरें चमन में गुनगुनाते नही."रैना"

जब हकीकत से मेरा हुआ सामना तब मुझे खबर हुई तुम बेवफा हो."रैना"

इन्सान ताउम्र सीखता मगर फिर भी,
 सीखने को बहुत कुछ बाकी रह जाता है,
और इन्सान अलविदा कह जाता है."रैना"   

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