पाउडर क्रीम लगा के ही मुहु चमकाते है,
वैसे भी लोग सर्दी में सूखे पानी से नहाते है."रैना"
पहले लड़के दूध घी खाते थे,
कसरत करते हट्टे कट्टे पहलवान नजर आते थे,
मगर अब बेल पूरी, गोल गप्पे खाते है,
नशा अपनाते है,
इलू इलू गाते है,
तभी कांगड़ी पहलवान नजर आते है."रैना"
कैसे कह दू ये दिल उदास है,
मेरा दिल तो आप के पास है.
कोई अपना न इस शहर में,
इक तू लख्ते जिगर खास है.
जिसने थामा दामन उसका,
फेल नही वो पास ही पास है,
तेरे दीद की तलब है हरदम,
"रैना"का दिल रहता उदास है.
वैसे भी लोग सर्दी में सूखे पानी से नहाते है."रैना"
पहले लड़के दूध घी खाते थे,
कसरत करते हट्टे कट्टे पहलवान नजर आते थे,
मगर अब बेल पूरी, गोल गप्पे खाते है,
नशा अपनाते है,
इलू इलू गाते है,
तभी कांगड़ी पहलवान नजर आते है."रैना"
कैसे कह दू ये दिल उदास है,
मेरा दिल तो आप के पास है.
कोई अपना न इस शहर में,
इक तू लख्ते जिगर खास है.
जिसने थामा दामन उसका,
फेल नही वो पास ही पास है,
तेरे दीद की तलब है हरदम,
"रैना"का दिल रहता उदास है.
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें