रविवार, 4 दिसंबर 2011

जीने की बात कह कर मेरे दिल में न आग लगाओ यारों,
बेहतर होगा मुझे तो कोई मरने का रास्ता बताओ यारों. "रैना"

तन्हा न रोता मजे से गुजारा कर लेता,
काश तू  दिल से भी किनारा कर लेता.
इक उम्मीद ने है मुझको  जिन्दा रखा,
वरना कब से मौत का नजारा कर लेता.
इश्क में हासिल होती अक्सर रुसवाई,
ऐसा न होता तो प्यार दोबारा कर लेता."रैना"

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें