जबसे जिन्दगी से प्यार हुआ है,
हर लम्हा गुले गुलजार हुआ है.
अब खिंजा का कोई फिकर नही,
यूँ चमने जिन्दगी बहार हुआ है.
फकत अभी तो हुआ है एहसास,
महबूबे हसीं का न दीदार हुआ है.
पैगाम आयेगा तो जाना पड़ेगा,
कोई भी जाने को न तैयार हुआ है.
रैना"उसका डूबना तो तय होता,
दो कश्तियों पे जो सवार हुआ है."रैना"
हर लम्हा गुले गुलजार हुआ है.
अब खिंजा का कोई फिकर नही,
यूँ चमने जिन्दगी बहार हुआ है.
फकत अभी तो हुआ है एहसास,
महबूबे हसीं का न दीदार हुआ है.
पैगाम आयेगा तो जाना पड़ेगा,
कोई भी जाने को न तैयार हुआ है.
रैना"उसका डूबना तो तय होता,
दो कश्तियों पे जो सवार हुआ है."रैना"
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