बदले वक्त का असर अब दिखने लगा है,
इन्सान कोडियों के भाव बिकने लगा है.
फैशन के दौर में सब कुछ ही जायज है,
मर्द भी अब औरत सा ही दिखने लगा है
अपने दिल की भड़ास निकलने के लिए,
आजकल हर कोई ही शेर लिखने लगा है.
कल तलक कायम रखी अपनी हकुमत,
मगर अब शौहर बीवी से ही पिटने लगा है.
रैना वहां की भी कुछ तो कर ले फिकर,
देखो धीरे धीरे अब सूरज छिपने लगा है."रैना"
इन्सान कोडियों के भाव बिकने लगा है.
फैशन के दौर में सब कुछ ही जायज है,
मर्द भी अब औरत सा ही दिखने लगा है
अपने दिल की भड़ास निकलने के लिए,
आजकल हर कोई ही शेर लिखने लगा है.
कल तलक कायम रखी अपनी हकुमत,
मगर अब शौहर बीवी से ही पिटने लगा है.
रैना वहां की भी कुछ तो कर ले फिकर,
देखो धीरे धीरे अब सूरज छिपने लगा है."रैना"
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