गुरुवार, 1 दिसंबर 2011


खिलते है फूल जैसे मौसम ए बहार में.
दिल की कली खिलती वैसे ही प्यार में.
तेरे दिल में क्या है तू ही जाने हमनवा,
हमने तो खुदा है देखा यार दिलदार में.
पूछ न हाले दिल हम पे बुरी है गुजरी,
मारे गये गुलफाम देखो जी एतबार में.
बातें हुई मगर कोई सिरा तो न मिला,
उलझे रहे तमाम रात यूँ ही तकरार में.
"रैना"ख़ुशी किसी की न गम का सवाल,
गुजर जाये जिन्दगी यूँ  ही जीत हार में."रैना"

हुस्न वाले वफा नही करते,
    दर्द देते दवा नही करते."रैना"
हमे कब फुरसत है ऐ दोस्त हम तो हरपल सफ़र में रहते है."रैना"
उन्होंने इस कदर रुखसत किया अपने शहर से,
हम ढूंढ़ते रहे अपने पैरों के निशान."रैना"
मुझे रास्ता बताने वाला कोई न मिला मैं पत्थरों से पूछता रहा उनके घर का पता."रैना"
ये ख्वाबो के महल बनाना छोड़ दे,
बातों की रेत से बस्ती बसाना छोड़ दे,
यदि गद्दारों का ही देना है साथ,
फिर ये गडयाली आंसू बहाना छोड़ दे."रैना"

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