शनिवार, 3 दिसंबर 2011

wah kya jmana

वाह क्या जमाना आ गया है,
चिराग अँधेरे से उजाला मांग रहा है,
साहूकार चोर से ही ताला मांग रहा है.
इक्कसवी सदी का असर है कुछ ऐसा,
मर्द औरत से कान का बाला मांग रहा है.
दिन में तो दिख्नाने को करते  पाठ पूजा,
रात होते भक्त कवाब, प्याला मांग रहा है.
नैतिकता का इस कदर होने लगा पतन,
पेट भरा अब भूखे से निवाला मांग रहा है.
अपने घर "रैना" तो मनाता रोज दीवाली,
मगर पडौसियों के लिए दीवाला मांग रहा है. "रैना"

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