पैसे की दीवानी एकदम दुनिया सारी,
आशिक देखो अब तो बने है व्यापारी,
मर्यादा में पुरुष न जब तोड़े हदें सारी,
फिर भला क्यों पीछे रह जाये गी नारी.
कल युग का असर सच हारे झूठ जीते,
बेईमानी के आगे फीकी पड़ी ईमानदारी.
अब बेटे की परेशानी हो गई बूढ़े माँ बाप,
अपने साथ नही रखती पत्नी प्राण प्यारी.
महंगाई हिरनी जैसे अब लगती छलांगे,
जनता सिर पीटे निकम्मी सरकार हमारी.
बिन पैसे अब तो नौकरी नही है मिलती,
"रैना" भूखा मरेगा बच्चे कर अब दिहाड़ी."रैना"
आशिक देखो अब तो बने है व्यापारी,
मर्यादा में पुरुष न जब तोड़े हदें सारी,
फिर भला क्यों पीछे रह जाये गी नारी.
कल युग का असर सच हारे झूठ जीते,
बेईमानी के आगे फीकी पड़ी ईमानदारी.
अब बेटे की परेशानी हो गई बूढ़े माँ बाप,
अपने साथ नही रखती पत्नी प्राण प्यारी.
महंगाई हिरनी जैसे अब लगती छलांगे,
जनता सिर पीटे निकम्मी सरकार हमारी.
बिन पैसे अब तो नौकरी नही है मिलती,
"रैना" भूखा मरेगा बच्चे कर अब दिहाड़ी."रैना"
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें