पूछते है जिससे भी तेरे घर का रास्ता,
वो हमें देने लगता अपने घर का वास्ता.
जो भी पीते शराब को पानी की तरह,
वो तो जिन्दगी से न मोहब्बत करते,
रिंद मस्ती में सब कुछ ही भुलाये बैठे,
बेफिक्र देखो मौत की है दावत करते.
न उसके घर का पता न मंजिल का,
डोले मझदार में पता नही साहिल का,
अब बनाये हमने वक्ता अपने मुरसद,
पीर वो पैसे के कहने को इबादत करते."रैना"
वो हमें देने लगता अपने घर का वास्ता.
जो भी पीते शराब को पानी की तरह,
वो तो जिन्दगी से न मोहब्बत करते,
रिंद मस्ती में सब कुछ ही भुलाये बैठे,
बेफिक्र देखो मौत की है दावत करते.
न उसके घर का पता न मंजिल का,
डोले मझदार में पता नही साहिल का,
अब बनाये हमने वक्ता अपने मुरसद,
पीर वो पैसे के कहने को इबादत करते."रैना"
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