तुम तुम हो कुछ भी कह सकते,
हम तो हम है चुप ही रह सकते.
गम सहने के आदी हो गये हम,
बांध बांधा आंसू नही बह सकते.
जुदाई का गम मौत से बढ़ के है,
मगर हम ये गम भी सह सकते.
अब तो लोग रेत के घरों में रहते,
ये घर तो कभी भी है ढह सकते.
तू चाहे जितने मर्जी गम दे यारा,
"रैना"तुझे कुछ नही कह सकते."रैना"
हम तो हम है चुप ही रह सकते.
गम सहने के आदी हो गये हम,
बांध बांधा आंसू नही बह सकते.
जुदाई का गम मौत से बढ़ के है,
मगर हम ये गम भी सह सकते.
अब तो लोग रेत के घरों में रहते,
ये घर तो कभी भी है ढह सकते.
तू चाहे जितने मर्जी गम दे यारा,
"रैना"तुझे कुछ नही कह सकते."रैना"
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