सोमवार, 5 दिसंबर 2011

शहरे दिल इस कदर बरबाद हुआ,


ऐसा उजड़ा है फिर न आबाद हुआ.


हर दर्द की दवा तबीबो कर लेता,


इलाज दर्द ए इश्क न इजाद हुआ.


उसको रहे न दिन दुनिया की खबर,


सबक इश्क का जिसको याद हुआ.


"अनन्या" इंसान तब नही समझता,


एहसासे गलती कुछ दिन बाद हुआ.
                                             "अनन्या"




                                                               




कि गया कुछ भी नहीं , रहा कुछ भी नहीं 

अच्छा ही हुआ जो उसने नजरे फेर लीं ,

पर अफसोस तो यह है कि इतनी देर की l 

"वो"बेवफाई करके भी खुश न हुए ,

हम वफा करके बहुत अच्छे निकले ल


तू बेवफा तेरी याद बावफा निकली,


मेरे दिल से तेरे लिए दुआ  निकली.







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