गुरुवार, 8 दिसंबर 2011

jai maa bharti

जय माँ भारती,
ढूंढ़ रही सारथी,
कश्ती डोल रही,
हवा दम तोल रही,
घनघोर अँधेरा है,
गद्दारों ने घेरा है,
ख़ामोशी उदासी है,
हर आँख प्यासी है,
दीन न ही  धर्म है,
बदल गया कर्म है,
बचा न इमान है,
हो गया बेईमान है.
ऐसे न ही वैसे की,
भूख है बस पैसे की,
बेईमान नेता है,
कुछ नही  देता है,
सब लेता ही लेता है,
बाप जैसा बेटा है.
अर्ज करे माँ भारती,
जवानों बनो सारथी,
यही पूजा आरती,
बनो न जी स्वार्थी.
कश्ती बाहर निकलो,
देश को अब सम्भलो.
"रैना"देश को संभलो. "रैना"
सुप्रभात जी ...........good morning 

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