भटक रहा काहे धक्के खाये सुन ले अर्ज तू मेरी,
पल पल निरंतर पिसता जाये काहे करत है देरी.
यहां तो दिन समस्त उजियारा जो चाहे तू पा ले,
वहां तू कुछ भी कर नही पाये काली रात अँधेरी.
काये तू अभिमान करे है तेरा नही कुछ भी कोई,
ठोकर लगी गिर जायेगी जीवन मिट्टी की ढेरी.
घड़ी पल दिन में दिन महीने साल गुजरते जाये,
कर ले जतन "रैना" ख़त्म हो आन जान की फेरी. "रैना"
सुप्रभात जी ...................good morning ji
पल पल निरंतर पिसता जाये काहे करत है देरी.
यहां तो दिन समस्त उजियारा जो चाहे तू पा ले,
वहां तू कुछ भी कर नही पाये काली रात अँधेरी.
काये तू अभिमान करे है तेरा नही कुछ भी कोई,
ठोकर लगी गिर जायेगी जीवन मिट्टी की ढेरी.
घड़ी पल दिन में दिन महीने साल गुजरते जाये,
कर ले जतन "रैना" ख़त्म हो आन जान की फेरी. "रैना"
सुप्रभात जी ...................good morning ji
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