ये मत पूछो दुखी हम कितने,
मुझको मिले बेदर्द गम कितने.
दिल जख्मों से छलनी हो गया,
कैसे दिखाऊ नैना नम कितने."रैना"
चिराग नही मैं फिर भी जल रहा हूँ,
निकला न सूरज फिर भी ढल रहा हूँ,
इश्क में हासिल हुई है बेरुखी रुसवाई,
पछताऊ बैठा बेबस हाथ मल रहा हूँ."रैना"
मुझको मिले बेदर्द गम कितने.
दिल जख्मों से छलनी हो गया,
कैसे दिखाऊ नैना नम कितने."रैना"
चिराग नही मैं फिर भी जल रहा हूँ,
निकला न सूरज फिर भी ढल रहा हूँ,
इश्क में हासिल हुई है बेरुखी रुसवाई,
पछताऊ बैठा बेबस हाथ मल रहा हूँ."रैना"
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