गुरुवार, 8 दिसंबर 2011

मेरे द्वारा 5 मई 1980 को रात्रि लगभग 11 बजे लिखी गई अपनी पहली रचना.
बिछुड़ा करवा से मत घबराना,
ठहर न मुसाफिर तुझे दूर जाना.
ठहर न मुसाफिर .....................
गम तो है ख़ुशी का एक सहारा,
बिन गम ख़ुशी का नही नजारा,
ख़ुशी से गम को गले से लगाना.
ठहर न मुसाफिर .....................
"रैना" इक दिन तो बहार आएगी,
बिगड़ी हुई तक़दीर सवंर जाएगी,
मिले मंजिल कदम पीछे न हटाना.
ठहर न मुसाफिर ....................."रैना"

  

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