sufi tadka
गुरुवार, 27 अक्टूबर 2011
milne se phle
मेरे मुकद्दर कुछ ऐसे निकले है,
मिलने से पहले ही हम बिछुड़े है.
बेशक खुद को तो संभाला हमने,
वैसे कई बार टूट कर के बिखरे है.
यूँ आतिशे गम ने जलाया हमको,
हम तो खरा सोना बन के निखरे है.
"रैना" फ़क्त कायम असूल अपने ,
बेशक लोग हर कदम पे फिसले है. "रैना"
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें