बुधवार, 26 अक्टूबर 2011

uncha udne ki chah

ऊँचा उड़ने की मन में चाह अगर, पर औरों के तू काटना छोड़ दे,
तू मिट्टी है सोने का तुझको भ्रम, ये झूठा भ्रम अभी इसे तोड़ दे.
 ये झूठा भ्रम अभी इसे तोड़ दे._--------------------
देख आईने को मंद मंद मुस्काए है,तू मुसव्विर को अपने भूल गया,
इस अहम ने हर ली तेरी मती , बैठ मोहमाया के झूले में झूल गया,
मन मृग मरुस्थल में भटक रहा,अब भी वक्त है इस मन को तू मोड़ दे. 
ये झूठा भ्रम अभी इसे तोड़ दे------------------------       "रैना"
सुप्रभात जी ------------------------------------- good morning


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