आज की हालत पर खास पेशकश
गरीब,मजलूम, मजबूर पे, खूब भड़ास निकालते,
मगर प्यार करने के लिए, कुत्ते का बच्चा पालते.
मेरे शहर के कुछ लोग,मेरे शहर के कुछ लोग-----
सिर्फ वक्ता ढोंगी बाबा पे तो सब कर दिया निसार,
मगर दर पे आये भिखारी को भीख भी नही डालते.
मेरे शहर के कुछ लोग,मेरे शहर के कुछ लोग-----
इस दुनिया पैसे की मंडी में हर शै बिकाऊ हो गई,
मतलब की खातिरदारी,माँ बाप को भी न सँभालते
मेरे शहर के कुछ लोग,मेरे शहर के कुछ लोग-----
सच लोकतंत्र की ताकत वोट ही कारगर हथियार है,
मगर शराब पी पैसे ले बिना सोचे समझे वोट डालते.
मेरे शहर के कुछ लोग,मेरे शहर के कुछ लोग-----
पढ़ने लिखने के नाम पर संस्कृति पे वर कर दिया,
अब तो बिच बाजार में देश की पगड़ी है उछालते.
मेरे शहर के कुछ लोग,मेरे शहर के कुछ लोग-----
"रैना" जैसे इस शहर में गद्दार भी तो बहुत हो गये,
कुछ मसरूफ दिल पे लगे इश्क के कांटे निकालते.
मेरे शहर के कुछ लोग,मेरे शहर के कुछ लोग-----"रैना"
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