sufi tadka
बुधवार, 19 अक्टूबर 2011
jab se tere ghar
जब से तेरे घर में आने लगे है,
ये लोग तो बातें बनाने लगे है.
नादाँ समझे न मर्जे इश्क को,
आशिक को बुत सताने लगे है.
नसीब न हर किसी को इबादत,
मनाने में उसको जमाने लगे है.
रैना" को उससे जुदा करने वाले,
देखो तो वो अब पछताने लगे है."रैना"
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