sufi tadka
गुरुवार, 6 अक्टूबर 2011
चढ़ाते सूरज को सलाम डूबते को अलविदा कहते लोग,
कोन है कितने पानी में,अब तो यही नापते रहते लोग
दुःख देने में काफी माहिर,कभी सुख की बात नही करते,
कहर चोर उच्चकों का अब तो चुपचाप ही है सहते लोग."रैना"
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