जामे जिन्दगी जहर है पीना,
अपना जीना भी क्या जीना.
मिलेगा साहिल आस नही है,
मझदार में डोल रहा सफीना.
इन्सान ने सब सीख लिया है,
पर जीने का न आया करीना.
"रैना" खोल दिखा नही सकता,
फ़क्त जख्मों से छलनी है सीना."रैना"
अपना जीना भी क्या जीना.
मिलेगा साहिल आस नही है,
मझदार में डोल रहा सफीना.
इन्सान ने सब सीख लिया है,
पर जीने का न आया करीना.
"रैना" खोल दिखा नही सकता,
फ़क्त जख्मों से छलनी है सीना."रैना"
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