रविवार, 2 अक्टूबर 2011

chand lamhe

चंद लम्हे ये जिन्दगी यूं ही न बरबाद करना,
कोशिश कर ख्वाबों का शहर आबाद करना.
यहां कोई नही तेरी सुनने वाला मेरे दोस्त,
बुतों के सामने रो रो के न फरियाद करना.
किसी अच्छे काम पे दिल कों लगाये रखना,
इश्क के चक्कर में जीवन न बेस्वाद करना.
जिसने तुझे बख्सी है ये हसीन जिन्दगी,
फुरसत निकाल चार घड़ी उसे याद करना.
"रैना" तो सिर्फ तेरी ही तलब में गुजारेगा,
मत भूलना याद चाहे चार दिन बाद करना. "रैना"

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