गुरुवार, 13 अक्टूबर 2011

bachpanki yade


जीवन की सीढ़ी चढ़ते  जा रहे है,
गुजरे कुछ पल तो धुंधला रहे है,
भूलते जा रहे है वो कसमें वादें,
मगर तरोताजा बचपन की यादें,
बचपन की यादे,यादें बचपन की,
धरोहर मन की ,धरोहर मन की.
यादें बचपन ------------
गीली डंडा खेलना ,कंचें फोड़ना,
बाग में धुस के,आम चोरी तोडना,
स्कूल से भाग जाना, तालाब में नहाना,
माँ को गुस्सा आये.पकड कान से लाये ,
खूब डंटे फटकारे,ममता की मार मारे,
जब गुस्सा ढल जाये,पास अपने बैठाये,
कूट चूरी खिलाये,गंगा प्यार की बहाये
यादें बचपन ------------
जीवन के सुनहरी वो पल नही भूले,
लुक्का छिपी का खेल सावन के झूले,
बरसी सावन की फुहार, सिर पे भूत सवार, 
सुझाव सब बेकार, दिये कपड़े उतार,
फिर जम के नहाना,चक्कर गलियों के लगाना,
माँ ने बहुत घबराना,बुखार होगा समझना,
जब  जोर से मैं छींका,माँ कहे लगे टीका
माँ के गले लग जाना,माँ न टीका लगवाना.
यादें बचपन ------------
बचपन की याद अब जब आये,
मुरझाया  मेरा चेहरा खिल जाये,
तब थी जीवन की मस्त अदाये,
अब तो जिन्दगी बोझ बनी जाये,
चलचित्र जैसे घूमता गुजरा जमाना,
तब मैं था अपना अब हूँ बेगाना,
बेशक बड़ा मैं हो गया सयाना,
मगर बन गया गम का अफसाना,
सोचता हु पैरों पे खड़ा न होता,
काश बच्चा ही रहता बड़ा न होता.
यादें बचपन ------------"रैना"








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