सुबह शाम दिन का नजारा उसी का है,
हम जो सांस ले रहे इशारा उसी का है.
हम जो सांस ले ...............................
हम जो देख रहे है झूठा वो सपना है,
और तो क्या जिस्म भी न अपना है,
अर्श चाँद सूरज हर सितारा उसी का है.
हम जो सांस ले .............................
मंदिर मस्जिद गुरूद्वारे चर्च में न बैठा है,
सचे नेक इन्सान के वो दिल में रहता है,
जो इंसान का प्यारा वो प्यारा उसी का है.
हम जो सांस ले ..................................
देख महल बंगले को तू फूला न समाये रे,
आईने को देख करके बहुत ही इतराये रे,
"रैना" कुछ नही तेरा सब सारा उसी का है.
हम जो सांस ले ..................................."रैना"
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें