शुक्रवार, 11 नवंबर 2011

dil ke ghar me aag

बदनसीबी मेरी दिल के घर में आग लगी है,
सब कुछ जल गया मगर तेरी याद न जली है
बेवफा याद तेरी तुझसे तो कही भली निकली,
सुख दुःख में बनके परछाई मेरे साथ चली है.
दुःख नही कोई मगर यही मेरे गम का सबब,
खिलने से पहले ही मुरझा गई दिल की कली है.
"रैना"दिन तो कट जाता काम में मसरूफ रहके,
याद रह जाये फक्त मयखाना जब शाम ढली है. "रैना"

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