बेशक
खास व्यक्ति आग्निवेश,
इनके कर्म अलग विशेष,
ये जहाँ भी करते प्रवेश,
वहां शुरू हो जाता कलेश,
भगवा वस्त्र पहनते हमेश,
मगर मन में रखते है द्वेष.
इनका एक ही मकसद शेष,
बस कुर्सी के लिए लगते रेश.
इनकी नीयत बुरी,
इसलिए बुरी घटना घट जाती,
कुर्सी इनके हाथ से निकल जाती."रैना"
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें