मस्तियाँ करती बेशुमार कुए पर,
भर रही है पानी जवां नार कुए पर.
हुस्न के जलवे है यूँ सुगंध महकती,
देखो आके ठहर गई है बहार कुए पर.
उठ जाती है कभी नजरें झुकी झुकी,
राम जाने किसका इंतजार कुए पर.
जब से उनके घरों में नलके लग गये,
आशिक खड़े मायूस लाचार कुए पर.
पानी भरने की मस्त अदा तो देख लूँ,
"रैना" कहे आ जा तू इक बार कुए पर. "रैना"
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