चाहत तो इबादत है किसी को मजबूर क्या करना,
जो सांसों में बस जाये उसको दिल दूर क्या करना,
छोड़ करके दुनिया को जब मीरा श्याम की हो जाये,
फिर तो मुकाम हासिल है बेवजह गरूर क्या करना. "रैना"
जो सांसों में बस जाये उसको दिल दूर क्या करना,
छोड़ करके दुनिया को जब मीरा श्याम की हो जाये,
फिर तो मुकाम हासिल है बेवजह गरूर क्या करना. "रैना"
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें