माँ की प्यारी याद गांव खींच लाती है,
चंद लम्हें जिंदगी हसीन हो जाती है.
शहर की दूषित हवा ने बूढ़ा किया है,
गांव में जवानी तो फिर लौट आती है.
खेल के गुजरा है जहां प्यारा बचपन
वो कच्ची गलियां मुझे बहुत भाती है.
तब महसूस होता जन्नत का नजारा,
चूमे माँ मुख भींच के गले से लगती है.
"रैना" का गांव है जन्नत से भी बढ़ कर,
माँ बाप के कदमों में जिंदगी महकाती है.
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