वैसे तोड़ने के लिए छलांगे लगा रहा हूँ,
मगर अंगूर खट्टे है मैं नही खा रहा हूँ.
मेहनत करना तो मेरी समझ से परे है,
मैं निरंतर ख्वाबों के महल बना रहा हूँ.
छपर फाड़ के गिरेगा मेरे घर में सोना,
मैं इसी आस के दम से जीये जा रहा हूँ.
समझ आई"रैना"ये मेरे मन का फितूर है,
मैं जीवन के हसीं पल बेवजह गवा रहा हूँ.
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