खफा हो कर मेरे घर से उजाले निकले,
हमदम मेरे दोस्त दिल के काले निकले.
जिन पे करते थे खुद से ज्यादा भरोसा,
वही तो आस्तीन में सांप पाले निकले.
मेरी आँखों ने खींची तेरी तस्वीर वैसी,
मगर तेरे अन्दाज कुछ निराले निकले.
"रैना" हम अपना सब कुछ लुटवा कर,
चुप तेरे कूंचे से खुद को संभाले निकले."रैना"
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