हम वो चिराग जो तूफान में जलते है,
अक्सर हवा के उलटे रुख ही चलते है.
हम सूरज चमकना हमारी फितरत,
मगर हम निकलते मर्जी से ढलते है.
महफ़िल का मिजाज है हमारे दम से,
बेशक पी के बहकते गिरते संभलते है.
भूल कर भी हमें बेदर्द न कहना यारों,
अरमां के बच्चे"रैना"के दिल में पलते है.
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