sufi tadka
रविवार, 6 नवंबर 2011
dusre ka ghar
दुसरे का घर जल के तबाह हो जाये,
फिर भी अफ़सोस नही होता,
मगर जब अपने घर आग लगती है तो,
इन्सान सुबक सुबक रोता.................. "रैना"
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