सोमवार, 17 दिसंबर 2012

wah mere desh ke

वाह मेरे देश के नेता?????????
जनता का मजाक उड़ा रहे,
अब सात रूपये में एक कप चाये मिलती है,
और नेता 
6 रूपये में तीन टाइम का खाना खिला रहे है।"रैना"

रविवार, 16 दिसंबर 2012

mane tujh ko


दर्द दे कर पूछते हो हाल मेरा,....."रैना"

शनिवार, 15 दिसंबर 2012

kya kre jindgi


चलना जमीं पे सीख ले,
उड़ना हवा में छोड़ दे,
मत पाल रे तू ये भ्रम,
झूठा भ्रम है तोड़ दे।
जाने नही अनजान सब,
है शाम होने को अभी,
पंछी उड़े है चल दिये,
मुड के न अब आये कभी।

ढलती जवानी की सुनो,
दिल की यही तो है सदा।
मदहोश रैना"बेखबर,
सर पे खड़ी है वो कजा।"रैना"

शुक्रवार, 14 दिसंबर 2012

tum chhupe ho kha

तुम छुपे हो कहां हम तुझे ढूंढ़ते,
जिन्दगी थक गई घूमते घूमते।
आदमी को गिला आदमी से रहा,
राज दिल का कभी क्यों नही खोलते।"रैना"



  

गुरुवार, 13 दिसंबर 2012

vo bdle mausam jaise

कायम है हम तो गम जैसे,
दोस्त बदले मौसम जैसे।
सबकी फितरत "रैना"जैसी,
कम ही मिलते है तुम जैसे।"रैना"


बुधवार, 12 दिसंबर 2012

 एक अजनबी मेरे दिल के करीब,
मुझको लगने लगा है बहुत हबीब।
वैसे आज तक हम उसे मिले नही,
मेरे अरमानों के फूल  खिले नही,
फिर भी महसूस होता है,
हम कई बार मिल चुके है।
ऐसा क्यों हो रहा हम सोचते अक्सर,
क्या ये हमारे साथ हैं या उसके साथ भी,
हमारे बीच की दूरी जैसे जमीं से आसमान,
फिर भी हम नादान उनसे मिलने का अरमान,
पाले बैठे है।
काली अँधेरी रात में,
चकौर चाँद को कभी नही देख सकती,
फिर वो ऐसा सपना क्यों देखती है।
कोई उससे पूछे तो वो कहेगी दिल पे जोर नही,
दिल पे किसी का जोर नही झूठा ये शोर नही।
दिल का क्या है ये किसी पे भी आ सकता है,
राजा को भिखारी बना सकता है।
मेरा दिल भी किसी पे आने लगा है,
मैं तो पहले ही भिखारी हूँ,
मुझे ये और क्या बनाएगा,
क्या मुझे मंजिल पर पहुचायेगा,
ये सोच कर मैंने दिल की मान ली है,
आगे चलने की ठान ली है।।।।।।।।।।।"रैना"
 

रविवार, 9 दिसंबर 2012

ab paise se

दोस्तों खास आप के लिए

अब पैसे से मिलता दिल है,
ये मुफ्लिश को कब हासिल है।
मेरे मरने पे जो रोया,
वो ही साजिश में शामिल है।
अब तो नेता वो ही बनता,
जो दरिंदा झूठा कातिल है।
गम तो है पर मर ले कैसे,
बेशक जीना भी मुश्किल है।
"रैना"को तुझसे से मिलना,
तू ही तो मेरी मंजिल है। "रैना"

शनिवार, 8 दिसंबर 2012

काश वो अब मान जाये,
दर्द मेरा जान जाये।
बेवफा को क्या कहे अब,
शाम ढलती जान जाये।"रैना"

दोस्तों के लिए एक खास पेशकश

होसलें खुद ही बढ़ाने होगें,
रास्तें हम को बनाने होगें।
हर किसी को कब मिले ये मंजिल,
लोग जो गिरते उठाने होगें,
कब अकेला तोड़ सकता पत्थर,
अब कदम मिल के बढ़ाने होगें।
ये मसीहा देश के दुश्मन है,
रास्तें से ये हटाने होगें।
घोर अन्धेरा लगे डर देखो,
दीप मन में अब जलाने होगें।
तोड़ मत दिल जिन्दगी बाकी है,
और जीने के बहाने होगें।
दाग दिल पे जो लगे हैं"रैना"
वक्त के हाथों मिटाने होगें। ...."रैना"

 

शुक्रवार, 7 दिसंबर 2012

बाद तेरे हाल मेरे क्या बताऊ कैसे,
दर्द अपना मैं तुझे अब यूं सुनाऊ कैसे।
बात तेरी याद करके आँख रोती अक्सर
मैं दुखी मन को भला अब चुप कराऊ कैसे।"रैना"
 

गुरुवार, 6 दिसंबर 2012

us gali me lge


जिस गली में यार का घर है,
उस गली में अब लगे डर है।"रैना"

दोस्तों के नाम इक पैगाम


जनता की बूरी हालत है,
नेता ने बदली फितरत है।
झूठे का घर रोशन देखो,
अब सच की आई शामत है।
यूं आशिक से कुछ मत पूछो,
गम में जीने की आदत है।
मरने वाला अक्सर कहता,
बाकी जीने की हसरत है।
पत्थर से भी पानी टपके,
ये तो उसकी ही कुदरत है।
बिन मांगे ही सब मिल जाता,
"रैना"की ऐसी किस्मत है। ........."रैना"

बुधवार, 5 दिसंबर 2012

desh hit me

देश हित की बातें करने वाले,
अपने हित की सोच सदन से उठ कर चले गये।"रैना"

सोमवार, 3 दिसंबर 2012

 नैना जो अक्सर नम मिलते,
बदकिस्मत को ही गम मिलते।
दुःख का कारण ये भी होता,
खुद से इन्सां जब कम मिलते।
दिल के कूचे में मुशिकल है,
जुल्फों में अक्सर खम मिलते।
मरते कब है मरने वाले,
मरते आशिक बा दम मिलते।
फिर तो हसरत होती पूरी,
गर रैना" दिन से हम मिलते।"रैना"
मयकश ने कब पीना सीखा,
गफलत में हैं जीना सीखा।
आशिक तो हंस हंस के सहते,
जख्मों को कब सीना सीखा। "रैना"

रविवार, 2 दिसंबर 2012


दिल के बदले दिल का मिलना,
अब मुशिकल है गुल का खिलना।
उल्फत की राहे हैं मुशिकल
चलना तो सम्भल के चलना।
बेशक तय उस नगरी जाना,
मस्ती से जी छोडो डरना।
"रैना"की हसरत ये मकसद,
मरना तो कुछ करके मरना।"रैना"

शनिवार, 1 दिसंबर 2012

दोस्तों की खिदमत में
 बाद मुद्दत पेश है

दर्द दिल में है दवा देदे,
यार मेरे इक दुआ देदे।
लोग मरते बेवजह देखो,
फ़कत जीने की अदा देदे।
दोस्तों को तो ख़ुशी देना,
तू मुझे चाहे कजा देदे।
आदमी पे कब भरोसा है,
कोन कब रैना" दगा देदे। ........ "रैना"

शुक्रवार, 30 नवंबर 2012

mujh me tu tujh me

 पास रहते हो मगर दिखते नही हो,
गम यही अफ़सोस है मिलते नही हो।"रैना"

शुक्रवार, 16 नवंबर 2012

 काले बादल उड़ते जाये,
पानी अब तो कम बरसाये,
कैसे हो फूलों का खिलना,
सोचे माली अति घबराये
पानी तो है जीवन रेखा,
बादल को कैसे समझाये।
बादल बोला दुःख का मारा,
हम पानी कैसे बरसाये।
गन्दा अब तो पानी सारा,
सूरज की जां निकली जाये।"रैना"


aao fursat hai

पिंजरा मिट्टी का देखो इक दिन टूट जाये गा,
पिंजरे में कैद पंछी तो तब बेशक छूट जाये गा।

गुरुवार, 15 नवंबर 2012

jo mil jaye nyamat smjhe

जो मिल जाये नयामत समझे,
जो न मिले गिला न कोई शिकवा,
ये फितरत होती फकीरों की,
मेहनत पे विश्वास करे,
पर कदर करते तकदीरों की।
ये फितरत होती ..............
ख़ुशी में ज्यादा खुश नही,
गम में ज्यादा रोते नही,
हर मुश्किल को सह लेते
विचलित कभी होते नही,
चिन्ता में डूबे नही रहते,
सोच रखते है तदबीरों की।
ये फितरत होती ............
हर काम करते खूबी से,
पर उसकी रजा में रहते है,
किसी का बुरा नही करते,
जज्बातों में अक्सर बहते है,
मस्त मोला खुले दिल वाले,
चाह रखते नही जागीरों की।
ये फितरत होती ..............."रैना"
सुप्रभात जी ........good morning ji 




apni masti me

अपनी मस्ती में रहते है,
आशिक तो पीड़ा सहते है।
हम तुमसे जब से है बिछुड़े,
आंखों से दरिया बहते हैं।
अब सच कहने वालों पे तो,
गम के  पर्वत ही ढहते है।
जो उसको है अच्छा लगता,
आओ कुछ ऐसा करते हैं।
"रैना" पागल हो जाये गा,
कहने वाले तो कहते हैं। ......"रैना"

apne ghar to

दोस्तों फिर लिख दी ग़ज़ल
क्या आप पसंद करेगे जी।

अपने घर तो गम रहते हैं,
पर मस्ती में हम रहते हैं।
हंसना मेरी फितरत यारो,
प्यासें नैना नम रहते हैं।
बीवी अक्सर झगड़ा करती,
अब हम घर में कम रहते हैं।
खाने पीने की बस सोचे,
चिन्ता में हरदम रहते हैं।
तुम तो मेरे दिल में बसते,
क्या उस दिल में हम रहते है।
रैना"को तो गहरा सदमा,
बिन तेरे बेदम रहते हैं। ..."रैना"

बुधवार, 14 नवंबर 2012

ham to ham hai likin

दोस्तों पेश है इक मेरे दिल की रचना

तू देता गम मुझको,तेरे गम कम निकले,
हां तुम तो तुम निकले,पर हम तो हम निकले।
शिकवा करते करते,बेशक हिम्मत हारे,

सोचे तन्हा बैठे,फुरसत है दम निकले।
जाने कब ये माने,करता हेराफेरी,
दिल तो बहला मेरा,पर नैना नम निकले।
मुश्किल भी घबराई,देखे मेरी हालत,
तू ही कुछ कर मौला,जुल्फों का खम निकले।
हंस के पीड़ा सहना,मस्ती में ही रहना,
"रैना" उसका सेवक,मुख से बम बम निकले। "रैना"

maa to kya kis

मां को समर्पित इक गीत

मां तू क्या किस मिट्टी की बनी,
त्याग की देवी ममता की धनी,
बच्चे को जन्म दे जां दाव पे लगाती है,
बच्चे का मुख देख दुःख भूल जाती है।
 मां ........ मां  ............. मां ...........
लाड प्यार से मां बच्चे को पालती,
अपने से ज्यादा बच्चे को सम्भालती।
बच्चा खुश मां की रूह खिलखिलाती है।

बच्चे का मुख देख दुःख भूल जाती है।
मां ........ मां  ............. मां ...........
बड़े ही चाव से मां खाना पकाती है,
पहले बच्चों को पेट भर खिलाती है,
बचा खुचा खा के भी मुस्कराती है।

बच्चे का मुख देख दुःख भूल जाती है।
 मां ........ मां  ............. मां .........
बच्चों पे सब कुछ कर देती अर्पण,
धन्य है मेरी माता रानी का समर्पण,
दुःख दे बच्चा फिर भी सीने से लगाती है।

बच्चे का मुख देख दुःख भूल जाती है।
मां ........ मां  ............. मां ...........

मिली खुशियाँ न रही कोई उलझन,
"रैना" करता है मां में  रब के दर्शन,
मां ही जीवन का रास्ता दिखाती है। ......."रैना"


bal diwas

बाल दिवस पर विशेष कविता

बाल दिवस क्या होता है,
पूछता है इक बाल श्रमिक,
अपने बाल श्रमिक दोस्त से,
सुना है??????
इस दिन बच्चे करते खूब धमाल,
बच्चों को किया जाता माला माल।
नेता दावें करते?????
बच्चों की जाएगी देखभाल।
हर बच्चा पढ़े लिखेगा,
सब की होगी सम्भाल।
आगे से दूसरा बाल श्रमिक बोला,
हमारा तो किसी को नही ख्याल,
मालिक हमें करते हैं हलाल,
बंद रहते फैक्टरी में सारा साल।
आगे से उसने बोला??????
भाई तुम करते हो कमाल,
यहाँ अधिकतर समाज सेवी,
कर्मचारी,अधिकारी????
नेताओं के दलाल।
जो पी जाते हमारा सारा माल,
सिर्फ कागजों में बजती खड़ताल।
वो बच्चों के नाम पे खाते मुर्ग मसल्म,
बच्चों को नसीब नही होती रोटी दाल।
बेशक बाल श्रमिक का सही है सवाल,
बाल दिवस मनाते हर साल,
पर गरीब बच्चों का फिर भी वही हाल।
ऐ मेरे देश के ठेकेदारों?????
बाल दिवस को सार्थक बनाओ,
हर बच्चें को उसका हक़ दिलाओ।
ये बच्चे ही देश का भविष्य हैं।
भारत माता की जय। ।।।।।।।।।।। "रैना"


मंगलवार, 13 नवंबर 2012

din mira to n kala

खूब दीप जलाये दीवाली की रात,
हर तरफ हुई रोशनी की बरसात,
ये अफ़सोस फिर भी न बनी बात,
अन्धेरा कायम है दिल के घर में। "रैना"

सोमवार, 12 नवंबर 2012

aa diwali ke din


दीवाली के दिन मिल जाये,
दीवाली को बिछुड़े मिलते,
मुकर्र होता सब उसके घर,
बेमौसम कब ये गुल खिलते। "रैना"

ugte surj si

हैप्पी दीवाली

दिल महके खुशहाली करदे,
उगते सूरज सी लाली करदे,
इतनी विनती मेरे मौला,
हर घर को दीवाली करदे।
दोजख सा मुफलिस का जीवन,
दूर कहीं तंगहाली करदे।
मात पिता सुख चैन से जी ले,
खुश लाला ओ लाली करदे।
फिर तो सारा मसला हल है,
गुल पे किरपा माली करदे।
दीवाली पे सोचे अपनी,
मन उसका है खाली करदे।
"रैना"छोड़ो पटाखे मत फोड़ो,
 दीवाली कुछ निराली करदे।
सुप्रभात जी, दीवाली की
शुभकामनाओ सहित। राजिंदर शर्मा "रैना"

ao kuchhaese

दोस्तों से गुजारिश

आओ कुछ ऐसे दीवाली मनाये,
अपने मन में हम दीप जलाये,
ये बाहरी सारे अडम्बर छोड़े,
भीतर का अन्ध्कार मिटाये।
आओ कुछ ऐसे ..............
जानती है ये दुनिया सारी,
मिठाई तो अब है बीमारी,
छलिया कपटी दुष्ट व्यापारी,
करते अब वो मिलावट भारी,
मिठाई को तो हाथ न लगाये।
आओ कुछ ऐसे .................
पटाखें तो प्रदूषण फैलाते,
जीवों के लिए मुश्किल लाते,
जानकार तो ये भी बतलाते,
प्रदूषण से जीव भी मिट जाते,
हिफाजत को पटाखे न चलाये।
आओ कुछ ऐसे .................
दीवाली के दिन बस दिल मिले,
हर चेहरा फूल के जैसा खिले,
भूल जाये हम सारे शिकवे गिले,
जुबां खैर मांगें दुआ के लिए हिले,
मिलझुल गीत ख़ुशी के गाये।
आओ कुछ ऐसे ................."रैना"


diwali ki

दोस्तों के नाम इक ग़ज़ल

दीवाली की बातें चलती,
मेरे दिल में होली जलती।
मैं बिरहन की मारी दुखिया,
बैठी अब हाथों को मलती।
साजन से जो दुरी पनपी,
इसमें मेरी सारी गलती।
किस्मत ही जब धोखा देती,
फिर तो बिगड़ी बात न बनती।

दिल की धड़कन है बढ़ जाती,
आँखों से जब आँखें मिलती।
"रैना"दिन तो हो जाना है,
हिम्मत से मुश्किल भी कटती। "रैना"

रविवार, 11 नवंबर 2012

soch le jra kyo

सोच ले जरा क्यों मिली जिन्दगी,
तभी मिली जिन्दगी तू कर बन्दगी,
बन्दगी से तेरा होगा कल्याण,
सफर ऐ जिन्दगी होगा आसान।
 होगा कल्याण तेरा होगा कल्याण .......

बन्दगी क्या है इस का भी ध्यान कर,
हर जीव का मन से मान सम्मान कर,
हर शै में तू इक रब को ही जान।
होगा कल्याण तेरा होगा कल्याण .......

उलझा रहता है न तुझको ख्याल है,
सोच ले लाख चौरासी का सवाल है,
अपना भी कुछ तू कर ले घ्यान।
होगा कल्याण तेरा होगा कल्याण .......

खत्म न होता कोई भी काम पूरा रे,
एक होता पूरा दूजा रहता अधूरा रे,
हर पल मनवा रहता परेशान।
होगा कल्याण तेरा होगा कल्याण .......

"रैना" तू रंग जा नाम के रंग में,
कर बदलाव अपने जीने के ढंग में,
छोड़ दे मोह माया अभिमान।
होगा कल्याण तेरा होगा कल्याण .......
सुप्रभात जी good morning ji

wada krke nibhaya nhi hai

दोस्तों दुखी मन से,
ये गीत लिख रहा हूँ,
देश की हालत पर।

ओ मेरे देश की धरती,
डाकू चोर उच्चके कपटी,
अब ऐसे नेता पैदा करती

ओ मेरे देश ..............
यहाँ राजनीती का मौसम है,
सब अपनी ढपली बजाते है,
जो पिटते जेल में बंद होते,
देखो वो ही नेता बन जाते,
देख के इन की हालत को,
भारत मां है आहें भरती।
ओ मेरे देश ...............
फिर खद्दरधारी नेता ये,
ऐसे देश की सेवा करते है,
लुट के पैसा गरीबों का,
जा स्विस बैंक में भरते है,
कोई नही इन्हें रोकने वाला,
सरकार रक्षा उनकी करती।
ओ मेरे देश ...................
सारा सिस्टम फेल यहाँ,
बस रिश्वत काम चलाती है,
परिवारवाद का बोलबाला है,
इक घर के सारे बाराती है।
अनाज  सड़े गोदामों में,
बेचारी जनता भूखी मरती।
ओ मेरे देश .................."रैना"


दोस्तों इक ग़ज़ल आप के नाम 

याद तेरी बावफा निकली,
तू भला क्यों बेवफा निकली।
खेल किस्मत का इसे कहते,
जान मेरी ही कजा निकली।
हम खता करते नही संभव,
ये उसी की तो रजा निकली।
तोहमत किस पे लगा देते,
बात अपनी की हवा निकली।
सोचते है जब कभी तन्हा,
तू वफा थी क्यों जफा निकली।
हैं उठे जब हाथ सजिदे को,
आज मुख से बददुआ निकली।
जिन्दगी भर बन्दगी तेरी,
दर्द की ये इक दवा निकली।"रैना"

शनिवार, 10 नवंबर 2012

aai diwali

आई दीवाली????
लोग घरों को सजाने लगे,
गंदगी को हटाने लगे।
चार दिन पहले ही,
बेहिसाब दीप जलाने लगे,
ख़ुशी में पटाखें बजाने लगे,
मगर अफ़सोस???
ये दीप पटाखें????
अंधकार न मिटायेगे,
बेहिसाब प्रदूषण ही फैलायेगे।
पटाखें बजाना कोन सा नखरा है,
प्रदूषण जीवन के लिए खतरा है।
इसलिए?????
कुछ ऐसी दीवाली मनाई जाये,
मन के घर से गंदगी हटाई जाये,
पटाखें रहित दीवाली मना कर,
घरती मां की हरियाली बचाई जाये।"रैना"
सुप्रभात जी ..................good morning ji
happy diwali ji...........

aaj fir yaad

दोस्तों जाते जाते इक ग़ज़ल

याद तेरी बावफा निकली,
तू भला क्यों बेवफा निकली।
खेल किस्मत का इसे कहते,
जान मेरी ही कजा निकली।
हम खता करते नही संभव,
ये उसी की तो रजा निकली।
तोहमत किस पे लगा देते,
बात अपनी की हवा निकली।
सोचते है जब कभी तन्हा,
तू अदा थी क्यों खता निकली।
हैं उठे जब हाथ सजिदे को,
आज मुख से बददुआ निकली।
जिन्दगी भर बन्दगी तेरी,
गम नही तू नाखुदा निकली।"रैना"



muddt se jla rhe hai

मुद्दत से मना रहे???
दीवाली,
जला रहे हैं दीप,
अंधेरा मिटाने को,
घर जगमगाने को,
अफ़सोस ???????
हुआ न सवेरा है,
दीपक तले??????
फिर भी अंधेरा है। "रैना"

ab morcha to

अब मोर्चा संभालना ही पड़ेगा,
देश को बचाने के लिए,
रास्ता निकालना ही पड़ेगा।
वरना ये देश के ठेकेदार,
कुछ अनर्थ कर देगे,
देश को स्विस बैंक में,
गिरवी ही धर देगे।
इनका न कोई दीन ईमान है,
सफेद कपड़ो में छिपा शैतान है।
देखिये भ्रष्टाचारी अधर्म हो गये है,
गैरत बेच खाई बेशर्म हो गये है।
हंसते हंसते जेल जाते हैं,
तीर्थ कर के आये ऐसे,
हंसते हंसते जेल से बाहर आते है।
बेशक अन्ना रामदेव केजरीवाल ने,
जनता को जागृत तो किया है,
गद्दार नेताओ को जख्म तो दिया है।
ये जख्म नासूर बनाना हो,
हर भारतीय को आगे आना होगा।
जगो उठो देर न लगाओ,
इसमें हम सब की भलाई है,
मेरी भारत मां ने सबको आवाज लगाई है।
भारत माता की जय ............"रैना"
दोस्तों आप के लिए खास रचना 

फिर भला क्यों गिला होगा,
खत्म जब सिलसिला होगा।
याद उसकी सताती है,
है जहां दिल मिला होगा।
 इश्क करना बड़ा मुश्किल,
जो करे वो फना होगा।
बागवा देख कर खिलता,
फूल जब भी खिला होगा।
फकत उसको मिले मंजिल,
दूर तक जो चला होगा।
बात ये तो पुरानी है
कर भला तो भला होगा।
दाग मिटता नही "रैना"
इश्क में जो लगा होगा। "रैना"

fir bla kya gila

फिर भला क्या गिला होगा,
खत्म जब सिलसिला होगा।
याद उसकी सताती है,
है जहां दिल मिला होगा।
इश्क करना बड़ा मुश्किल,
जो करे वो फना होगा।
बागवा देख के खिलता,
फूल जब भी खिला होगा।
फकत उसको मिले मंजिल,
दूर तक जो चला होगा।
दूर देखो उठे धूआं,
घर किसी का जला होगा।

शुक्रवार, 9 नवंबर 2012

o lssi mkki roti

दोस्तों आज फिर बचपन,
 मां का प्यार,गाँव याद आ गया
एक गीत पेश कर रहा हूँ।

ओ लस्सी मक्की की रोटी साग,
मां री बहुत याद आये,
तेरे प्यार वाला मिठ्ठा वो राग,
मां री बहुत याद आये।
मां री बहुत याद .................
ओ लस्सी मक्की की रोटी .....
याद आये बचपन दिन वो बहार के,
आंखों आगे घूमते पल वो प्यार के,
लगा दिल पे यादों वाला दाग,

मां री बहुत याद .................
ओ लस्सी मक्की की रोटी .....
याद आये कुएं का डंडा मिठ्ठा पानी,
गांव की मिट्टी ने मुझे बख्शी जवानी,

वो तालाब के किनारे वाला बाग़,
मां री बहुत याद आये।

मां री बहुत याद .................
ओ लस्सी मक्की की रोटी ....."रैना"


गुरुवार, 8 नवंबर 2012

mila hira jnm

सुप्रभात सूफी गीत के साथ,

मिला हीरा जन्म तुझको,
ये उसकी मेहरबानी है,
अब कुछ तो फ़िक्र करले,
चार दिन की कहानी है।
मिला हीरा जन्म तुझको .....
पहले कर्म किये अच्छे,
मानुष जन्म जो पाया है,
सारे चक्कर मिटाने को,
तुझको उसने बनाया है,
मोह माया में तू उलझा,
करता आना कानी है।
मिला हीरा जन्म तुझको .."रैना"
good morning ji  

kash mera koi apna ho

दोस्तों आप की सहमती पर लिखी ग़ज़ल

जीवन भर ऐसे ही रोना,
मिलना बिछुड़न ये सब होना।
सारे जख्मों ने भर जाना,
खाली रहता दिल का कोना।
होनी अक्सर हो के रहती,
चलता रहता पाना खोना।
इसकी कैसी चिन्ता करनी,
मरना जलना ये सब होना,
उसका जीवन बेमकसद का,
जिसने लम्बी ताने सोना।
"रैना' उसकी भी सुन ले तू,
वरना तुझको गम है ढोना। "रैना"


aaj ka kaiku

आज
के  kaiku

नेता????
सिर्फ लेता ????
पहले वोट,
फिर नोट।
देता????
झूठे आश्वसन।

दौड़ी ??????
महंगाई की
 रेल,
जनता का हार्ट
फेल,
 सरकार मस्त।

सफेदपोश????
करोडपति भिखारी,
भीख मांगने की????
करने लगे तैयारी
चुनावी मौसम की,
सम्भावना।  "रैना" 

बुधवार, 7 नवंबर 2012

kaiku

धीरज चौहान जी का kaiku पढ़ कर
मेरे मन में kaiku लिखने का विचार आया
पेश है kaiku अपने विचारो से अवगत करवाए।

गडकरी???
खूब लगाओ ???
फटकरी,
जख्म भरने वाला नही hahahaha.

वडेरा ????
कुछ न बिगड़े तेरा,
तू दामाद hahahaha 

केजरीवाल,
आका
अब कब होगा
धमाका।
              "रैना"

dilli kab sone wali hai

ग़ज़ल का नया रुप दोस्तों
तवाजो चाहुगा जी

अब दिल्ली कम ही सोती है,
हर दिन इक रैली होती है।
नेताओं के झूठे भाषण,
भारत मां सुन के रोती है।
महंगाई बन नागिन डसती,
मिलती मुश्किल से रोटी है।
गाली दो या अन्डे मारो,
नेता की चमड़ी मोटी है।
उसके घर में सुख कम रहता,
जिसकी  नीयत ही खोटी है।
बीवी होती घर की लक्ष्मी,
वो पतली चाहे मोटी है।
"रैना" अपनी चिन्ता कर लें,
जीवन तो हीरा मोती है।  "रैना"

mere dost achchhe

रचना पेशे खिदमत है जनाब

सारे वादें सच्चे निकले,
मेरे दोस्त अच्छे निकले।
शिकवा उनसे कैसे करते,
किस्मत में ही धक्के निकले।
बेशक उनको मिलती मन्जिल,
जो वादे के पक्के निकले।
बातों की ही कीमत लगती,
बिकते कम जो कच्चे निकले।
दोपहरी में डाका डाला,
शातिर डाकू बच्चे निकले।
देखो बदली सारी बस्ती,
"रैना"हक्के बक्के निकले।  "रैना"

मंगलवार, 6 नवंबर 2012

dosto se ik vinti arj ardas

एक अर्ज, विनती,अरदास
दोस्तों कुछ समय पहले तक मैं गुमनाम शायर,कवि था,
मगर फेस बुक ने  हमे मशहूर कर दिया है,
 अब मैं कवि सम्मेलनों में भी जाने लगा हूँ।
मैं उन दोस्तों से अनुरोध करता हूँ,
 जो कवि सम्मेलन इत्यादि आयोजित करवाते है।
वो यदि मेरी लेखनी को बेहतर समझते है तो
मुझे भी इज्जत बख्शे और हमें भी बुलाये ताकि मैं
भगवान की बख्शी हुई नयामत को सब में बाँट सकू।
जो मेरे दोस्त गायक है उनसे भी अनुरोध है की,
अच्छे गीत,गज़ल,भजन सूफी पंजाबी,
हिंदी कलाम के लिए हम से सम्पर्क करे।
मेरा   मोब 09416076914 हैं।

bura daur chl

 दोस्तों गजल का नया अंदाज शायद आप को पसंद आये।

मौसम ने बदली फितरत,खुद को सम्भाले रखना, 
 आंखें तो खोले लेकिन,होठों पे ताले रखना।
चाहे मुश्किल ने घेरा,है मन्जिल से भी दुरी,
तू मन मत छोटा करना,उम्मीदें पाले रखना।
छाया है गुप अन्धेरा,जीवन की राहे काली,
तुझको मिल जाये मन्जिल,मन में उजाले रखना।
है दुनिया जैसा जीना,ये जीना भी क्या जीना,
हो तेरी अपनी मस्ती,अन्दाज निराले रखना।
"रैना" बूरे करमों से, तू कर लें तौबा तौबा,
तू साजन के कदमों में, अब डेरा डाले रखना। "रैना"

सोमवार, 5 नवंबर 2012

rote bchcho ko

मां की शान में चंद अल्फाज

रोता बच्चा बहलाती मां
है भूखी भी सो जाती मां।
मां की ममता मां ही जाने,
बच्चे पे जान लुटाती मां।
अपना सुख बच्चों में बांटे,
देखो खुद पे इतराती मां।
बच्चों के खातिर सब करती,
हर मुश्किल से टकराती मां।
इस युग में मां की बेअदबी,
चुप ही आंसू पी जाती मां।
"रैना"सोचे मां के बारे,
है किस दुनिया से आती मां।
सुप्रभात जी .......good morning ji.

shahar men

दोस्तों इक और ग़ज़ल मेरी किताब
" हर हाथ हवा देगा"से
बुझ जा शमा या तू जला दे मुझे,
कुछ तो वफा का ये सिला दे मुझे।
मैं तो ख़ुशी से जाम पी लू भला,
तू जहर ही चाहे पिला दे मुझे।
तेरी गली भी अब नही याद है,
तू घर तिरे का तो पता दे मुझे।
हसरत यही अब और जीना नही,
कर रहम खुद ही तू मिटा दे मुझे।
कटती न काली रात लम्बी लगे,
तू हम जुबां कोई मिला दे मुझे।
मन्जिल नही मिलती बता क्या करु,
अब रास्ता कोई दिखा दे मुझे।
"रैना" करे विनती मिरे ओ खुदा
अब तू किनारे से लगा दे मुझे। ..."रैना"

mere spne aksr tute hai

सपने अक्सर टूटे हैं,
भाग्य हमसे रुठे है।

रविवार, 4 नवंबर 2012

khuj le use khoj le

मेरे यार के सजिदे में इक सूफी गीत

कोई कहता मस्जिद में बैठा,
कोई कहता बैठा मन्दिर में,
खोजने वालों ने है ये पाया,
वो बैठा है मनमन्दिर में।
खोज ले उसे खोज ले,
अपने अंदर खोज ले,
मौज ले फिर मौज ले,
अपने अंदर खोज ............
ऊपर आसमां नीचे धरती,
धरती नीचे पानी है,
पानी और हवा से ही,
चलती ये जिंदगानी है,
इन सब को बनाने वाली,
वो अदभुत इक शक्ति है,.
उस शक्ति के दम से ही,
सारी दुनिया चलती है।
खोज ले उसे खोज ले,
मौज ले फिर मौज ले,
उसे अपने अंदर ................"रैना"
सुप्रभात जी .....................good morning ji

pi ke didar ko

यार की बन्दगी में सूफी गीत

ये मन तरसे,
नैना बरसे,
उस पहले प्यार को,
पी के दीदार को।
ये मन तरसे ................
पी के दीदार ............
बेशक तू मुझ से दूर नही,
मुझको पर्दा मन्जूर नही,
आ सामने आ,
आके झलक दिखा,
इश्क के बीमार को।
ये मन तरसे ......
पी के दीदार ..............
तू मेरी मंजिल मक्सूद है,
तेरे दम से मेरा वजूद है,
तू बनाये मिटाये,
मर्जी से चलाये
इस संसार को।

ये मन तरसे ................
पी के दीदार ............   "रैना"


barbad hote nshe men

दोस्त ये मेरी ग़ज़ल?????????
खास कर युवा वर्ग को समर्पित है

तू छोड़ बूरी लत नशा कर हौसला,

मय खून पीती जिस्म कर दे खोखला।
अब देश में है चल पड़ी ऐसी हवा,
भटका युवा कुछ भी नही है सोचता।
दो चार ही बाकी बचे है ऐब से,
अब हर किसी को देखिये गा झूमता।
है शहर में बिकते नशे हर किस्म के,
कोई किसी को अब नही है रोकता।
जो भी नसीहत दे किसी को सोच कर,
कहते उसे पागल भला है भौंकता।
जो जाम पीता है दवा ही जान कर,
वो अक्ल मंद अक्सर मजे में झूमता।
"रैना" कभी तू सोच ले ये गौर से,
तू मौत के ये खेल क्यों है खेलता। "रैना"

शनिवार, 3 नवंबर 2012

manjil tu hi

इक ग़ज़ल उसके नाम।

मन्जिल तू ही साहिल है,
फिर क्यों भटके ये दिल है।
शिकवा तुझ से क्या करना,
सब कुछ ही तो हासिल है।
तेरे चर्चे महफिल में,
बेशक तू इस काबिल है।
हमने इतना जाना है,
तू जीवन में शामिल है।
अदला बदली कर सकता,
तुझको रूतबा हासिल है।
क्या ढूंढे बेगानों में,
अपना ही अब कातिल है।
"रैना"से कुछ मत कहना,
सच जानो वो पागल है। "रैना"
सुप्रभात जी ............good morning ji

बात तक़दीर की मैं करू कैसे,

दोस्तों अपनी प्यारी ग़ज़ल 
आप की खिदमत में पेश है,
तवाजो चाहू गा। 

अब चली ऐसी हवा देखो, 
यार करते हैं दगा देखो। 
इश्क भी जाहिल हुआ यारों, 
हुस्न की जालिम अदा देखो।
 पूछते हैं फरिश्ते भी अब, 
है कहां मिलती वफा देखो। 
हैं दुखी इन्सान खुद से ही, 
ढूंढता फिरता कजा देखो। 
दर्द अपने ही तुझे देगे,
ये जमाने की अदा देखो।
बन्दगी में जब लगे दिल है,
जिन्दगी में तब मजा देखो।
बाद मुद्दत भी नशे में हैं,
रिन्द होते है फना देखो।
इश्क में हासिल जुदाई है,
मौत ही "रैना"सजा देखो। ....."रैना"

शुक्रवार, 2 नवंबर 2012

ab chli hwa aisi

अब चली ऐसी हवा देखो,
यार करते हैं खता देखो।
इश्क भी जाहिल हुआ यारों,
हुस्न की जालिम अदा देखो।
पूछते हैं फरिश्ते भी अब,
है कहां मिलती वफा देखो।
हैं दुखी इन्सान खुद से ही,
ढूंढता फिरता कजा देखो।
दर्द देगे
जिन्दगी में कुछ मजा देखो।

ik ummin

इक आशा के दम से ही जिन्दा है,
वरना कब के दुनिया छोड़े जाते।"रैना"

har mushkil sah kar

हर मुश्किल सह कर बच्चों का पेट भरे है,
इस दुनिया में इतना तप तो माँ ही करे है,...."रैना"
सुप्रभात जी ....................good morning ji

hta hu diwano men

कुदरत की रहमत तो सब पे बरसे,
यूं बुझदिल ही अक्सर प्यासा तरसे।
"रैना"मन्जिल उसको सजिदा करती,
तपती दोपहरी जो निकले घर से। "रैना"


ab chli

अब चली ऐसी हवा देखो,
 यार देते अब दगा देखो।
ग़ज़ल आप के वास्ते दोस्तों

अब जमाने की अदा यारों,
यार देता है दगा यारों।
तुम वफा की बात मत करना,
है सिला मिलता कजा यारों।
क्यों करे दोस्त वफा कोई,
अब वफा देती सजा यारों।
दर्द देता सोचता कम हैं,
शख्स कब देता दवा यारों।
तुम कभी सोचो अकेले में,
क्यों हुये वादे हवा यारों।
मौत ही अब तो इलाजे गम,
कब सुने गा वो खुदा यारों।
याद उसकी बावफा निकली,
जब मरे तब हो जुदा यारों।
मान"रैना"को मिले मन्जिल,
अब करो पूजा दुआ यारों। ......... "रैना"

गुरुवार, 1 नवंबर 2012

piya ji mai to pe wari

करवा चौथ के दिन अपनी बहनों को समर्पित गीत,

पिया जी मैं तो पे वारी,जाऊ वारी वारी,
तोहे लग जाये मोरी उमरिया सारी।
पिया जी मैं .............................
मैं क्या जानू भगवन कैसे,
मन मंदिर में तुम हो बैठे,
सांसों में धड़कन में तुम हो,
मेरा तो जीवन ही तुम हो,

जन्मों के तप से तुझको पाया,
खिला ये गुलशन है महकाया,
तोहे पाया जिन्दगी सफल हमारी,
पिया जी मैं ..........................."रैना"


ham bhule tera

चाहे रूतबा ऊँचा कद हो,
पर अरमानों की इक हद हो,
खाना पीना मस्ती सोना,
जीवन का कोई मकसद हो। "रैना"
सुप्रभात जी ..............good morning ji

dil se jb dil milta hai

दोस्तों आप के नाम इक ग़ज़ल

दिल से जब ये दिल मिलता है,
गुलशन में गुल तब खिलता है।
आशिक ही ये समझे जाने,
दिल का दिल से क्या रिश्ता है।
सच का व्यापारी गर्दिश में,,
झूठे का सब कुछ बिकता है।
सब ने सूरत फितरत बदली,
जो होता वो कब दिखता है।
"रैना"कुछ तो छोड़े जाता,
ये सूरज जब भी छिपता है। ....."रैना"


dekho ji kiya hai kmal

सरकार का गीत

देखो जी किया है कमाल, मनमोहन सरकार ने,
कोयला खाया गैस चढ़ाई,
अंबानी को किया मालामाल, मनमोहन सरकार ने।
देखो जी किया है .............................
आठ साल की दुःख भरी कहानी,
महंगाई पे आई भरपूर जवानी,
मनमोहन दादा है मौनी बाबा,
देश को कर दिया कंगाल, मनमोहन सरकार ने।
देखो जी किया है ..............................
इमानदारों को करे डिमोशन,
भ्रष्टाचारियों को दे प्रमोशन,
नेताओं की मौज बहारे,
जनता कर दी बेहाल, मनमोहन सरकार ने।
देखो जी किया है ...............................
इस सरकार के काले कारनामे,
हर दिन उजागर नये घोटाले,
घोटाला चैम्पियन देश हमारा,
चैम्पियन बनाये दलाल, मनमोहन सरकार ने। 
देखो जी किया है .........................."रैना"

मंगलवार, 30 अक्टूबर 2012

diwar chahe kchchi hoti

चाहे छत टपके दीवारे कच्ची लगती,
अपने घर की मिट्टी फिर भी अच्छी लगती।
मतलब के होते जाये अब सारे रिश्ते,
माँ की मोहब्बत ही निश्छल सच्ची लगती।  "रैना"

chahe chhat tpke diware kchchi lgti,
apne ghar ki mitti fir bhi achchhi lgti.
matlb ke hote jaye ab sare rishte,
maa ki mohbbt hi nishchhl schchi lgti.  "raina"

gar milna mushikl

दोस्तों मेरे मन की रचना????
 आप को कैसी लगी,

तुझसे बिछुड़े तेरी मरजी,
कब चलती है मेरी मरजी।
अब तो मुझको तू मिल जा रे,
गुल बन बगिया में खिल जा रे।
तेरे बिन अब मनवा तरसे,
नैना सावन जैसे बरसे।
मन में ज्वाला दहके हरदम,
किस नगरी में बसते बालम।
पंख फैला के मैं उड़ आऊ,
साजन को फिर कन्ठ लगाऊ।
प्यासी आंखे जी भर पी ले,
"रैना"फिर सदियों तक जी ले। "रैना"

jindgi ka

जिन्दगी का रास्ता आसान कब है,
कहर,मुश्किल से डरा इन्सान कब है।
ठान मन में आदमी जब भी चला है,
रोक पाया फिर कदम तूफान कब है। "रैना"

jindgi ka rasta aasan kab hai,
kahar mushkil se dra insan kab hai.
thhan mn me aadmi jb bhi chla hai,
rok paya fir kadm tufan kab hai.  "raina"
good evening ke sath..........

सोमवार, 29 अक्टूबर 2012

sir pe na koi udhari

 सिर पे कोई न उधारी हो,
यूं सुख सुविधा भी सारी हो।

मैं हाथ न फैलाऊ मौला,
चाहे पोक्ट कम भारी हो।

घर लड़के के बिन सूना है,
हसरत इक बेटी प्यारी हो।

अब तो अपना हाल बुरा है,
यूं दुश्मन ने न गुजारी हो।

"रैना"की ये विनती मालिक,
हम पे कृपा तुम्हारी हो।  "रैना"


रविवार, 28 अक्टूबर 2012

bewajh panga n lijiye

बेवजह पंगा न लिया जाये,
जो होता होने दिया जाये।
अपने तक आये न आंच,
कुछ ऐसा ही किया जाये।

दीप मन में जब जले गें,
बाग़ में गुल तब खिले गें।

राह मुश्किल कब लगे है,
ठान कर जब हम चले गें। 

पेट सिकुड़े भूख से जब,
बात दिल की तब सुने गें।

जिन्दगी से क्यों गिला है,
करम से ही सुख मिले गें।

काश "रैना"मान जाये,

यार से जा क्या कहे गें।  "रैना"
बात दिल की जब सुने गें,
फूल गुलशन में खिले गें,

ठान कर जब भी चले गें,
रास्ते खुद ही बने गें।
राह मुशिकल मत दुखी हो,

दीप मन में जब जले गें,
बाग़ में गुल तब खिले गें।
राह मुश्किल कब लगे है,
ठान कर जब हम चले गें। 
पेट सिकुड़े भूख से जब,
बात दिल की तब सुने गें।
जिन्दगी से क्यों गिला है,
करम से ही सुख मिले गें।
काश "रैना"मान जाये,
यार से जा क्या कहे गें।  "रैना"








yojnabad daka

योजनाबद डाका डालने को कसे लंगोटे हैं,
डाकूओं ने मिल बैठ कर बदले मुखौटे हैं।
जनता को मुर्ख बनाने को चली है ये चाल,
वैसे पहले वालो के पूरे हो गये अब कोटे है।
सब का मकसद एक लूट खसोट भ्रष्टाचार,
किसी को कम न जानिए बड़े क्या छोटे है। 
अति उजले कपड़े पहनते होठों पे मुस्कान,
कड़वी ये सच्चाई ये तो दिल के काले झोटे हैं।
देश को गिरवी धरने में इनको नही संकोच,
माया सूरा सुन्दरी के शौक़ीन दिल के खोटे हैं।
"रैना"विदेशी सोचते अब देख नेताओं का हाल,
राम रहीम के देश में क्या मसीहा ऐसे होते है।      "रैना"

sirt bdli

योजनाबद डाका डालने को कसे लंगोटे,
 डाकूओं ने मिल बैठ कर बदले मुखौटे। "रैना"





नींद से दुश्मनी हो गई,
रात से दोस्ती हो गई।
हम गिला मौत से क्यों करे,
बेवफा जिन्दगी हो गई।
यार को याद जब भी किया,
दिल कहे बन्दगी हो गई।
जी रहे बस बुरा हाल है, 
शहर में गन्दगी हो गई।
हुस्न की बात होने लगी,
सच कहर सादगी हो गई।
काश"रैना"अभी समझता,
इश्क अब दिल्लगी हो गई।  "रैना"

शनिवार, 27 अक्टूबर 2012

bat dil ki jab sune

बात दिल की जब सुने गें,
फूल गुलशन में खिले गें,
ठान कर आगे बढ़े गें,
रास्ते तब ही बने गें।

sab se wfa krta

 दोस्त दगा करते रहे,,
 हम तो वफा करते रहे,
आंखें खुली समझे तभी,
"रैना" खता करते रहे। "रैना"
 


kdvi schchai



कविता
         देशी घी के पकवान

जीते जी तो ???
राजू की माँ रही परेशान,
उस वक्त तो राजू को ????
आया न माँ का ध्यान,
भूखी प्यासी दुखयारी ने,
दे दी अपनी जान,
माँ के मरने बाद राजू ????
दिखाए है झूठी शान,
भोज में खिलाये लोगों को,
देशी घी के पकवान।
"रैना"कहे जीते जी माँ बाप का ????
मत करो अपमान,
जन्म देने वाले यही तो है भगवान। ..."रैना"
सुप्रभात जी ............good morning ji

mangai pankh failati rhi.

खुली कविता है जी सेमी ग़ज़ल

ये महंगाई तो पंख फैलाती रही,
यूँ त्यौहारों की ख़ुशी जाती रही,
रसौई गैसे के फिर बढ़ा दिये दाम,
दुखी जनता रोती चिल्लाती रही।
माँ ने पेट भर न कभी खाना खाया,
बेटी की शादी के लिए पैसे बचाती रही।
देख कर अपनी ही पतली हालत को,
हंसी होठो पे आकर वापिस जाती रही।
जिसके बारे में मैंने कभी सोचा नही,
वो आकृति मेरे सपनों में आती रही।
बेशक मौत से तो डरता है हर कोई,
यूँ जिंदगी मौत को ठेगा दिखाती रही।
शमा तू जले ये तो तेरी किस्मत है,
फिर तू परवाने को क्यों जलाती रही। "रैना"

desha ma deshg

हरी के अपने प्रदेश हरियाणा पर कटाक्ष कर रहा हूँ,
अपने विचारों से अवगत करवाए।
 पहले कहते थे??????????
देसा मा देस हरयाणा,
जहाँ दूध दही घी का खाना।
और अब?????????????
देसा मा देस हरयाणा,
इब हर घर स मयखाना। "रैना"

sutte lga gye aur

सुट्टे लगाते रहे और ही हम चिलम भरते रह गये,
प्रमोशन चम्मचों को मिला हम कर्म करते रह गये। ... "रैना"

rajniti ki hwa

राजनीति की तेज हवा चली हुई है देश में,
भेडिये खुले आम घूम रहे नेता के भेष में।
देखिये तो अब हाल इस देश के मसीहों का,
हर कोई फसा हुआ किसी न किसी केस में,
कोयला खा गये चारा खा गये सारा देश,
देखो बेशर्म बेईमान पैसा जमा करे विदेश में।

"रैना" अच्छा है जो हो रहा दिल न जला,
तू भी नेता बन जा क्या रखा है क्लेश में। "रैना"

pahle ldke dudh ghi

पहले लड़के दूध घी खाते थे,
और हष्ट पुष्ट नजर आते थे,
मगर अब लड़के बेल पूरी खाते है,
इलू इलू गाते है???????
और कांगड़ी पहलवान नजर आते है। "रैना"

yu khyalon me

यूँ ख्यालों में खोना अच्छा कब है,
देखा सपना होता सच्चा कब है,
पांच दर्जन देख चुका है बसन्त,
ये दिल तेरा फिर अब बच्चा कब है। "रैना"

शुक्रवार, 26 अक्टूबर 2012

kamal hai

कमाल है कमाल है कमाल है,
भारत देश में सिर्फ भेड़ चाल है।
हमने उन्हें लूटने का रास्ता खुद दिखाया है,
वक्ताओं को सत गुरु बाबा बनाया है।
जिनका त्याग तपस्या न कोई रियाज है,
फिर भी वो हमारा बाबा सतगुरु महाराज है।
ये बात समझ नही आती,
बाबा के पीछे जनता क्यों दौड़ी जाती।
आदि शक्ति का अंश महिलाये????
ठगों के पैरो में माथा रगडती है,
मेरी माँ बहनें सच्चाई को न पकडती हैं।
ऐ मेरी बहनों??????
तुम चाहो तो यमराज को झुका सकती हो,
लक्ष्मी बाई बन तलवार चला सकती हो,
तुम अब तो जहाज भी उड़ा सकती हो।
फिर अब दौराहे पे क्यों खड़ी हो,
बाबा के चक्करों में क्यों पड़ी हो।
ये बाबा खुद भिखारी है,
सिर्फ माया के पुजारी है।
कुछ बाबाओं ने फ़िल्मी कलाकार नौकरी पे लगा रखे हैं,
वैसे लगते बाबा के भक्त पक्के है।
कुछ बाबा तो किराये की सुंदरियां नचवाते है,
उनसे अपने चरणों में आर्टिफिशल गहने चड़वाते है,
ये सब देख भोली भाली महिलाये प्रभावित हो जाती है,
और अपने असली सोने गहने के चढ़ा आती है।
ये कहने को सूफी पीते है बोतल आधी,
झूठ के देकेदार नाम है सत्यवादी।
मेरी आप सबसे हाथ जोड़ विनती??????
बाबा के चक्करों में न आयो,
अपने माँ बाप की सेवा में ध्यान लगाओ।
शुद्द कमाओ शुद्द खायो।   ......................"रैना"



niand ko dushmni hamse

नींद से दुश्मनी हो गई,
रात से दोस्ती हो गई।
क्यों गिला मौत से ही करे,
बेवफा जिन्दगी हो गई।
यार को याद जब भी किया,
दिल कहे बन्दगी हो गई।
जी रहे बस बुरा हाल है, 
शहर में गन्दगी हो गई।
हुस्न की बात होने लगी,
सच कहर सादगी हो गई।
काश"रैना"अभी समझता,
इश्क अब दिल्लगी हो गई।

sare shahar men

दोस्तों आप की तवाजो चाहू गा।

तूने हमें अक्सर रूलाया बहुत है,
ये दर्द हमने भी छुपाया बहुत है।
है बेवफा या बावफा सच सच बता,
कातिल अदा ने दिल सताया बहुत है।
सीरत नही अब लोग सूरत देखते,
इन्सान ने खुद को गिराया बहुत है।
खिदमत करें माँ बाप की ये फर्ज है,
माँ बाप ने तो दुःख उठाया बहुत है।
है आदमी ही गल्त जो उठता नही,
आवाज दे उसने जगाया बहुत है।
"रैना"भला तुझसे गिला कैसे करे,
मुश्किल घड़ी में भी हंसाया बहुत है, "रैना"



बुधवार, 24 अक्टूबर 2012

sab ne hi jana hai

सब ने ही जाना हैं,
जाना तो ऐसा जाना,
लौट के न आना हैं।
सब ने ही ..........
राजा वजीर चाहे,
जोगी फकीर चाहे,
अंत है निशचित,
राँझा हो हीर चाहे,
सब के ही वास्ते,
एक ही ठिकाना हैं।
सब ने ही ...........
रावण गयो राम गयो
कंस धनश्याम गयो,
समझा न कोई अबतक,
कोन से धाम गयो,
ये तो सच्चाई है,
ये शहर बेगाना है।
सब ने ही ............
"रैना" ये कम कर,
मौत से कभी न डर,
औरों की सेवा कर,
जीवन में सुख भर,
उसने है रचा सारा,
उसका ताना बाना है।
सब ने ही ............"रैना"
gazal k nya rang

चाहे रूतबा उंचा कद हो, 
पर अरमानों की इक हद हो। 
खाना पीना मस्ती सोना,
जीवन का कोई मकसद हो।
गर जीने की हसरत बाकी,
फिर तो ये दिल पत्थर शद हो।
इस से तो मरना ही अच्छा 
तू हरगिज बन्दे मत बद हो,
फिर तो गुल जैसा खिल जाये,
जो "रैना" तेरा अरशद हो। "रैना"

शद=मजबूत, अरशद=शिष्य 
chahe rutba uncha kad ho,
par armano ki ik had ho.
khana pina masti sona,
jiwan ka koi maksad ho.
gar jine ki hasrat baki,
fir to ye dil ptthr shad ho.
is se to mrna hi achchha,
tu hargij bande mat bad ho.
fir to gul jaisa khil jaye,
jo "raina" tera arshad ho. "raina"
shad=mjbut, arshad=shishy

chahe rutba uncha

चाहे रूतबा उंचा कद हो,
अरमानों की तो इक हद हो।
खाना पीना मस्ती सोना,
जीवन का कोई मकसद हो।

मंगलवार, 23 अक्टूबर 2012

bichhude muddt ho gai

बिछुड़े मुद्दत हो गई,
किया न सोच विचार,
राम को मिलने के लिए,
तू मन का रावण मार। "रैना"
  

doston dshhar

दोस्तों आओ ????????
अब की बार दशहरा????
कुछ इस तरह मनाये,
रावण जी के पुतले को नही?????
मन में बैठे रावण को जलाये। "रैना"
जय सीता राम ........महा ज्ञानी रावण की जय ......

हम हर वर्ष रावण के ??
अनगिनत पुतले जलाते है,
अफ़सोस ??
ये भारत देश की बदकिस्मती है,
चार गुना और रावण पैदा हो जाते है।
वो रावण चाहे अभिमानी था,
पर महाज्ञानी खानदानी था।
मगर आज के रावणों को न,
कोई भी ज्ञान न खानदान है,
अक्सर सफेद कपड़ो में नजर आते,
आज के रावणों की यहीं पहचान है। "रैना"


hai tmnna kbhi

ग़ज़ल
है तमन्ना कभी बात हो,
देखते कब मुलाकात हो।
सोचते हम कई साल से,
काश अब आज बरसात हो।
चांदनी हो खिली कमल सी,
मिलन की खास शुभरात हो।
भूलता आदमी क्यों भला,
कर्म से ही बनी जात हो।
है वफा का सिला ये मिला,
लाख गम खाक जजबात हो।
जख्म नासूर हैं बन गये,
रास्ता देखती मौत हो।
जानते हाल जब "रैन का,
पूछते क्यों सवालात हो। "रैना"

videshi neta

व्यंग्य कविता

विदेशी नेता सौ साल की सोचते न थकते हैं,
भारत के नेता सिर्फ पांच वर्ष की सोच रखते हैं।
विदेशी सोचते देश को आगे कैसे बढ़ाना है,
हमारे नेता सोचते कुर्सी को कैसे बचाना है।
विदेशी नेता पैसे को हाथ भी न लगाते हैं,
अपने देश का धन अपने देश पर लगाते है।
मगर ये बेशर्म लाखों करोड़ डकार जाते है,
पैसे जा कर स्विस बैंक में जमा करवाते हैं।
विदेशों में न कोई किसी प्रकार का ही वाद है,
मगर यहाँ भाई भतीजा और दामादवाद है।
परिवार व पार्टी वाद ने देश बरबाद किया है,
फिर भी हमने कोई भी सबक न लिया है।
जागो परिवार व पार्टी वाद की परम्परा तोड़ो,
देशवासियों इतिहास के नये पन्ने जोड़ो।
तभी हमारा कल्याण होगा,
भारत देश और महान होगा।
भारत माता की जय ...... जय माँ भारती


सोमवार, 22 अक्टूबर 2012

mere maola

मेरे मौला ऐसा कर दे,
सब की खाली झोली भर दे।
भूखे को मिल जाये रोटी,
मुफ्लिस को तू दौलत जर दे।
हर इक को दे अपना आंगन,
बेघर को सिर पे छत घर दे।
तेरी रहमत को सब माने,
इतना तो तू सबको डर दे।
उड़ कर पंछी मंजिल पा ले,
उड़ने खातिर सबको पर दे।
तुझको पाना मेरा मकसद,
"रैना" के सिर पे कर धर दे। ......"रैना"
सुप्रभात जी ........ जय माता की

mere maula aesa krde,
khali sabki jholi bhrde.
bhukhe ko mil jaye roti,
muflis ko tu dault jrde.
har ik ka ho apna aangan,
beghar ko sir pe chhat ghar de.
teri rahmat ko sab mane,
itna to tu sab ko drde.
ud ke panchhi manjil pa le,
udne khatir sabko prde.
tujhko pana mera maksad,
"raina" ke sir pe kar dhar de."raina"
good morning ji ......................

mere maola

mere maola aesa krde,
khali sabki jholi bhrde.
bhukhe ko mil jaye roti,
muflis ko tu dault jrde.
har ik ka ho apna aangan,
beghar ke sir pe chhat ghar de.
teri rahmat ko sab jane,
itna to sab ko drde.
mksad sabka tujhko pana,
sbke sir pe kar tu dhrde.
ud ke panchhi manjil pa le,
udne khatir sabko prde.
bigdi sabki kismat bdle,
raina" ko ab khush tu krde. "raina"


नेक सब काम करते रहे,        
यार के नाम करते रहे।           गम छुपा के रखे हम सदा,         सुख सरेआम करते रहे।        दूसरे शक न करते तभी,          सब खुलेआम करते रहे।         ये अदा ख़ास अपनी पता,          बात हम आम करते रहे।         

काश मैं छोड़ तू फकत तू,       
सुबह से शाम करते रहे।       
जिन्दगी भर करे बंदगी,          
"रैन"आराम करते रहे। "रैना"

 nek sab kaam karte rhe,
yaar ke nam karte rhe..
gam chhupa ke rkhe ham sda,
 sukh sareaam karte rhe.
 doosre shak n karte tbhi,
 sab khuleaam karte rhe.
 ye ada khas apni pta,
 baat ham aam karte rhe.
 kash mai chos tu fakat tu.
subah se sham karte rhe..
 jindgi bhar kre bandgi,
 "rain" aaram karte rhe."raina"

नेक सब काम करता रहू,        
यार के नाम करता रहू।           गम छुपा के रखू मैं सदा,         सुख सरेआम करता रहू।        दूसरे शक न करते तभी,          सब खुलेआम करता रहू।         ये अदा ख़ास अपनी पता,          बात मैं आम करता रहू।         

काश मैं छोड़ तू फकत तू,       
सुबह से शाम करता रहू,        
जिन्दगी भर करे बंदगी,          
"रैन"आराम करता रहू। "रैना"

 nek sab kaam karta rahu,
yaar ke nam karta rahu.
gam chhupa ke rakhoo mai sda,
 sukh sareaam karta rahu.
 doosre shak n karte tbhi,
 sab khuleaam karta rahu.
 ye ada khas apni pta,
 baat mai aam karta rahu.
 kash mai chos tu fakat tu.
subah se sham karta rahu.
 jindgi bhar kre bandgi,  
 "rain" aaram karta rahu."raina"
नेक सब काम करता रहू,        nek sab kaam karta rahu,
यार के नाम करता रहू।           yaar ke nam karta rahu.गम छुपा के रखू मैं सदा,         gam chhupa ke rakhoo mai sda,सुख सरेआम करता रहू।         sukh sareaam karta rahu.दूसरे शक न करते तभी,           doosre shak n karte tbhi,सब खुलेआम करता रहू।          sab khuleaam karta rahu.ये अदा ख़ास अपनी पता,           ye ada khas apni pta,बात मैं आम करता रहू।          baat mai aam karta rahu.

काश मैं छोड़ तू फकत तू,        kash mai chos tu fakat tu,
सुबह से शाम करता रहू,          subah se sham karta rahu.
जिन्दगी भर करे बंदगी,            jindgi bhar kre bandgi,  
"रैन"आराम करता रहू। "रैना"   "rain" aaram karta rahu."raina"



शौख इक शाम करता रहू।
प्यार बदनाम करता रहू।
गम छुपा के रखू गा सदा,
सुख सरेआम करता रहू।

kubbh

नेक सब काम करता रहू,  
यार के नाम करता रहू।

गम छुपा के रखू मैं सदा,
सुख सरेआम करता रहू।
दूसरे शक न करते तभी,
सब खुलेआम करता रहू।
ये अदा ख़ास अपनी पता,
बात मैं आम करता रहू।




शौख इक शाम करता रहू।
प्यार बदनाम करता रहू।
गम छुपा के रखू गा सदा,
सुख सरेआम करता रहू।

धर्म क्या है नही जानते,
मुर्ख खुद को खुदा मानते।
बंदगी पे किताबे लिखी,
खाक खुद ही रहे छानते।
वक्त के साथ हम भी चले,
लोग ये भ्रम अब पालते। 
भूख से जो निभाते रहे,
शिकन वो बल नही डालते।
शाम की फ़िक्र अब रैन को,
दिन चढ़े में न पहचानते। ...... "रैना"


dharm kya hai nhi jante,
murkh khud ko khuda mante.
bandgi pe kitabe likhi,
khak khud bhi rhe chhante.
waqt ke sath ham bhi chle,
log ye bhram ab palte.
bhukh se jo nibhate rhe,
shikan vo bal nhi dalte.
sham ki fikr ab "rain" ko,
din chrhe me n pahchante..."raina"

dharm kya

धर्म क्या है नही जानते,
मुर्ख खुद को खुदा मानते।
बंदगी पे किताबे लिखी,
खाक खुद ही रहे छानते।
वक्त के साथ हम भी चले,
लोग ये भ्रम अब पालते। 
भूख से जो निभाते रहे,
शिकन वो बल नही डालते।
शाम की फ़िक्र अब रैन को,
दिन चढ़े में न पहचानते। ...... "रैना"

रविवार, 21 अक्टूबर 2012

dur le

कोन मेरी सुनेगा सदा,
दूर ले जा रही है हवा।
काश ये मानती जिन्दगी,
साथ मेरे न करती दगा।
क्यों बुरा मैं कहू यार को,
ये सजा उस खुदा की रजा।
भूल बैठा न चिन्ता रही,
अर्ज मेरी मुझे भी जगा।
चुप रहु कुछ न बोलू सनम,
कर मुझे माफ़ दे दे सजा। "रैना"

tum kaya jno

जिन्दगी के लिये बन्दगी,
बन्दगी को मिली जिन्दगी।

यारों लिखने कुछ और रहा था लिख दिया कुछ और

जानता सब भला आदमी,
रास्ते कब चला आदमी
दुःख सहे चुप रहे क्या करे,
आग में फिर जला आदमी।
दूर तक नजर है दौड़ती,
भीड़ में कब मिला आदमी।
तब फटी आँख हैरान थी,
आदमी ने छला आदमी।
दूरियां कम नही बीच की,
आदमी से मिला आदमी।
अलविदा यार को कह चले,
क्या पता कब मिले आदमी।
है दुखी घर बसा छोड़ कर,
सफर पे फिर चला आदमी। "रैना"

दर्द के शहर में कब दवा,
बेवफा कर वफा दे दुआ।
ये बता क्या खता हो गई,
जान है जिस्म से क्यों जुदा।
जान बुझ ये खता क्यों करे,
दिल मिला फर्ज तू कर अता।
शहर में तू कहाँ खो गया,
ढूंढ़ते यार का हम पता।
दूर तक दस्त है रेत का,
इश्क तो दर्द है इक सजा।
शर्म तो तब करे कुछ मिले,
यार को यार अब दे दगा।
"रैन की शाम थी जब ढली,
यार कह चल दिये अलविदा। ....."रैना"

अफ़सोस अकेले ही जाना होगा,
कोई जाता
गर  तेरे साथ चले होते,
आखिर में इन्सान अकेला जाता।


raston pe barf jmi

दोस्तों आप की नज़र

 रिश्तों पे बर्फ जमी सी है,
दिल में फ़िलहाल नमी सी है।
रब ने सब कुछ तो बख्शा है,
पर तेरे बगैर कमी सी है।
हुस्न अदा क्या तारीफ करु,
हूर परी फूल कली सी है।
हो सकता है कुछ हल निकले,
आगे अब बात बढ़ी सी है।
पहले तो उठता है धुँआ
जब भी ये आग जली सी है।
"रैना"आखिर कब तक देखे,
कुछ दिन तो बात टली सी है। "रैना"

शनिवार, 20 अक्टूबर 2012

husn ter kahar

इक ग़ज़ल दोस्तों के नाम

छलकता है हुस्न तेरा कहर ढाये,
सादगी ने चार चाँद भी लगाये।
तेरी नजरे तीर का दिल पे असर है,
मौत आती अब न दिल को चैन आये।
बेवफा होने लगे लख्ते जिगर भी,
आग घर को खून अपना ही लगाये।
हुस्न के दम से जमाना महकता है,
फूल खिलते बज्म रोशन नजर आये।
फेर ली है आँख तूने क्यों बता दे,
काश"रैना"बात अपनी पलट जाये। ...."रैना"

kalrtri kali maiya

 कालरात्रि माता काली,
 मुंड धारणी खप्परवाली,
करो अँधेरा दूर,
माता अर्ज करो मंजूर,
करो अँधेरा ..........
भक्तजन मजबूर,
मइया जी करो अँधेरा दूर ..
करो अँधेरा .................
शीश झुकाने कहाँ पे जाये,
पागल मनवा समझ न पाये,
हर तरफ है छीना झपटी,
बाँट जोह रहे बैठे कपटी,
राह देख रही दुनिया सारी,
दुःख हरे गी मइया प्यारी,
हर दिल हर घर में माँ काली,
चमके तेरा नूर।
 करो अँधेरा .........
भक्तजन बहुत तंग है माता,
दुनिया का बदला रंग है माता,
सच की कीमत कोई न जाने,
झूठ बैठ गया आन सिरहाने,
दुष्टों का माँ भ्रम तू तोड़े,
खप्पर धारण कर खून निचौड़े,
और न ज्यादा देर करो,
दुष्टों का तोड़ गरूर,
करो अँधेरा ................"रैना"
जयकारा शेरोवाली का,
बोलो सच्चे दरबार की जय ........


शुक्रवार, 19 अक्टूबर 2012

skndhmata

स्कन्ध माता,
सुख की दाता,
विनती हमारी करो स्वीकार,
बख्शो प्यार माँ बक्शो प्यार।
बख्शो प्यार .....................
हर तरफ छल कपट है धोखा,
इमानदार अपने हाल पे रोता,
अब बदल गया माँ तेरा संसार।
बख्शो प्यार .....................
"रैना" से मइया  कर न तू दुरी,
जान भी लें माँ मेरी मज़बूरी,
माता जोड़ भी दे मन के तार।
बख्शो प्यार ....................."रैना"


muddt phle

मुद्दत पहले बिछुड़े,
ढूंढा तो बहुत मगर,
तेरे घर का पता ही,
न मिला भटके "रैना" ........"रैना"

गुरुवार, 18 अक्टूबर 2012

kushmanda maa

कुषमाडा माँ जगकल्याणी तूने है उपकार किया,
सतरंगी इस दुनिया का माँ तूने विस्तार किया।
जय कुषमाडा माँ  जय ...............................
दयावान गुणवान माँ तू महान तेरी ऊँची शान,
हमें बक्शो चरणों की भक्ति करो विनती परवान,
जो चाहिए था मात भवानी मैंने है मांग लिया।
जय कुषमाडा माँ  जय ...............................
दुःख हरे सुख करे खोले बंद दरवाजे करे पुरे अरमान,
अहंकारी दुःख पाते दूर माँ से जाते है बड़े ही नादान,
"रैना" माँ से प्रीत लगा ले सब्र कर जो है माँ ने दिया।
  जय कुषमाडा माँ  जय ...............................
जय माता की ........जय कारा  शेरो वाली का
           बोलो सच्चे दरबार की जय।

mai chunta

मैं चुनता रहता हूँ अल्फाजों के मोती,
अब ये मेरी जीवन का श्रृगार करे गे। ..."रैना" 
महफ़िल में आ कर तेरी,
जाग उठे अरमान मिरे,
बेशक उनको मिल लेगे,
दोस्त जो अनजान मिरे।
हद में रहता हूँ अपनी,
 सीने में तूफान मिरे,
मैं जानू औकात मिरी,
दोस्त तो भगवान मिरे। ...."रैना"

il ke driche

दिल के दरिचें खोल रखे,
पर न किसी ने दस्तक दी।
मजबूरी में फिर" रैना"
दरवाजा ही खोल दिया। ..."रैना"
घर में ही ख़ुशी जब मिलती हो,
फिर गैरों के घर क्यों जाये,
जो जाये मुजरिम दोषी वो,
उस इससे सख्त सजा पाये। .."रैना"

rote de gath me

रोते हुये के हाथ में एक कलम देता गया,
वो यार था या मेरा दुश्मन समझ आई नही। ....."रैना"

दोस्तों खास आप के लिए

बात वफा की कुत्ते ही भले निकलें,
बंदें तो अक्सर दिल के जले निकलें ।
हमको रास कभी न उजाला आया,
सच हम तो घर से शाम ढले निकलें।
खत्म किया हमने सारा ही किस्सा,
क्यों अरमानों के बच्चे पले निकलें।
सम्भाल रखे जो मुद्दत ख़त उनके,
बक्सा खोल के देखा वो गले निकलें।
अब पीछे से फिर आवाज न देना,
"रैना"अब लम्बे सफर पे चले निकलें। ....."रैना"

wfa ki bat chali

दोस्तों खास आप के लिए

बात वफा की कुत्ते ही भले निकलें,
बंदें तो अक्सर दिल के जले निकलें ।
हमको रास कभी न उजाला आया,
सच हम तो घर से शाम ढले निकलें।
खत्म किया हमने सारा ही किस्सा,
क्यों अरमानों के बच्चे पले निकलें।
सम्भाल रखे जो मुद्दत ख़त उनके,
बक्सा खोल के देखा वो गले निकलें।
अब पीछे से फिर आवाज न देना,
"रैना"अब लम्बे सफर पे चले निकलें। ....."रैना"

बुधवार, 17 अक्टूबर 2012

beshak jnta

बेशक जनता को??????
 एक बात समझ आई हैं???????
एक ही थैली के चट्टे बट्टे,
नेता???????????
चोर चोर मौसेरे भाई है।
कहने को जनता के शुभचिंतक,
सही मायनों में कसाई हैं।
किसी एक पर इल्जाम नही,
अब सब ने लूट मचाई है।
देखिये इन चोरों को ????????
बड़ी कड़वी लगती सच्चाई है।
कोई दामाद को बचाये,
कोई अध्यक्ष को साफ बताता है।
जो अधिकारी निष्पक्ष जाँच करे,
उसको बदला जाता है।
देश की जनता की बदनसीबी,
प्रधानमंत्री को सज्ञान न ले रहे,
कानून मंत्री????????
जान से मरने की धमकी दे रहे है।
बेशक अब भारत देश लगता,
अंधेर नगरी चौपट राजा,
गरीब इमानदार रो रहे,
बेईमान चोर उच्चके बजाये बाजा।
नेता कहते खाए जा खाए जा। ......."रैना"

chandrghanta maa

चंद्रघंटा माँ,कर दया माँ,
बख्शो चरणों की भक्ति,
तेरी भक्ति से ही माता,
मिलती जीवन शक्ति।
बख्शो चरणों की भक्ति .........
सुख की सागर माँ सुखदानी हो,
जीवन रक्षक माँ  कल्याणी हो,
माँ अर्धचन्द्र तेरे माथे पे साजे,
बैठी शेर पे मइया प्यारी लागे,
जग जननी आदि शक्ति।
बख्शो चरणों की भक्ति ........
चरणों से माँ कभी दूर न करना,
रहे तेरी किरपा मजबूर न करना,
रैना" का माँ जीवन सवंर जाये,
हर शै में माँ मुझे नजर तू आये,
इतना कर महाशक्ति।
बख्शो चरणों की भक्ति ........
जय माता की  जयकरा शेरोंवाली का,
बोलो सचे दरबार की जय। 

pyar kja hai

प्यार कजा संभल के करना,
दौर बुरा बेमौत न मरना।
दुश्मन वार करे सब जाने,
दोस्त चाल चले गा डरना।
औरों से लड़ता रहता है,
कब सीखे गा खुद से लड़ना।
जीवन पशु जैसा ही जीना,
फिर तय है दलदल में पड़ना।
"रैना" उल्फत सुख देती है,
मत नफरत की पुस्तक पढ़ना।  "रैना"

aankhe trfe

दोस्तों प्यार विषय पर अलग सी ग़ज़ल

आँखे तरसे तड़फे मन अति प्यासा,
न जनत है कोई प्यार की परिभाषा।

आशिक तब ही रोये धक्के खाये,
समझा न जमाना ये भेद जरा सा।

कहते लोगों ने चाँद हैं पकड़ा,
सोचे चाँद किसने कैसे तलाशा।


दर्दे दिल को बस आशिक ही जाने,
दुनिया के खातिर ये खेल तमाशा।

प्यार करो प्यार नसीहत ही देते,
आशिक बदकिस्मत को मिलत निराशा।

अब दुनिया की कोई फिकर नही है,
"रैना" ने तो अपना यार तलाशा। "रैना"