एक अजनबी मेरे दिल के करीब,
मुझको लगने लगा है बहुत हबीब।
वैसे आज तक हम उसे मिले नही,
मेरे अरमानों के फूल खिले नही,
फिर भी महसूस होता है,
हम कई बार मिल चुके है।
ऐसा क्यों हो रहा हम सोचते अक्सर,
क्या ये हमारे साथ हैं या उसके साथ भी,
हमारे बीच की दूरी जैसे जमीं से आसमान,
फिर भी हम नादान उनसे मिलने का अरमान,
पाले बैठे है।
काली अँधेरी रात में,
चकौर चाँद को कभी नही देख सकती,
फिर वो ऐसा सपना क्यों देखती है।
कोई उससे पूछे तो वो कहेगी दिल पे जोर नही,
दिल पे किसी का जोर नही झूठा ये शोर नही।
दिल का क्या है ये किसी पे भी आ सकता है,
राजा को भिखारी बना सकता है।
मेरा दिल भी किसी पे आने लगा है,
मैं तो पहले ही भिखारी हूँ,
मुझे ये और क्या बनाएगा,
क्या मुझे मंजिल पर पहुचायेगा,
ये सोच कर मैंने दिल की मान ली है,
आगे चलने की ठान ली है।।।।।।।।।।।"रैना"
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