sufi tadka
सोमवार, 3 दिसंबर 2012
मयकश ने कब पीना सीखा,
गफलत में हैं जीना सीखा।
आशिक तो हंस हंस के सहते,
जख्मों को कब सीना सीखा। "रैना"
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