sufi tadka
रविवार, 2 दिसंबर 2012
दिल के बदले दिल का मिलना,
अब मुशिकल है गुल का खिलना।
उल्फत की राहे हैं मुशिकल
चलना तो सम्भल के चलना।
बेशक तय उस नगरी जाना,
मस्ती से जी छोडो डरना।
"रैना"की हसरत ये मकसद,
मरना तो कुछ करके मरना।"रैना"
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