चलना जमीं पे सीख ले,
उड़ना हवा में छोड़ दे,
मत पाल रे तू ये भ्रम,
झूठा भ्रम है तोड़ दे।
जाने नही अनजान सब,
है शाम होने को अभी,
पंछी उड़े है चल दिये,
मुड के न अब आये कभी।
ढलती जवानी की सुनो,
दिल की यही तो है सदा।
मदहोश रैना"बेखबर,
सर पे खड़ी है वो कजा।"रैना"
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