सोमवार, 5 नवंबर 2012

rote bchcho ko

मां की शान में चंद अल्फाज

रोता बच्चा बहलाती मां
है भूखी भी सो जाती मां।
मां की ममता मां ही जाने,
बच्चे पे जान लुटाती मां।
अपना सुख बच्चों में बांटे,
देखो खुद पे इतराती मां।
बच्चों के खातिर सब करती,
हर मुश्किल से टकराती मां।
इस युग में मां की बेअदबी,
चुप ही आंसू पी जाती मां।
"रैना"सोचे मां के बारे,
है किस दुनिया से आती मां।
सुप्रभात जी .......good morning ji.

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