दोस्तों आज फिर बचपन,
मां का प्यार,गाँव याद आ गया
एक गीत पेश कर रहा हूँ।
ओ लस्सी मक्की की रोटी साग,
मां री बहुत याद आये,
तेरे प्यार वाला मिठ्ठा वो राग,
मां री बहुत याद आये।
मां री बहुत याद .................
ओ लस्सी मक्की की रोटी .....
याद आये बचपन दिन वो बहार के,
आंखों आगे घूमते पल वो प्यार के,
लगा दिल पे यादों वाला दाग,
मां री बहुत याद .................
ओ लस्सी मक्की की रोटी .....
याद आये कुएं का डंडा मिठ्ठा पानी,
गांव की मिट्टी ने मुझे बख्शी जवानी,
वो तालाब के किनारे वाला बाग़,
मां री बहुत याद आये।
मां री बहुत याद .................
ओ लस्सी मक्की की रोटी ....."रैना"
मां का प्यार,गाँव याद आ गया
एक गीत पेश कर रहा हूँ।
ओ लस्सी मक्की की रोटी साग,
मां री बहुत याद आये,
तेरे प्यार वाला मिठ्ठा वो राग,
मां री बहुत याद आये।
मां री बहुत याद .................
ओ लस्सी मक्की की रोटी .....
याद आये बचपन दिन वो बहार के,
आंखों आगे घूमते पल वो प्यार के,
लगा दिल पे यादों वाला दाग,
मां री बहुत याद .................
ओ लस्सी मक्की की रोटी .....
याद आये कुएं का डंडा मिठ्ठा पानी,
गांव की मिट्टी ने मुझे बख्शी जवानी,
वो तालाब के किनारे वाला बाग़,
मां री बहुत याद आये।
मां री बहुत याद .................
ओ लस्सी मक्की की रोटी ....."रैना"
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