दोस्तों पेश है इक मेरे दिल की रचना
तू देता गम मुझको,तेरे गम कम निकले,
हां तुम तो तुम निकले,पर हम तो हम निकले।
शिकवा करते करते,बेशक हिम्मत हारे,
सोचे तन्हा बैठे,फुरसत है दम निकले।
जाने कब ये माने,करता हेराफेरी,
दिल तो बहला मेरा,पर नैना नम निकले।
मुश्किल भी घबराई,देखे मेरी हालत,
तू ही कुछ कर मौला,जुल्फों का खम निकले।
हंस के पीड़ा सहना,मस्ती में ही रहना,
"रैना" उसका सेवक,मुख से बम बम निकले। "रैना"
तू देता गम मुझको,तेरे गम कम निकले,
हां तुम तो तुम निकले,पर हम तो हम निकले।
शिकवा करते करते,बेशक हिम्मत हारे,
सोचे तन्हा बैठे,फुरसत है दम निकले।
जाने कब ये माने,करता हेराफेरी,
दिल तो बहला मेरा,पर नैना नम निकले।
मुश्किल भी घबराई,देखे मेरी हालत,
तू ही कुछ कर मौला,जुल्फों का खम निकले।
हंस के पीड़ा सहना,मस्ती में ही रहना,
"रैना" उसका सेवक,मुख से बम बम निकले। "रैना"
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें