यार की बन्दगी में सूफी गीत
ये मन तरसे,
नैना बरसे,
उस पहले प्यार को,
पी के दीदार को।
ये मन तरसे ................
पी के दीदार ............
बेशक तू मुझ से दूर नही,
मुझको पर्दा मन्जूर नही,
आ सामने आ,
आके झलक दिखा,
इश्क के बीमार को।
ये मन तरसे ......
पी के दीदार ..............
तू मेरी मंजिल मक्सूद है,
तेरे दम से मेरा वजूद है,
तू बनाये मिटाये,
मर्जी से चलाये
इस संसार को।
ये मन तरसे ................
पी के दीदार ............ "रैना"
ये मन तरसे,
नैना बरसे,
उस पहले प्यार को,
पी के दीदार को।
ये मन तरसे ................
पी के दीदार ............
बेशक तू मुझ से दूर नही,
मुझको पर्दा मन्जूर नही,
आ सामने आ,
आके झलक दिखा,
इश्क के बीमार को।
ये मन तरसे ......
पी के दीदार ..............
तू मेरी मंजिल मक्सूद है,
तेरे दम से मेरा वजूद है,
तू बनाये मिटाये,
मर्जी से चलाये
इस संसार को।
ये मन तरसे ................
पी के दीदार ............ "रैना"
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