रविवार, 11 नवंबर 2012

wada krke nibhaya nhi hai

दोस्तों दुखी मन से,
ये गीत लिख रहा हूँ,
देश की हालत पर।

ओ मेरे देश की धरती,
डाकू चोर उच्चके कपटी,
अब ऐसे नेता पैदा करती

ओ मेरे देश ..............
यहाँ राजनीती का मौसम है,
सब अपनी ढपली बजाते है,
जो पिटते जेल में बंद होते,
देखो वो ही नेता बन जाते,
देख के इन की हालत को,
भारत मां है आहें भरती।
ओ मेरे देश ...............
फिर खद्दरधारी नेता ये,
ऐसे देश की सेवा करते है,
लुट के पैसा गरीबों का,
जा स्विस बैंक में भरते है,
कोई नही इन्हें रोकने वाला,
सरकार रक्षा उनकी करती।
ओ मेरे देश ...................
सारा सिस्टम फेल यहाँ,
बस रिश्वत काम चलाती है,
परिवारवाद का बोलबाला है,
इक घर के सारे बाराती है।
अनाज  सड़े गोदामों में,
बेचारी जनता भूखी मरती।
ओ मेरे देश .................."रैना"


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